“इस गुनाह की माफी नहीं ” – उमा वर्मा
यह रचना मेरी प्रिय सखी मंजू को समर्पित है ।वह अब इस दुनिया में नहीं है ।कभी उसने कहा था कि मेरे लिए भी लिखिए न दीदी ।मेरी समवयसका थी वह लेकिन मुझे दीदी ही कहती ।दो दशक बीत गए उसे दुनिया से गये हुए ।आज बहुत याद आ रही है न जाने क्यों?हम दोनों … Read more