असली मुजरिम – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

श्रुति! तुमने बहुत दिनों से लौकी के कोफ़्ते नहीं बनाए , इस संडे बना लो …मैं लौकी घिसने में मदद कर दूँगा ।  श्रुति ने पति वैभव की बात का कोई जवाब नहीं दिया और वह सोने के कमरे में चली गई । उसने अलमारी से कंबल निकाला । वैसे रसोई का काम करते समय … Read more

मूल्यांकन – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

दीदी! बड़े भाई का फ़ोन आया था… बाबूजी के श्राद्ध के दिन मुझे पहुँचने को कह रहे थे । आप तो जानती है कि अब मुझसे तो वहाँ रात में रुका नहीं जाता , बड़ी मुश्किल होती है और हवन सुबह आठ बजे का रखवाया है…. साढ़े सात बजे तक तो हम उठते ही है, … Read more

रिश्ते का मान – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

आज प्रताप सिंह जी अकेले पार्क में पड़ी बेंच पर अकेले बैठे थे । अचानक एक ही दिन में बूढ़े नज़र आने लगे थे । आँखों पर लगाया चश्मा उतारा , साथ में लाई बोतल से दो घूँट पानी पिया और एक लंबी गहरी साँस के साथ पीछे सिर टिकाकर आँखें मूँद लीं ।  —- … Read more

आशंका – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

मॉम , पापा अपनी मर्ज़ी हमारे ऊपर क्यों थोपते है? मैं कोई टीनएजर तो नहीं रहा अब ?  नहीं सरल , ऐसा नहीं कहते …. माता-पिता कभी अपने बच्चों का बुरा नहीं सोचते बेटा !  मैं ये नहीं कह रहा कि वो बुरा सोचते हैं पर बड़े होने के बाद बच्चों के साथ कैसा व्यवहार … Read more

मीठी तकरार – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

महिमा , कल कौन मेहमान आए थे तुम्हारे यहाँ ? मैं तो बुनाई का डिज़ाइन सीखने आई थी पर दरवाज़े पर बड़ी सी गाड़ी देखकर रुक गई , कान से लगाए तो अंदर से बहुत लोगों की आवाज़ आई… बस वहीं से उल्टे पाँव चली गई । हाँ… वे अंजलि के पीहर वाले आए थे … Read more

पहला जन्मदिन – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

माँ, मैं इतवार को सुबह आ रही हूँ… वो पिछली बार कांता मौसी हरिद्वार से कुछ लाने के लिए कह रही थी …पूछकर बता देना , ले आऊँगी । मंगला ! सब ठीक है ना … यूँ अचानक?  सब ठीक है । क्या मैं आप सब से मिलने नहीं आ सकती ? धत्त ! तेरा … Read more

एक्सपायरी – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

माँ, आपके बिना घर बड़ा सूना हो गया था । पापा भी एकदम अकेले से हो गए थे । आगे से जाओ तो दोनों साथ  जाना । अच्छा… अभी तो कह रही थी कि घर सूना हो गया,अब कह रही है कि पापा को भी साथ ले जाना । अरे…. माँ! मेरे शब्दों पर मत … Read more

बड़ा दिल – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

नीलम ! कल जब तू यहाँ से उठ के चली गई थी तो तुम्हारी मम्मी का फ़ोन था ना ? सब ठीक- ठाक तो है? हाँ माँ…. सब ठीक है, मैंने सोचा कि शायद मम्मी मकर- संक्रांति की कोथली के बारे में बात करेंगी …इसलिए उठकर बाहर चली गई पर वे तो वैसे ही फ़ोन … Read more

ईश्वर अपने बंदों के साथ कभी बेइंसाफ़ी नहीं होने देता – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

मेरी आँखों के सामने से दूर हो जा सुरभि! ससुराल से शिकायत और ऐसी कि मेरी परवरिश पर ही उँगली उठ गई , क्या यही संस्कार दिए थे मैंने कि कल को कोई ये कहें कि आपकी बेटी में तो इंसानियत ही नहीं है , पर तेरा भी क्या क़सूर है… हमारे दिए संस्कारों में … Read more

अपमान बना वरदान – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

ये कैसी बात कर रही हो सुजाता! नंदिनी की शादी तुम्हारे भाई के साथ, वैसे क्या जोड़ है …. हाँ…मेरे हिसाब से तो ठीक है दोनों का जोड़ … फिर समीर को नंदिनी बहुत पसंद आई थी । तुम्हारी सगाई के दिन उसे देखकर मेरा भाई लट्टू हो गया था उस पर …. छह महीने … Read more

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