हर समय ताने मारने वाली सासु जी को जाने क्या हो गया कि अब वह कुछ भी फैला होने पर नीता को कुछ भी नहीं कहती थीं| क्योंकि अक्सर धूप सामने ही आती थी, नीता जब भी बिट्टू के या बाबूजी के कपड़े सामने सुखाती तो सासु मां हमेशा सामने वाले घर को दिखाकर घर के सामने गंदगी फैलाने के
लिए बहुत डांटती थी। घर में भी डर के मारे बिट्टू को वह कोई खेल का सामान भी फैलाने नहीं देती थी। मां की इसी सफाई की सनक के कारण रवि को भी अपना हर सामान जगह पर रखने की आदत
थी। ऐसा नहीं कि नीता को गंदा घर पसंद हो लेकिन फिर भी उसके ख्याल से घर वह जगह होती है जहां कोई भी अपने आप को टेंशन फ्री और आरामदायक महसूस कर सके। घर कोई होटल थोड़े ही है जो कि हर समय साफ ही रखा जाए।
नीता अगर कपड़े सामने बालकनी में भी सुखाती थी तो या तो कपड़े के स्टैंड पर रखती थी और या धूप में थोड़ी देर को इलास्टिक वाला तार बांधती थी लेकिन —- । घर के पीछे धूप ना होने की वजह से कपड़े बहुत समय में सूखते थे।हर समय सफाई के शौक के कारण उसे लग रहा था कि वह
लगातार तनाव में आती जा रही है। डेढ़ साल का बिट्टू कहीं टॉयलेट ना कर दे हर समय वह उसे यही डर रहता था। कोई मेहमान के जाते ही पहला काम मेज साफ करना होता था ,अगर कहीं
मेहमान उल्टा लौट आए तो? घर के बाहर कुछ ना दिखे इसलिए हर सामान वह अपनी अलमारी में ही डालती जाती थी जिससे हर दिन उसे अपनी अलमारी को सही करने का एक एक्स्ट्रा काम भी होता था।
उसके मायके में हर समय मस्ती का माहौल होता था। घर की हर चीज दिखावटी नहीं होती थी बल्कि इस्तेमाल होती थी। उसका भतीजा चिन्नू मस्त जिंदगी जीता हुआ कहीं पर भी अपने खिलौने लेकर कुछ भी खेलता रहता था। तीनों बहने जब बात करने बैठती थी और पूरी दोपहर मूंगफली सिंघाड़े या
कुछ भी खाती थी तो मजा ही कुछ और होता था। यहां घर में कुछ भी सामान छेड़ो तो उसे ऐसा लगता था जैसे सासू मां की आंखें उसे घूर रही हों। कई बार तो उठते हुए भी डर लगता था कि कहीं
पैरों के निशान ना बन जाए। सासु मां ने घर के डस्टिंग के काम करने के लिए भी एक मेड रखी हुई थी। कई बार नीता को ऐसा महसूस होता था जैसे वह भी घर में रखा हुआ कोई खूबसूरत सामान हो जो कि सिर्फ सजाने के लिए ही रखा हुआ है।
हालांकि नीता ने भी अपने आपको इस माहौल में ढाल ही लिया था लेकिन अब के जब से वह अपने मायके से लौट के आई है तो उसने देखा कि अब सासू मां सफाई के लिए पहली सी सनक नहीं लिए हुए थीं। बिट्टू के साथ प्लास्टिक के अल्फाबेट्स फैलाकर वह खुद भी बिट्टू के साथ खेलती रहती थी और अब अक्सर बिट्टू के साथ कागज पर भी कुछ क्रिएटिव बनाते या खेलते हुए दोनों देखे जा सकते थे।
सामने वाले घर की बहु रानी जब पूजा का प्रसाद देकर गई तो अब के सासू मां ने उसकी सफाई के किस्से सुनाते हुए बिना वजह नीता को हीनता का एहसास नहीं कराया बल्कि बड़बड़ाती हुई बोलीं, बड़ों का अपमान करके क्या पूजा कोई सफल होती है? उन्होंने जो बोलना शुरू करा तो नीता को
बताया कि पिछले हफ्ते जब काफी समय से वह दोनों पति पत्नी शाम को पार्क में नहीं आ रहे थे तो कारण पूछने वह उनके घर में गईं। उनके साफ-सुथरे घर में भार्गव दंपत्ति सबसे पीछे वाले कमरे में बैठे हुए थे। क्योंकि अब मिसेज भार्गव बिना वाकर के और मिस्टर भार्गव बिना व्हीलचेयर के घर में भी
नहीं घूम सकते थे तो घर गंदा ना हो इसीलिए उन्हें सबसे पीछे वाला कमरा दे दिया गया और बहू की बकबक से बचने के कारण वह अब अक्सर घर से निकलते ही नहीं है क्योंकि वाकर ले कर बाहर निकलने से या कि अटेंडेंट को लेकर व्हीलचेयर पर निकलने से मिट्टी के निशान पूरे घर में बन जाते थे
और बेहद सफाई रखने वाली बहु रानी को गंदा घर बिल्कुल पसंद न था। क्या फायदा ऐसी सफाई का जिससे कि घर के लोगों को ही असुविधा हो? नीता तुम सही कहती हो घर कोई होटल थोड़े ही ना है यह तो ऐसी जगह है जहां सबको खुशी और सिर्फ खुशी मिले। सफाई जरूरी है, लेकिन घर का सुविधाजनक होना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
– मधु वशिष्ठ