अब मुझसे नहीं होती तुम्हारे बाबूजी की सेवा – अर्चना खंडेलवाल
“समीर, मेरी बात ध्यान से सुनो। अब मुझसे नहीं होती तुम्हारे बाबूजी की सेवा। बस, बहुत हो गया।” आवाज़ में न तो गुस्सा था, न ही कोई ऊँचा स्वर। एक अजीब सी ठंडी, सपाट और निर्णय लेने वाली दृढ़ता थी। समीर पलटा। सामने उसकी पत्नी, वंदना खड़ी थी। उसके चेहरे पर थकान की लकीरें थीं, … Read more