अब मुझसे नहीं होती तुम्हारे बाबूजी की सेवा – अर्चना खंडेलवाल 

“समीर, मेरी बात ध्यान से सुनो। अब मुझसे नहीं होती तुम्हारे बाबूजी की सेवा। बस, बहुत हो गया।” आवाज़ में न तो गुस्सा था, न ही कोई ऊँचा स्वर। एक अजीब सी ठंडी, सपाट और निर्णय लेने वाली दृढ़ता थी। समीर पलटा। सामने उसकी पत्नी, वंदना खड़ी थी। उसके चेहरे पर थकान की लकीरें थीं, … Read more

माता-पिता को सिर्फ रोटी और छत नहीं, प्यार और सम्मान चाहिए… – अर्चना खंडेलवाल

रमा और गोविंद जी भीतर ही भीतर घुट रहे थे, लेकिन उनकी घुटन से नेहा बिल्कुल बेखबर थी। उसे बस यही भरोसा था कि अब सास-ससुर उसके खिलाफ कोई फैसला नहीं ले सकते, क्योंकि बैंक खाते और प्रॉपर्टी के कागज़ उसी की पकड़ में थे। उसके लिए पैसा ताकत था—और ताकत के आगे रिश्ते अक्सर … Read more

शादी या समझौता – अर्चना खंडेलवाल

“तू पढ़-लिख गई, नौकरी कर रही है, अपने पैरों पर खड़ी है—बहुत अच्छा,” माँ ने चाय का कप टेबल पर रखते हुए कहा, “पर जीवन सिर्फ अपने दम पर चल लेने का नाम नहीं है। हर स्त्री को कभी न कभी किसी का साथ चाहिए होता है। और तुझे शादी करनी होगी।” अदिति ने लैपटॉप … Read more

तलाक़शुदा – अर्चना खंडेलवाल

“दीदी, मैं तुम्हें रोक नहीं रहा… बस सच बता रहा हूँ,” राघव ने शांत आवाज़ में कहा, “तुम नौकरी करती हो, अपने पैरों पर खड़ी हो—ये बहुत अच्छी बात है। लेकिन जीवन सिर्फ अपने पैरों पर खड़े होने से नहीं चलता। जीवनसाथी और परिवार भी चाहिए। कल को मेरी शादी हो जाएगी, मैं अपने घर … Read more

मॉं को बच्चों का साथ चाहिए। – अर्चना खण्डेलवाल

मां, मैंने आपके लिए वो सुन्दर सा शॉल भिजवाया था, आप जब नीचे घूमने जाओं तो यही पहनकर जाना, वसु अपनी मां हेमलता जी से कहने लगी, और हां मां मैंने जो आपके लिए स्वेटर भिजवाया है उसे भी पहन लेना, छोटी बेटी कनु भी बोली। इतने में सबसे बड़ा बेटा यश बोला कि मैंने … Read more

मॉं मुझे सोने के कंगन चाहिए…- अर्चना खण्डेलवाल

ये इतनी रात को अलमारी में क्या ढूंढ रही हो? रंजीत ने अधखुली आंखों को मसलते हुए कहा। चेतना के माथे पर पहले से ही पसीने की बूंदें थी,उस पर रंजीत की आंख खुल गई तो वो हड़बड़ा गई, कुछ नहीं आप सो जाइये, मैं बिजली बंद कर देती हूं, और वो मोबाइल की रोशनी … Read more

मॉं को बच्चों का साथ चाहिए -अर्चना खण्डेलवाल

मां, मैंने आपके लिए वो सुन्दर सा शॉल भिजवाया था, आप जब नीचे घूमने जाओं तो यही पहनकर जाना, वसु अपनी मां हेमलता जी से कहने लगी, और हां मां मैंने जो आपके लिए स्वेटर भिजवाया है उसे भी पहन लेना, छोटी बेटी कनु भी बोली। इतने में सबसे बड़ा बेटा यश बोला कि मैंने … Read more

शायद मुझे भाभी की बद्दुआ लग गई। – अर्चना खण्डेलवाल

अरे!! भाभी आपका तो चेहरा लटक गया है, क्या हुआ जो मायके नहीं जाओगे? देखो मेरी फाइनल की परीक्षाएं है और मम्मी के घुटनों में दर्द रहता है और जब भाभी घर पर हो तो ननद को आराम मिलना ही चाहिए, आप कहीं नहीं जायेगी, आप चली जायेंगी तो घर का काम कौन करेगा? अपना … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – अर्चना खण्डेलवाल

पायल भाभी, राखी आ रही है, आप अपने मायके भाई को राखी बांधने नहीं जा रही हो क्या ? पड़ोस में रह रही रीना ने एकदम से पूछा तो पायल झेंप गई। नहीं, मैं नहीं जा रही हूं!! मेरा कोई भाई नहीं है, होता तो मैं जरूर जाती.. और ये कहकर पायल अंदर चली गई। … Read more

“मैं सिर्फ आपकी पत्नी नहीं, किसी की बेटी भी हूँ – अर्चना खण्डेलवाल 

“मैं सिर्फ आपकी पत्नी नहीं, किसी की बेटी भी हूँ। मेरा फ़र्ज़ सिर्फ आपके परिवार वालों की तरफ ही नहीं है। मेरा भी परिवार है, जहाँ मैंने अपने जीवन के 25 साल गुज़ारे हैं। आज मेरे मम्मी-पापा को मेरी ज़रूरत है और आप कह रहे हो कि मायके मत जाओ। साल भर में कुछ दिन … Read more

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