आम का स्वाद – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

New Project 94

“अजय, आज घर पर ही रहना। अपने दोस्तों के साथ खेलने मत जाना। दादी अकेली हैं, उनका ध्यान रखना।” कहकर अजय के पापा अविनाश बाहर चले गए। अजय को पता था कि आज मम्मी अस्पताल गई हैं। पापा कह रहे हैं—जल्दी ही अच्छी खबर सुनने को मिलेगी। वह खबर क्या होगी, इसे अजय समझता है। … Read more

टूटा पंख – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

New Project 95

एक था किसान। तेज धूप में भी खेत में मेहनत कर रहा था। खेत के किनारे एक पेड़ था हरा-भरा, छायादार। पेड़ की ओर देखता तो मन करता कुछ देर आराम कर ले। पर फिर सोचता, “बस थोड़ा काम और निपटा लूँ, तब आराम करूँ।” तभी दो घुड़सवार वहाँ आकर रुके। घोड़े थकान और गर्मी … Read more

दही की करामात – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

New Project 96

राजा विजयसिंह भोजन कर रहे थे। ऐसा बहुत कम होता था कि राजा को एकांत में भोजन का अवसर मिले। वह हमेशा ही व्यस्त रहते थे। हर समय राज्य के बड़े अधिकारी कोई न कोई काम लेकर उनके पास आते ही रहते थे। आज रानी जयवंती ने अपने हाथों से विजयसिंह का मनपसंद पकवान बनाया … Read more

जंगल में रोटी – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

New Project 97

हरदीप सेठ बेटे प्रताप के साथ किसी काम से अपने पुश्तैनी गाँव जा रहे थे। दोनों घोड़ों पर सवार थे। हरदीप काफी पहले शहर में आकर व्यापार करने लगे थे। वहीं बड़ा मकान बनवा लिया था। पर बीच में जब भी समय मिलता गाँव जा पहुँचते। पुराने लोगों से मिलने और अपनी पुश्तैनी हवेली में … Read more

पार्टी हो जाए – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

New Project 98

पुष्पा के घर किटी पार्टी चल रही थी। पुष्पा की सारी सखियाँ अपने परिवार के साथ आई थीं। डिनर हो चुका था, पर पार्टी ख़त्म होने पर नहीं आ रही थी। अब बच्चे बोर हो रहे थे। उन्होंने आपस में खुसफुस की, फिर सबको सुना कर कहा, “हम आइस क्रीम खाने जा रहे हैं।” फिर … Read more

घंटी की आवाज – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

New Project 99

अनुज और दयाल स्कूल से घर आ रहे थे। घर तक शार्ट कट के लिए मैदान पार करते समय एकाएक दयाल लड़खड़ा गया। अगर अनुज ने हाथ न पकड़ा होता तो दयाल मुँह के बल गिर जाता। संभलकर वे जमीन की तरफ देखने लगे– जमीन पर एक डोरी पड़ी है। उसके दो छोरों पर छोटी-छोटी … Read more

वीरजी नाराज़ है – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

New Project 100

एक था हाथी। जंगल में लकड़ियाँ ढोने का काम करता था। उसकी देखभाल करता था भीमा महावत। भीमा हाथी को प्यार से वीरजी कहता, वैसे वीरजी शांत स्वभाव का था, पर कभी-कभी किसी बात पर क्रोध आ जाता तो जोर से चिंघाड़ उठता। वीरजी की चिंघाड़ सुनकर जंगल में हलचल मच जाती। परिंदे डरकर पंख … Read more

आओ पार चलें – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

New Project 2024 04 29T104436.080

तेज बरसात हो रही थी। भीखू मल्लाह अपनी नौका पर छाजन के नीचे सिमटकर बैठा था। छाजन चारों ओर से खुला था। बूँदों की बौछार भीखू को भिगो रही थी। लेकिन वह क्या करता और कोई उपाय भी तो नहीं था। भीखू का घर नदी के पार था। सोच रहा था, “आज का दिन तो … Read more

गुरु दक्षिणा – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

New Project 2024 04 29T104516.742

ज्ञानदास विद्वान था, लेकिन स्वभाव का गुस्सैल। किसी से नहीं पटती थी। अपने स्वभाव के कारण कई जगह से नौकरी छोड़ चुका था। अपने पर बहुत काबू करने का प्रयास करता, लेकिन फिर भी क्रोध हावी हो ही जाता। घर में पत्नी से लड़ता रहता। नियमित नौकरी न होने से घर में तंगी रहती थी। … Read more

पानी नहीं चाहिए – देवेंद्र कुमार Moral Stories in Hindi

New Project 2024 04 29T104818.633

गाँव में मीठे पानी के अनेक कुएँ हैं पर गाँव से कुछ दूर एक पुराना कुआँ है सूखा हुआ। लोग सदा से कुएँ को वैसा ही देखते आ रहे हैं। कुएं के पास ही एक घना पेड़ है। उस रास्ते से गुजरने वाले पथिक पेड़ की घनी छांह की सराहना करते हुए यह कहना नहीं … Read more

error: Content is Copyright protected !!