मायका पराया ससुराल अपना – करुणा मलिक

कार की खिड़की से पीछे छूटते पेड़ों को देखते हुए अवनि की आँखों से बहने वाले आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। ड्राइवर सीट पर बैठे उसके पति, निशित ने एक बार भी उसे चुप कराने की कोशिश नहीं की। वह जानता था कि यह वो सैलाब है जिसे बह जाने देना ही … Read more

रिश्तों का रंग – करुणा मलिक

“पापा, कितनी बार कहा है आपसे कि जब मेरे घर में पार्टी चल रही हो, तो अपने इस गमछे और खादी के कुर्ते में बाहर मत आया कीजिए! मेरे क्लाइंट्स बैठे थे वहाँ। मिस्टर खुराना, जो खुद लंदन रिटर्न हैं, उनके सामने आप हाथ में वो स्टील का टिफिन लेकर आ गए? ‘बेटा लड्डू खा … Read more

बनावटी रिश्ता – करुणा मलिक

नहीं भाई साहब, मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूँ । अंशी हमारे भाई की निशानी है……… तुम्हें तो बिल्कुल भी अक्ल नहीं है राकेश । पहली बात तो ये है कि दिनेश ने शादी मनमर्ज़ी से की थी , ना लड़की की जात का पता था ना उसके माता-पिता का ठौर ठिकाना। हमें क्या … Read more

बुढ़ापे का सहारा न बेटा न बेटी बल्कि बहू होती है । – करुणा मलिक 

आरती! बेटा मैं बाज़ार जा रहा हूँ , तुम सुबह पूछ रही थी ……… कुछ मँगवाना है क्या? हाँ पापा जी ! मम्मी जी की पीने वाली दवाई खत्म हो गई है। अभी डॉ० का पर्चा लाती हूँ । पापा जी! रात में खिचड़ी बना लूँ क्या? कल मिनी का पेपर है थोड़ा पढ़ा दूँगी … Read more

धरती के जीव – करुणा मलिक

पवन ! ये मोहल्ले के सारे कुत्ते हमारे घर के बाहर  क्यों  बैठे हैं? दो दिन से देख रहा हूं कि कुत्तों की फौज घर के सामने खड़ी रहती है। वो दरअसल साहब जी ,माँ जी ने यहाँ इनके लिए रोटियाँ डाली हुई हैं………… घर के बाहर बैठे गार्ड की बात सुनकर शहर के एस० … Read more

मन का रिश्ता – करुणा मलिक 

केतकी ! ऊपर वाले स्टोर की सफ़ाई करवा देना  किसी को कहकर कल । कल…. मैं आज  खुद ही सफ़ाई कर दूँगी । कल  सुबह तो अरुण आएगा  भाभी ।  अच्छा….. हाँ…. दिमाग़ से ही निकल गया था ।  सचमुच  बहुत मुश्किल रास्ता तय किया है तूने ।  हाँ भाभी, रास्ता तो कठिन था पर … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – करुणा मलिक

अरे मम्मी, एक तो इतनी गर्मी ऊपर से इतनी लंबी साड़ी ….. कुछ हल्के कपड़े पहना करो ना …. देखो तो पेट के चारों ओर कैसे रेड रैशेज हो रखे हैं आपको । हाँ…. क्या करुँ? शादी के बाद कभी ओर कुछ पहनने की सख़्त मनाही थी और अब तो पहना ही नहीं जाएगा शायद … Read more

लाड़ वाली भाषा – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

क्या जाहिल औरत हो ? कौन दूध में इस तरह उँगली डालकर चेक करता है कि गर्म है या ठंडा ? हज़ार बार कहा है कि मेरे बच्चों के मामले में ये गँवारपन मत दिखाया करो ।  नहीं जी …. मेरे हाथ एकदम साफ़ है । अभी रोटी बनाकर हाथ धोने के बाद ही चौके … Read more

क़द्र – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

आनंदी , पिछले दो महीने से फ़ोन कर- करके थक गई, कहाँ रहती हो? एक बहुत ज़रूरी काम है तुमसे ……. ना तो फ़ोन उठाती और ना ही तुमने खुद फ़ोन किया …. सब ठीक तो है ना ?  कहाँ ठीक है, मेरी देवरानी गुज़र गई । अब दोनों बच्चे उसके ….सास- ससुर सबका मुझे … Read more

ज़रूरत – करुणा मलिक

आदेश जी ने एक आर्मी ऑफ़िसर के पद से रिटायर होने के पहले अपनी पत्नी चित्रा के साथ अपने पैतृक गाँव में ही तीन बेडरूम का छोटा सा घर बनवा लिया था । आज रिटायरमेंट के बाद अपने उसी घर का गृहप्रवेश और रिटायरमेंट पार्टी साथ-साथ ही यह सोचकर रखी थी कि दो- दो बार … Read more

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