*बड़े भाई हो, बाप मत बनो* – तोषिका

आप मेरे *बड़े भाई हो, बाप मत बनो*। इतनी टोका ताकि तो पापा भी नहीं करते थे मेरे काम में जितना आप कर देते हो। चीखते हुए विशाल बोला अपने बड़े भाई देव से। उधर मंदिर से वापिस आती सुधा को घर के बाहर से चीखने की आवाज आई तो सुधा ने जल्दी से घर का दरवाजा खोला और विशाल को शांत करते हुए उसको अपने कमरे में जाने को कहा।

विशाल को तो सुधा ने कमरे में भेज दिया था पर इतने सालों के बाद भी वो देव के चेहरे पर कोई हाव भाव नहीं देख पा रही थी। मां मैं चलता हू बोल कर वो अपने दफ्तर के लिए निकल गया।

सुधा भी अपने काम में लग गई ताकि विशाल का गुस्सा तोड़ा शांत हो जाए।

दोपहर हो गई थी, सुधा विशाल के कमरे में आई और बड़े नरम स्वर में पूछा “बेटा सुबह क्या हो गया था, तुम दोनों लड़ाई क्यों कर रहे थे, ऐसी क्या बात हो गई थी?”

विशाल बोला “कुछ इतनी बड़ी बात नहीं हुई थी मां, मैं बस पार्टी से आते वक्त तोड़ा १० मिनट लेट हो गया था और घर आते ही सो गया। सुबह जब मैं रसोई में गया तो भैया मेरे ऊपर चिल लाने लगे कि उन्होंने मुझे कॉल किया था पर मैने उठाया नहीं।” सुधा बोली “बेटा तो तुमने कॉल क्यों नहीं उठाया।

” विशाल तोड़ा तेज और चिढ़ चिढ़े स्वर में बोला “अरे मां मेरे फोन को बैटरी खत्म हो गई थी और जब मैं घर आया तो मैं इतना थक गया था कि मुझे फोन को चार्ज करना याद नहीं रहा।” हो जाता है ऐसा कभी कभी, इसमें इतना भड़कने वाली क्या बात थी जो भैया इतना भड़क गए?” 

सुधा के पास विशाल के इस सवाल का कोई जवाब नहीं था पर फिर भी वो बोली “कोई नहीं बेटा, मैं देव से बात करूंगी। तब तक तुम छत से कपड़े उतार लाओ।

दोपहर से शाम और शाम से रात हो गई, देव ने जब घर का दरवाजा खोला तो पूरा अंधेरा था, उसे लग सब सो गए है, पर जैसे ही वो अंदर आया और दरवाजा बंद किया, सुधा ने कमरे की बत्ती जलते हुए बोला “मैं खाना गरम करके लाती हू, मुंह हाथ धोकर आओ।” देव बोला “पर मां मुझे भूख नहीं है।

” सुधा एकदम से बोली “ये पर वर कुछ नहीं चलेगा, तू काम में इतना खोया रहता है कि तुझे अपनी सेहत का बिल्कुल ख्याल नहीं है, चल जल्दी आ, मुझे भी भूल लगी है।”

देव तोड़ी देर बाद आया और कुर्सी पर बैठ गया और अपनी मां को निहार रहा था। इतनी ही देर में उसकी मां खाना लेकर आई और उसको खाना परोसने लगी। 

देव बोला “तुम भी तो खाओ मां, चलो अपना मुंह खोलो” और ऐसे करके उसने अपनी मां को खिलाया और सुधा ने देव को। ऐसे ही उनकी बैठ कर बातें चल रही थी कि सुधा ने सुबह वाली बात का जिक्र करते बोला “बेटा देव, ऐसा क्या हुआ था कि विशाल ने फोन नहीं उठाया तो तू उसको डांट रहा था।” देव बोला ” मां ये उसका हर बार का है,

वो कभी भी मेरा एक बारी में फोन नहीं उठा था है, कितनी बार कॉल करना पड़ता है उसको।” सुधा बोली “बेटा अभी वो बच्चा है, नया नया कॉलेज में गया, अभी वो दोस्त बनाएगा और उसकी क्लास भी होती है, अगर वो फोन नहीं उठाता तो तू इतना गुस्सा क्यों हो जाता है, फिर जब तेरा गुस्सा शांत होता है तो तेरे चेहरे में कोई हाव भाव नहीं होते, जैसे तेरे तब थे जब तेरे पापा की मृत्यु हुई थी।”

देव कुछ बोले उस से पहले ही सुधा ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोला “बेटा जो भी तेरे मन में है, आज बोल दे, क्यों तू ऐसा हो गया है, क्यों तू विशाल पर चिल्ला देता है अगर वो फोन नहीं उठाता?”

ये सारे सवाल सुन कर देव की आँखें में अश्रु थे और उसने बोला “मां जब पापा गए थे, मैं तब कॉलेज में पढ़ता था और विशाल स्कूल में था और जिस दिन पापा इस दुनिया से गए थे, उस दिन ऐसा लगा जैसे पता नहीं क्या हो गया। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या होगा, कैसे होगा, मेरे नखरे कौन उठाएगा,

मुझे मेरे शौक पूरे करने के लिए अपनी जेब खाली करके मेरी जेब कौन भरेगा और उस ही दिन मेरी एकस्ट्रा क्लास थी कॉलेज में, उस वक्त मेरा फोन साइलेंट पे था और जब मैने देखा पापा की एक मिस कॉल थी और एक आपकी, जब आपको कॉल करा तो पता चला कि आप पापा को लेकर हॉस्पिटल आए हो और जब तक मैं वहां पहुंचा,

पापा मुझे छोड़कर बहुत दूर जा चुके थे। पता नहीं क्या कहना चाहते थे, शायद मुझे फिर से कोई अपनी हिम्मत की गोली देना चाहते थे या फिर जाने से पहले एक बार फिर से मेरी जेब खुशियों से भरना चाहते थे। आज भी जब मैं उस दिन का सोचता हू तो बस यही सोचता हू कि आखिर वो मुझे क्या कहना चाहते थे?

मैं उनको एक आखिरी बार सुन भी नहीं पाया और मुझे बिना बताए चले भी गए।” सुधा की आँखो में आंसू थे और उसने देव को अपने सीने से लगा लिया और बोली “तेरे पापा जहां भी होंगे, तुझे इतना काबिल देख कर बहुत खुश हो रहे होंगे और उनको पूरा गर्व महसूस हो रहा होगा।

” दूर खड़ा विशाल सब सुन रहा था और रो रहा था, क्योंकि उसको अब अपने भाई की डांट में एक डर और रक्षा दिख रही थी, तो वह दौड़ कर पीछे से देव के गले लग गया और बोला “भैया मुझे माफ करदो, मैं आपकी डांट के पीछे छुपा आपका प्यार नहीं देख पाया। आप ही आज से मेरे पापा भी हो और भाई भी”।

सुधा ने दोनों भाइयों के ऊपर हाथ रखा और आशीर्वाद दे कर उनको गले लगा लिया।

लेखिका

तोषिका

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