राजेश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। माता-पिता ने बड़े लाड -प्यार से उसकी परवरिश की। पढ़ाया -लिखाया और वह एक कामयाब वकील बन गया। समय चलते माता-पिता ने उसकी शादी एक पढ़ी-लिखी संस्कारी लड़की से कर दी ।समय बिता गया और राजेश के माता-पिता इस दुनिया से अलविदा कहकर चले गए।
राजेश अपनी पत्नी मीना के साथ खुशी-खुशी जीवन जी रहा था। पूरे 10 वर्ष बाद उसके घर पर खुशियों ने दस्तक दी। उसके घर पर एक बेटे का जन्म हुआ। राजेश और उसकी पत्नी काफी खुश थे ।प्यार से राजेश और उसकी पत्नी ने अपने बेटे का नाम वंश रखा ।वंश का पालन पोषण बड़े ही सही ढंग से किया गया।
उसकी शिक्षा अच्छे माहौल में पूर्ण हुई। वंश अपने माता-पिता का संस्कारी बच्चा था। माता-पिता के कहे अनुसार वह सारा काम करता और माता-पिता का पूरा-पूरा ध्यान रखता। वंश के पिता वंश को सेना में भर्ती करवाना चाहते थे। भगवान ने उनकी सुन ली ।राजेश सेना में भर्ती हो गया।
पिता और माता उसकी इस उपलब्धि से काफी खुश थे। इस उपलब्धि से पूरा गांव उत्साहित था। राजेश साल में दो बार छुट्टी आता और अधिकतर समय अपने माता-पिता के पास व्यतीत करता। पिता दिन भर वकालत करके शाम को घर लौटते और बेटे और पत्नी के साथ बहुत अच्छा समय व्यतीत करते हैं।
अब वह समय आ गया जब राजेश और उसकी पत्नी ने अपने बेटे वंश की शादी के बारे में सोचना प्रारंभ कर दिया। बेटा संस्कारी था और वह चाहता था कि माता-पिता जिस लड़की का चुनाव उसके जीवनसाथी के रूप में करेंगे। वह उसे पूर्ण रूप से मंजूर होगा। राजेश और उसकी पत्नी ने एक सुयोग्य और पढ़ी-लिखी लड़की राजेश के लिए देख ली और राजेश को भी वह पसंद आ गई ।
घरवालों से बात करके राजेश की शादी शीघ्र ही कर दी गई। सारा परिवार इस मौके पर पूर्ण रूप से खुश था । वंश की पत्नी सरला राजेश के सेना में जाने के बाद माता-पिता का पूर्ण रूप से ध्यान रखती। बहू के इस प्रकार के व्यवहार से माता-पिता काफी खुश थे। एक दिन सरला के माता-पिता अपनी बेटी से मिलने आए और वह बहुत खुश हुए। परंतु उन्होंने अपनी बेटी से कहा कि वह हमारे दामाद वंश के साथ क्यों नहीं चली जाती ।
घर पर ही सास ससुर की सेवा करते-करते वह अपने खुशी के दिनों को समाप्त कर रही है। बस इतना कहने की देर थी कि सरला के दिमाग में यह बात घर कर गई। माता-पिता के घर से चले जाने के बाद सरला ने रात को वंश से फोन पर बात की और उससे कहा कि अब उसका दिल घर पर नहीं लगता। वह उसे भी साथ में ले जाए ।वंश ने कहा कि मेरे माता-पिता की सेवा कौन करेगा ?इस पर सरला ने कहा कि कुछ दिन के लिए वह आपके साथ रहेगी। बाद में वह वापस घर आ जाएगी।
वंश इस बात पर राजी हो गया और वह जल्दी ही छुट्टी लेकर घर पहुंचा। उसने माता-पिता से पूरी बात कही माता-पिता खुशी-खुशी सरला को भेजने के लिए तैयार हो गए और एक दिन वह भी आया। जब सरला अपने पति वंश के साथ चली गई ।अब माता-पिता दोनों घर पर अकेले थे। पिता राजेश कि अब सेहत ठीक नहीं रहती थी।
वह वकालत छोड़कर घर पर ही रहते थे ।पत्नी की सेहत भी कुछ ठीक नहीं थी। वह जैसे – तैसे करके उनको संभाल रही थी ।एक दिन राजेश की तबीयत बहुत खराब हो गई। तो उसने अपने बेटे वंश को फोन किया कि वह उनकी बहू सरला को घर पर छोड़ दे ताकि वह हमारी देखभाल कर सके।
इतना सुनते ही वंश ने अपनी पत्नी से कहा कि वह तैयार हो जाए। अगले दिन वह उसको घर छोड़ आएगा। सरला ने वंश को कुछ नहीं कहा ।परंतु मन ही मन में वह आग बबूला हो गई और सोचने लगी कि अब मुझे इन दोनों सास ससुर को अपने रास्ते से अलग करना ही होगा ।तभी मैं चैन से जी सकूंगी। वह घर पर पहुंची।
