ये दूरियाँ – डॉ ऋतु अग्रवाल  : Moral Stories in Hindi

New Project 56

   पुष्पा आज अकेली कमरे में बैठी थी। कहने को चार संताने थीं उसकी पर आज कोई झूठे मुँह भी उससे यह नहीं पूछता था कि माँ तुम कैसी हो। बस उसकी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु कभी नौकर या कोई बहू पल भर को आते थे। खाना- नाश्ता, फल, दूध इत्यादि रखकर फ़ौरन ही चले … Read more

“गलती” – ऋतु अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

New Project 94

Moral Stories in Hindi : अरुणिमा एक उच्च वर्गीय संपन्न परिवार की लड़की थी।ताऊ-चाचाओं का बहुत बड़ा संयुक्त परिवार, हाई क्लास बिजनेस और नौकर चाकरों का रेला तो परिवार में बहू बेटियों को ज्यादा काम करने की आदत नहीं थी। अरुणिमा देखने में औसत ही थी और पढ़ाई में भी औसत। पर परिवार वाले चाहते … Read more

घरौंदा – ऋतु अग्रवाल : Moral stories in hindi

New Project 35

Moral stories in hindi : “रमित!आज फिर तुम्हें देर हो गई। देखो! जरा साढ़े ग्यारह बज रहे हैं।” अनुभा ने दरवाजा खोलते हुए कहा         “हम्म।” कहकर रमित बेडरूम की ओर जाने लगा।         “आप चेंज कर लो, मैं खाना लगा रही हूँ।” रसोई घर की लाइट्स ऑन करते हुए अनुभा बोली।       “नहीं, रहने दो! खाना खा … Read more

“एक ससुराल ऐसा भी” – ऋतु अग्रवाल : Moral stories in hindi

New Project 57

Moral stories in hindi :   “बहू आ गई! बहू आ गई!” के शोर से सारा दालान गूँज उठा। घर में जितने भी रिश्तेदार थे,सभी ड्योढी पर आ खड़े हुए। मानसी आदित्य के साथ दरवाजे के दूसरी तरफ खड़ी थी। नया घर, नया माहौल, नए लोग, सोच सोच कर ही मानसी की हालत ख़राब हुई जा … Read more

बहू मेरा अक्स – ऋतु अग्रवाल

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“सुनो! आज मैं बच्चों के पास ही सोऊँगी। राध्या को बहुत तेज बुखार है। सारा बदन तप रहा है उसका। रात को कुछ परेशानी हुई तो किससे कहेगी वह? रोमिल तो अभी बहुत छोटा है।” सुगंधा ने अश्विन की चिरौरी करते हुए कहा।           “मुझे कुछ नहीं पता। दवाई दे दी है न उसे। रात में … Read more

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