ओ बहु! जरा इधर तो आ, जल्दी आ इतना धीमे धीमे कहे चलती हो? हमारे जमाने में जब हमारी सास बुलाती थी तो एक सेकंड भी नहीं लगता था आने में। पता नहीं आज कल की पीढ़ी को क्या हो गया है, भागना तो दूर चलना भी नहीं आता है।
साक्षी की सास उसको ऐसे ताने मार रही थी और उसको हमेशा ऐसे ही बुलाती थी, साक्षी को इन पांच सालों में अपने सास के तानो की आदत सी हो गई थी अब और कही न कही वो इन सब से थक चुकी थी पर अपने बेटे और और पति के लिए अपने स्वाभिमान वो भी अंदर ले लेकर सुन लेती थी।
जब वहा साक्षी आई और उसने बोला “हां जी आपने बुलाया”? तभी उसकी सास बोली “इतनी देर से आती हो कि मुझे खुद ही उठके काम करना पड़ जाता है, अब मैने काम कर लिया है, तू जा यहां से, और बैठी रह जैसे पहले बैठी हुई थी।
साक्षी अपने आपे को ना खोते हुए वहां से चली गई। जब शाम को उसका पति शिवा आया तो वो उसके लिए खाना गरम करने रसोई में गई ही थी कि उधर से उसकी सास शिवा के कान भरने आ गई
और साक्षी के साथ साथ उसके माता पिता की भी बुराई कर के कह रही थी कि बेटा देख ना तेरी बीवी मेरे किसी भी काम में हाथ नहीं बटवा ती है, और जब बुलाओ तब आती नहीं आई है, जब आयेगी तब धीरे धीरे ठुमक ठुमक के आती है। अब तू बता इतनी देर में तो मुझे ही काम करना पड़ जाता है।
इतना सब बोलने के बाद वो यहां नहीं रुकी और उसके माता पिता के संस्कारों पर उंगली उठाके कहने लगी “पता नहीं कैसे संस्कार दिए है इसके मां बाप ने इसको, न इसको कुछ आता है न पता है वैसे ही इसके माता पिता है, बिल्कुल ही कामचोर है, शादी के समय भी मुझे ही सब समझना पड़ रहा था, अगर न समझती तो पता नहीं अपनी बारादरी में तो हमारी नाक ही कट जाती।”
उधर साक्षी सब कुछ सुन रही थी और वो रो रही थी साथ में आग बबूला भी हो गई थी, इससे पहले उसकी सास और कुछ बोले उससे पहले ही उसकी *बहु ने सीमा खींच दी* और वो एक दम से आके बोली बस माजी बस बहुत हुआ अब आपका, आप मुझे सुनाती है वहां तक ठीक था, लेकिन आपने मेरे मां बाबा पर उंगली उठा कर अच्छा नहीं किया।
अरे! जिनको आप कामचोर बोल रही है ना, उन्होंने रात भर जग कर और एक टांग पे भाग भाग कर सारा काम करवाया था और जब भी आपको कुछ चाहिए होता है जिसकी आप कभी कदर नहीं करते हो फिर भी वो चीज आपके लिए मेरे मायके से आती है ताकि कोई शिकायत का मौका न मिले।
लेकिन आप अब तक नहीं सुधरी और अब आप अपने बेटे के कान भी भरने लग गए हो, ताकि वो मुझे छोड़ दे।
इसके आगे साक्षी कुछ बोले उसकी सास बोली देख रहा है शिवा बेटा कैसे बात करती है तेरी लुगाई मेरे से। तेरे सामने ऐसे है तो सोच तेरे जाने के बाद मुझे क्या क्या सुनना पड़ता होगा। शिव यह सारी बातें सुन रहा था पर उसने फिर भी किसी का साथ नहीं दिया, वो बस वहां पे मैं बैठा रहा।
साक्षी उसको देख के बोली “शिवा तुम तो कुछ बोलो, तुम्हे नहीं पता है क्या सच्चाई है? तुम तो जानते हो ना कि मैं कैसे हू और मां बाबा कैसे है, कुछ toh बोलो।
शिवा फिर भी कुछ नहीं बोला और उसकी चुप्पी में ही उसके सवालों का जवाब साक्षी को मिल गया था। इस पर वो यकीन नहीं कर पाई कि शिवा, उसके पति ने भी उसका साथ नहीं दिया जिसके साथ उसने सात जन्मों की कसमें खाई थी। उसी वक्त साक्षी ने ठान लिया कि ये जो सीमा खींची है
इसको कभी नहीं मिटने देगी और यह बोलकर गई कि जहां मेरे मां बाबा की इज्जत नहीं होगी और यह एक पति अपनी पत्नी से किए हुए वादे इसी जनम में न पूरे कर सके वहां से चले जान ही अच्छा होता है। यह बोलती ही वो वहा से चली गई और वो अपने साथ वो सीमा भी खींच ती चली गई।
आप लोग बताए क्या साक्षी ने यह सीमा खींच कर सही किया? क्या अपने मां बाबा के स्वाभिमान के लिए खड़ा हो कर उसने गलत किया?
लेखिका
तोषिका