मोहन और प्रमिला दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे।दोनो ने ही बैंक की परीक्षा दी और दोनों की नियुक्ति भी हो गई। समान बिरादरी तो विवाह में भी अड़चन नहीं आई।प्रमिला और मोहन दोनो ही शांत व्यक्तित्व के मालिक थे।किसी से तू तू मैं मैं नहीं।चार साल विवाह के बाद वो बनारस रहे और फिर ट्रांसफर और प्रमोशन के कारण मोहन की बदली भोपाल हो गई।
प्रमिला दो साल बिना मोहन के बेटे आदर्श और बेटी अनामिका के साथ बनारस ही रही ससुराल में।दो साल की दौड़ धूप के बाद प्रमिला भी भोपाल ट्रांसफर ले कर आ पाई और फिर 1 साल बाद जन्म हुआ पराग का इतना सुंदर बच्चा नीली आंखे सुनहरे बाल बिल्कुल अंग्रेज का बच्चा लगता था।
सभी की आंखों का तारा ।पारस मां बाप के अलावा भाई बहनों के स्नेह का भी पात्र था।धीरे धीरे समय बीता आदर्श इस समय फर्स्ट ईयर था और अनामिका 12 में थी और छोटा सा पारस 3 में था ।माता पिता जॉब पर जाते घर में बच्चों को संभालने के लिए कमला काकी थी ।
आदर्श का ग्रेजुएशन हो गया उसने सिविल परीक्षा का पेपर दिया और उसका सिलेक्शन हो गया और वो शहर का डिप्टी कमिश्नर लग गया बस अच्छी बात ये थी कि उसकी पोस्टिंग अपने शहर में ही हुई।अब आदर्श के लिए लड़कियां देखी जाने लगी उन्हीं में ही सभी को मेघा बहुत पसंद आई साधारण परिवार से थी पर सुंदर मोहक पढ़ी लिखी इसी लिए वो बहु बनकर आदर्श के घर आ गई।
आदर्श ने पहले ही कहा था मुझे फुल टाइम जॉब वाली लड़की नहीं चाहिए।नौकरी ना करे चलेगा घर संभाले या फिर ट्यूशन या स्कूल में नौकरी कर सकती है।घर सम्भल।लेने की जिम्मेदारी मेघा पर ही आई क्योंकि आदर्श, मोहन और प्रमिला तीनों काम पर जाते पीछे पूरा घर मेघा ही देखती मेघा ने अपने घर में ये सब सहूलियत देखी नहीं थी इसलिए उसका दिमाग खराब हो गया वो आदर्श के सामने और सास ससुर के सामने सामने तो अच्छी बनती पर पीछे से अपने घर सामान भेजती ।
पराग से तो बहुत चिढ़ती थी क्योंकि उसके मुंह से निकली बात पत्थर की लकीर थी जो वो कहता सब मानते।उन्हीं दिनों आदर्श को ट्रेनिंग के लिए दूसरे शहर जाना पड़ा और मोहन प्रमिला किसी रिश्तेदार की शादी में दूसरे शहर गए।मेघा ने पारस को ढंग से खाना नहीं दिया उसे थप्पड़ लगाए ।अनामिका से घर का सारा काम करवाती उन्हें बार बार बोलती तुम्हारे माता पिता ने तुम्हे सर चढ़ा रखा है अब ये घर मेरा है मेरी मर्जी चलेगी।
पारस को तो प्रमिला कभी छोड़ती ही नहीं यदि उसकी परीक्षा ना होती तो और उसके सामने तो मेघा ने भी कहा मां आप छोड़ जाओ मै देख लूंगी हमारा बेटा है और उनके जाते ही उसका व्यहवार बदल गया।उसके मायके वाले आए दावते हुई और बच्चों को ढंग का खाना भी नहीं दिया।
