औलाद बेटा-बेटी नहीं होती… औलाद बस औलाद होती है – विधि जैन
घर के आँगन में तुलसी के पास खड़ी इंदु की उंगलियाँ काँप रही थीं। सामने बरामदे में बैठी उसकी जेठानी नीलम चाय की चुस्की लेते हुए फिर वही बात दोहरा रही थी—वो बात जो सालों से इंदु के कानों में काँटे की तरह चुभती आई थी। “अरे इंदु, बेटियाँ हैं तुम्हारी… ज्यादा पढ़ा-लिखाकर क्या करेगी? … Read more