कुछ तो लोग कहेंगे – नीरज श्रीवास्तव

   कुछ तो लोग कहेंगे की हरिया पागल हो गया तो शायद कुछ कहेंगे कि हरिया भाग्यशाली था जो वह ऐसी घटना का साक्षी बना।          हरिया लखनपुर गाँव में रहता था। हरिया के परिवार में उसके अलावा और कोई न था क्योंकि हरिया के माँ-बाप तो बहुत पहले ही हैजा रूपी महामारी के शिकार हो … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – निमिषा गोस्वामी

एक ऐसे परिवार की कहानी जहां पर औरतों को अकेले घर से बाहर निकलने की इजाज़त नहीं थी। चाहे वह बेटी हो या बहु। अमरनाथ का परिवार एक ऐसा ही परिवार है। संयुक्त परिवार होने के कारण घर के सबसे बड़े यानि कि अमरनाथ के पिता सिरोमणी जी का ही आदेश सर्वोपरि होता है। अमरनाथ … Read more

कर्मों का चक्र तो चलता ही रहता है – सोनिया अग्रवाल

आज सुरभि को मायके लौटे हुए पूरे 25 दिन बीत गए थे , मगर अजय को न उसकी परवाह कल थी और न ही आज। कहते है न परवाह भी इंसान उसी की करता है जिसकी उसे जरूरत होती है , उस से प्यार होता है। मगर जब अजय की जिंदगी में पहले से ही … Read more

लोग क्या कहेंगे छोड़ो,बच्चों की खुशी का सोचो – कमलेश आहूजा

“माँ,बंद करो अपना ये नाटक और जल्दी से तैयार हो जाओ।मैंने नेहा के घरवालों को आज होटल में मिलने के लिए कहा है।”रोहित सुषमा पर गुस्सा होते हुए बोला। नेहा रोहित के ही ऑफिस में काम करती थी।रोहित की ही तरह उसने भी बी ई व एम बी ए किया था।देखने में सुंदर थी।परिवार भी … Read more

जीवनसाथी – सविता गोयल

आज फिर मनोहर जी पार्क का चक्कर लगाकर वापस आ गए, लेकिन सुधाकर आज भी घूमने नहीं आया था। मन में बहुत से विचार उठने लगे, “पता नहीं तबीयत ठीक है या नहीं??” घर आकर भी उन्हें बेचैनी हो रही थी। उनकी पत्नी सरोज जी चाय लेकर आई तो उन्हें चिंता में देखकर पूछ बैठी … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – डाॅ संजु झा

अस्सी वर्ष तक डॉक्टर उमा मरीजों की सेवा तन-मन से करती रही।सत्तर साल तक तो वह तन-मन से स्वस्थ  थी, परन्तु उसके बाद से ही उम्र ने उसपर  हावी होना शुरू कर दिया। लोगों ने भी कहना शुरू कर दिया कि इस उम्र में अब डॉक्टर उमा किसके लिए काम कर रही है? परन्तु उसने … Read more

बदलाव – उमा महाजन

‘यह क्या छुटकी बहू ! तुम नए जमाने की होते हुए भी मेरी ज्यादा लाड़ली हो, तो इसका अर्थ यह नहीं कि हमारे पुराने सनातन रीति-रिवाजों में भी दखलंदाजी करने लगोगी । क्या तुमने कभी किसी के विवाह के निमंत्रण कार्ड पर नाना-नानी लिखा नाम देखा-सुना है ? अरे, हमारे जमाने में तो नाना-नानी अपने … Read more

कर्मों का चक्र चलता रहता हैं। – विनीता सिंह

दिल्लीः के प्रगति  के पास आर -के हमसे गाड़ियों को बहुत बड़ा शोरूम था इस शोरूम के मालिक राम कपूर की थे बहुत ईमानदार और बहुत मेहनती और अपने साथ काम करने वालों की बहुत ज्यादा इज्जत करते थे और सब लोग उनकी बहुत सम्मान करते हैं पहले वह भी अपने गांव से आए और … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – दीपा माथुर

उमेश ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा— “नीना, यार सॉरी… अब ये गलती नहीं होगी। चलो, खाना खा लेते हैं। सच में, पेट में तो चूहे कूद रहे हैं।” उनके स्वर में चुहल और मुस्कान दोनों थे। नीना ने आँखें तरेरीं। माथे की उभरी रेखाओं और कड़ी नज़र से गुस्से का आभास साफ़ झलक रहा था। … Read more

सबक सिखा कर रहूंगी – ऋचा उनियाल

“रमा तू आज फिर लेट हो गई? तेरा ये अब रोज़ का नाटक हो गया है, पहले तो ऐसा नहीं करती थी!! ऊपर से तेरी आए दिन की छुट्टी से मैं तंग आ गई हूं। देख साफ साफ कह रही हूं रमा, अगर ऐसा ही चलता रहा ,तो मुझे नहीं करवाना तुझसे कोई काम वाम … Read more

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