गुड़िया तीन बहने तीनों बहनों में सबसे छोटी गुड़िया थी दोनों की शादी बहुत अच्छे घर में हुई थी ।
गुड़िया की शादी मीडियम परिवार में हुई थी परिवार में देवर देवरानी और ननद ननद अपनी पढ़ाई कर रही थी।
गुड़िया हमेशा अपने काम में परफेक्ट रहती थी लेकिन फिर भी उसकी सास उसके प्रति गलत व्यवहार करती थी ।
और उसकी देवरानी के साथ बहुत अच्छा व्यवहार करती थी गुड़िया कई बार सोच में पड़ जाती थी कि मैं तो सुबह से उठकर इतना सारा काम करती हूं।
और देवरानी आराम से आकर थोड़ा बहुत काम करके और थकान का बहाना बनाकर अपने कमरे में चली जाती है।
गुड़िया सुबह उठकर सभी के लिए खाना नाश्ता सब तैयार करती और अपने लिए वक्त ही नहीं निकाल पाती ।
धीरे-धीरे गुड़िया अपनी उम्र से बड़ी लगने लगी थी पति रमेश हमें हमेशा उसे कहते थे कि तुम कैसी दिखने लगी हो।
और अपनी देवरानी जूही को देखो कितनी सुंदर और स्लिम दिखती है तुम अपने ऊपर ध्यान ही नहीं देती हो।
गुड़िया कई बार टेंशन ले लेती थी रमेश के पास भी खास जॉब नहीं थी।
थोड़ा बहुत पैसा कमाता था और उसे भी घर में दे देता एक छोटी बच्ची थी।
वह भी बड़ी हो चली थी उसके भी खर्च होने लगे थे यह सब सोच कर गुड़िया बहुत टेंशन में आ जाती थी।
एक बार वह अपने मायके गई कुछ दिनों के लिए गई मायके में चाचा के यहां शादी थी ।
अब उसके हाथ में पैसे भी नहीं थे कि वह अच्छी-अच्छी ड्रेस खरीद ली और बिटिया के लिए भी कुछ दिलवा दे पर उसने घर में किसी से चर्चा नहीं की और चाचा के यहां शादी में मस्ती तो करती थी ।
लेकिन उसका चेहरा उखड़ा हुआ दिखता था रिश्तेदार भी यह देखकर अचंभित हो रहे थे की गुड़िया तो बहुत सुंदर थी कलर भी उसका साफ था कैसी दिखने लगी लेकिन फिर भी गुड़िया अपने आप में खुश रहती थी
और उसके पास इतने अच्छे कपड़े नहीं थे और व्यवहार देने के लिए भी ज्यादा कुछ उसके हाथ में पैसे नहीं थे।
और वह करती भी क्या यह सब देखकर उसकी बहनों ने उसे कुछ कपड़े पहनने दिए और उसकी बिटिया के लिए अच्छी से अच्छी ड्रेस दिलवा दी ।
पर यह सब कुछ वह अपने मायके में कभी भी नहीं बताती थी कि उसकी हालत कैसी है।
पर शादी के बाद उसने सोचा कि मैं अपने भाई को इन सब बातों से जरूर अवगत कराऊंगी जब उसने अपनी हालत के बारे में अपने भाई से और भाभी से चर्चा की ।
तब भाई ने कहा कि तुम दुखी मत हो मैं तुम्हें एक आईडिया देता हूं और उसने एक छोटी सी कंपनी में उसकी जॉब लगा दी।
ससुराल वालों को यह गवारा नहीं था की गुड़िया जाब करें क्योंकि घर पूरा अस्त-व्यस्त हो जाता था।
देवरानी तो कुछ करती नहीं थी लेकिन गुड़िया ने सोच लिया था कि अब मैं जॉब करूंगी क्योंकि मेरे पति का भी उतना खर्च नहीं निकलता है ।
घर खर्चे में ही पूरा पैसा चला जाता है यह सब सोचकर गुड़िया ने जॉब ज्वाइन कर ली ।
जाब कारण घर बहुत डिस्टर्ब हो रहा था धीरे-धीरे उसने अपनी जॉब चेंज कर ली।
और एक अच्छी कंपनी में जॉब करने लगी अच्छा खासा पैसा मिलने लगा और आज उसके पास एक मकान और एक गाड़ी हो गई।
भाई के कारण वह अपने पैरों पर खड़ी हो गई।
भाई से अच्छा मित्र जीवन में कोई और नहीं हो सकता।
विधि जैन
जब भी वह अपने भाई से मिलती है तो अपने भाई को हमेशा कहती है कि भाई जैसा मित्र नहीं हो सकता कोई उसने मुझे इतनी बढ़िया आईडिया दिया और मुझे एक जॉब लगवा कर दी ।
नहीं तो मैं अभी तक घर में ही पड़ी थी क्योंकि गुड़िया ने एमए करके रखा था।
और साथ ही संगीत भी सीख कर रखा था और आज उसकी पढ़ाई कम आ गई।
धीरे-धीरे उसने अपनी शौक भी पूरे करने लगी बाहर निकलने लगी और दोस्तों से मिलने लगी इस तरह से उसके भाई ने उसकी बहुत मदद की।
लेखिका : विधि जैन