हास्य कहानी
मार्च का महीना शुरू होते ही घर का माहौल बदल जाता है।
कारण, बच्चों के इम्तिहान, पर असली परीक्षा तो मम्मी की ही शुरू हो जाती है। वैसे, मम्मी तो बच्चों के लिए हमेशा ही परेशान रहती है. इम्तिहान के दिनों मैं बच्चे भी मम्मी का पूरा पूरा फायदा उठाते है. कभी बोलते है, आज ठंडा दूध पीला दो, एसिडिटी हों रही है, कभी खाना खाने से नीद आती है, हल्का फुल्का मैग्गी बना दो. बच्चे भी जानते है की इन दिनों मम्मी से कुछ भी मांग लो, मना नहीं करेगी. रात क़ो पढ़ाई का मन न हों तो बोलेगे, मम्मी सुबह जल्दी उठा देना, पढ़ाई करनी है, अभी सो रहा हूँ. मम्मी 10 बार उठाएगी तब जाकर उठेंगे, अगर नहीं उठाया तो बोलेगे, मेरी पढ़ाई नहीं हुई. सारा कसूर मम्मी का हों जाता है. कभी कभी तो मम्मी सोचने लगती है कि इतनी टेंशन तो खुद कि परीक्षा के समय भी नहीं थीं जितनी बच्चों कि परीक्षा मैं होती है.
परीक्षा से पहली रात तक तैयारियां करवा के मम्मी सोचती है कि आज रात आराम से सोऊगी. सोने से पहले मम्मी ने पूछा, बेटा, बताओ, सारी तैयारी हों गई? बेटा बोला, हाँ मम्मी, शूज पोलिश कर लिए, सॉक्स, यूनिफार्म, एडमिट कार्ड, पेन, पेन्सिल, बुक्स सब बैग मैं रख लिया। और कोर्स, मम्मी ने पूछा. बेटा बोला, मम्मी, वो अभी बाकी है. ये सुनकर मम्मी क़ो फिर टेंशन हों गई.
भावों की अभिव्यक्ति
एम. पी. सिंह, कोटा
स्वरचित