उसे उसका पति वश घर ले आया ।राजेश और उसकी पत्नी काफी खुश हो गए और वंश वापस चला गया। राजेश और उसकी पत्नी ने देखा कि अब सरला का व्यवहार काफी बदल गया है ।वह यदि सरला को 10 बार बुलाते हैं तो वह एक बार उनकी बात को सुनती है और बड़े गुस्से से व्यवहार करती है। वह हर बात को समझ रहे थे कि कहीं ना कहीं सरला अब उनकी सेवा नहीं करना चाहती है।
यह सब देखकर उन्होंने वंश को फोन किया कि वह अपनी पत्नी सरला को अपने साथ ही ले जाए क्योंकि वह यहां पर दुखी रहती है ।यह सब सुनकर वंश गुस्से में आ गया और उसने सरला को फोन करके खूब खरी-खोटी सुनाई ।यह सब सुनकर सरला के मन में माता-पिता के प्रति और क्रोध भर गया ।
अब उसने मन ही मन में निश्चय कर लिया कि वह अपने पति को उसके माता-पिता से बिल्कुल अलग करके छोड़ेगी। उसने बिना सोचे समझे धीरे-धीरे करके अपने पति वंश के मन में माता-पिता के प्रति विद्रोह की भावना भरनी प्रारंभ कर दी। वंश भी बिना सोचे समझे पत्नी का साथ देता रहा और एक समय ऐसा आया ।
जब पत्नी ने माता-पिता से इस घर में अलग रहने का निश्चय कर लिया। अब एक ही घर की दो रसोईया हो गई। एक रसोई में सरला के सास ससुर खाना बनाते और दूसरी रसोई में सरला खाना बनाती। ना सरला अपने सांस ससुर की तरफ जाती, ना सास ससुर सरला की तरफ आते।
इसी बीच वंश दो महीने की छुट्टी घर पहुंचा तो उसने यह सब जब देखा तो अपनी पत्नी से पूछा कि यह सब क्या है? उसकी पत्नी सरला ने बताया कि उसके माता-पिता हर समय उसे बेइज्जत करते रहते हैं ।सेवा करने पर भी गालियां देते रहते हैं। जिस कारण अब वह उनके कहे अनुसार अलग रहती है।
यह सुनकर वंश भी अपनी पत्नी की तरफ झुक गया और उसने भी माता-पिता से किनारा कर लिया। एक दिन वंश के पिता राजेश बहुत बीमार हो गए और वह अंतिम सांस ले रहे थे। तब वंश की मां वंश के पास आई और कहने लगी कि उसके पिता बहुत बीमार है ।वह उनसे मिलना चाहते हैं परंतु वंश की पत्नी सरला ने अपने पति को जाने से मना कर दिया ।
यह सुनकर राजेश की पत्नी रोती हुई वहां से चली गई और कुछ समय पश्चात राजेश की मृत्यु हो गई जैसे ही वंश को यह समाचार मिला ।वह दौड़ता हुआ कमरे में आया। वह पिता से लिपटकर रोने लगा परंतु अब समय निकल चुका था ।उसके पिता इस दुनिया में नहीं रहे थे ।
वह काफी दुखी था। उसने अपने माता से कहा कि अब वह हमारे साथ रहे और अपनी बहू से ना लड़े परंतु मां ने कहा कि वह कभी भी अपनी बहू से लड़ी नहीं। बहू ने स्वयं ही एक सीमा खींच दी थी। जिसका तुम्हारे पिता और मैंने पालन किया परंतु अब वह इस दुनिया में नहीं रहे और मैं भी बहू की खींची हुई उसी सीमा का मरते दम तक पालन करूंगी ।
यह सुनकर वंश चुप हो गया और चुपचाप अपनी पत्नी के कमरे की तरफ चला गया ।वहां जाकर उसने अपनी पत्नी को खूब डांटा और उसे याद दिलाया कि उसका असली फर्ज क्या है? और उसकी एक नादानी से आज उसका एक परिवार पूरी तरह बिखर गया है ।
यदि अब भी वह बचे हुए परिवार को बचाना चाहती है तो वह माता के साथ मिलकर रहे। तभी वह भी पूर्ण रूप से खुश रहेगा ।पत्नी को होश आ गया और वह अपने किए पर पछता रही थी ।तभी उसने अपने पति से कहा कि वह अपनी गलती मानती है और अब वह प्राश्चित करना चाहती है।
दोनों पति-पत्नी मन में ग्लानी और अफसोस लेकर अपनी माता के कमरे में प्रवेश करते हैं। माता बिस्तर पर सोई होती है। दोनों उसके पांव के पास बैठ जाते हैं और माफी मांगने लगते हैं परंतु काफी समय तक बुलाने पर भी वह नहीं बोलती है ।इसी पर राजेश मां को हिलाता है परंतु मां इस दुनिया से जा चुकी होती है।
वंश जोर-जोर से रोने लगता है और पत्नी उससे पूछता है कि क्या हुआ? वह बस एक ही जवाब देता है कि मां ने कहा था। बहू ने सीमा खींच दी है और वह भी उसका पालन करते ,इस संसार से विदा होगी ।अब वह संसार से विदा हो चुकी है। राजेश रोता रहता है। सरला बिल्कुल चुप और सन्न हो जाती है ।
धन्यवाद।
लेखक:(संजय सिंह)