रोज फोन आता पर मेघा बच्चों की बात नहीं करवाती और तो और अनामिका का मोबाइल भी छुपा दिया ताकि वो कुछ बता ना दे।15 दिन बाद मोहन और प्रमिला लौट आए।घर का वातावरण कुछ अजीब था।पारस बुखार में तप रहा था ऐसा लग रहा था कितना कमज़ोर हो गया है।
प्रमिला तो उसको देख डर गई तुरंत अस्पताल ले गए डॉक्टर बोले इसका निमोनिया बिगड़ गया है और पेट में इन्फेक्शन भी है।चार दिन पारस एडमिट रहा पर वो बच ना सका ।प्रमिला रो रही थी क्यों मै मेरे लाल को छोड़ कर गई।उन्होंने मेघा से पूछा क्या हुआ था मेघा बोली ये अपने दोस्त के घर गया था वही से बारिश में भीग कर आया था मैंने तो डॉक्टर को भी दिखाया था सब ठीक था।अनामिका को मेघा ने डरा धमका दिया था कुछ भी बताने से।
अनामिका आज कल ऐसे घूमती थी जैसे पागल सब ने समझा पारस का गम है तब तक आदर्श भी लौट आया वो भी पारस के गम से टूट गया।इस बात को दो महीने हो गए थे अनामिका का साइकेट्रिक ट्रीटमेंट शुरू हुआ दो तीन सेशन में उसने मेघा की पोल खोल दी की वो ठंड में पारस से अपने भाई के जूते धुलवा रही थीं इसलिए पारस को निमोनिया हुआ।
और वो गुजर गया।आदर्श यह सब सुन गुस्से से फट पड़ा वो घर आया और मेघा मेघा चिलाने लगा मेघा बोली क्या हुआ ।आदर्श बोला तुमने हमारे पारस को मारा है मेघा बोली ये झूठ आपसे किसने कहा इस अनामिका ने वो अनामिका को मारने दौड़ी ।आदर्श ने बीच में आकर उसे एक थप्पड़ लगाया क्या कर रही हो तुम मै तुम्हे अभी पुलिस के हवाले करता हूं।
मेघा बोली मै अपनी जलन में ये भूल गई कि मैं क्या कर रही हूं हर जगह आप पारस को इंपॉर्टेंस देते थे जिससे मुझे गुस्सा आता था। कहीं जाना हो पारस जरूर जाएगा कुछ लेना हो पारस अनामिका के लिए पहले ये सब सुन कर मै पक गई थी और मेरे भाई बहनों को कुछ नहीं मिलता था
और इन्हें सब कुछ पता नहीं कब मेरे अंदर जलन का बीज उग गया पर मैं पारस को मरना नहीं चाहती थीं मुझे माफ करदो प्लीज़ ।आदर्श बोला अब इस घर में और मेरी जिंदगी में तुम्हारी कोई जगह नहीं तुम निकल जाओ तुम्हे तलाक के कागज मिल जाएंगे।मेघा प्रमिला और मोहन के पैरों में गिर पड़ी मुझे माफ करदो।
मोहन बोला बड़ी बहु होना सम्मान है अधिकार नहीं अधिकार नहीं तुम्हारी जगह कोई नहीं ले सकता था पर तुमने दूसरों के अधिकार को छिनने की कोशिश की तुम्हारी हसद हमारे बच्चों को खा गई एक दुनिया से चला गया दूसरा मानसिक रोगी हो गया तुम यहां से चली जाओ मेरा हंसता खेलता परिवार तबाह कर दिया देखो मेरी प्रमिला की क्या हालत हो गई है
वो कुछ बोलती ही नहीं है जाओ यहां से आदर्श ने उसे हाथ पकड़ घर से निकाल दिया और तलाक ले लिया आज 6 महीने बाद काउंसिल से अनामिका की हालत सुधरी है।प्रमिला एक बुत बन गई है आदर्श ने खुद को काम में झोंक दिया है और मोहन अपने परिवार को संभालने में लगा है।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी