जा सकती हो मेरे घर से – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

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रवि और सुनयना में आज कहासुनी हो गई थी और छोटी सी बात बतंगड़ बन गई थी। कहते हैं कि जब इंसान गुस्से में होता है तो दिमाग और जुबान दोनों पर काबू नहीं रख पाता है और उसने सुनयना को कहा कि,” जा सकती हो अपने घर” । “अपने घर…ओह! तो ये घर तुम्हारा … Read more

ये धन -सम्पत्ति ना अच्छे-अच्छों का दिमाग खराब कर देती है – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

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शानो-शौकत से भरी जिंदगी थी ठकुराइन की।कलफ लगी साड़ी पहनकर पान का बीड़ा मुंह में दबाए जहां से निकलती सब सम्मान में सिर झुका कर प्रणाम करते और वो भी दो मीठे बोल बोलकर सभी का हालचाल पूछा करती थीं। ठाकुर साहब नहीं रहे तो भी उन्होंने गांव छोड़कर बच्चों के साथ विदेश जाने से … Read more

चिरैया – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

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सुजाता जी अकेली रह गई थीं घर में। संतान का सुख मिला नहीं था और महेश जी भी इस उम्र में हांथ छुड़ा कर चले गए थे। इंसान जन्म लेते ही अपनी आयु सीमा तय कर के ही पृथ्वी पर आता है। किसी ना किसी को तो जाना ही पड़ता है। जीवन और मृत्यु का … Read more

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