आंतरिक खुशी ही सच्ची सफलता है – सुधा जैन

अपराजिता एक कस्बे में रहने वाली प्यारी सी लड़की है। भविष्य को लेकर उसके मन में बहुत सारे सपने हैं, चाहती है अच्छी पढ़ लिख कर जॉब करूं। अच्छा सा घर सजाऊं। प्यारे से जीवन साथी के साथ अपने सपनों को पूरा करू। इंजीनियरिंग करने के बाद मुंबई की आईटी कंपनी में उसका चयन हो … Read more

जब कमाते दोनों है, तो जिम्मेदारी भी दोनों की होनी चाहिए!! – मनीषा भरतीया

राजीव कहां थे तुम तुम्हें होश नहीं था कि बच्चों को स्कूल से लाना है?? बच्चे विचारे 2 घंटे से स्कूल में इंतजार कर रहे थे वो तो भला हो उस  वॉचमैन का जिसे मैंने अपने और तुम्हारे फोन का नंबर दिया हुआ है. उसने बहुत बार तुम्हारा मोबाइल ट्राई किया लेकिन तुम्हारा फोन बंद … Read more

नहीं आऊँगी – सतीश मापतपुरी

मैं जब कभी बरामदे में बैठता हूँ , अनायास मेरी निगाहें उस दरवाजे पर जा टिकती है, जिससे कभी शालू निकलती थी और यह कहते हुए मेरे गले लग जाती थी – ” अंकल, आप बहुत अच्छे हैं. कई साल गुजर गए उस मनहूस घटना को बीते हुए. वक़्त ने उस घटना को अतीत का … Read more

मैंने इसमें प्यार मिलाया है – बीना शर्मा

आज संध्या की तबीयत बेहद खराब थी सुबह से ही उसे खांसी जुखाम और बुखार हो रहा था जिसकी वजह से उसका बिस्तर से उठने को बिल्कुल भी मन नहीं था इसलिए वह मुंह ढक के रजाई ओढ़ के लेट गई थी आंख बंद करके लेटने के बाद भी उसे नींद नहीं आ रही थी … Read more

अब कभी किसी से सासू मां की बुराई ना सुनूंगी – मधु वशिष्ठ

भावना जी जितनी सर्वगुण संपन्न थीं, लगभग उसी अनुपात में उनकी बहू भी थी। हालांकि कॉलोनी में सभी का ख्याल था कि भावना जी के तेज़-तर्रार स्वभाव के रहते किसी भी बहू का टिकना नामुमकिन ही है। सोने पर सुहागा यह कि वह सर्वगुण संपन्न भी थीं। सिलाई, कढ़ाई, बुनाई या घर का काम हो, … Read more

बहु की पसंद – सविता गोयल

” मम्मी जी, आज इतनी सारी गाजरें क्यों मंगवाई हैं?,, “अरे बहु, निशा और नितिन दोनों को ही गाजर का हलवा बहुत पसंद है। सर्दियां शुरू होती नहीं की इनकी फरमाइश शुरू हो जाती है।,,  गाजर का हलवा तो माधवी को भी बहुत पसंद था लेकिन वो संकोचवश अपनी सासु मां पार्वती जी से बोल … Read more

अपहरण का बदला – रवीन्द्र कान्त त्यागी

रात के दो बज रहे हैं। आंखों में नींद का नामोनिशान नहीं है। मेरी पत्नी अनुष्का अपने तीन साल के वैवाहिक जीवन को ठोकर मार कर चली गई है। बरसों से मेरे हृदय में उसके लिए बसे अगाध प्रेम, समर्पण और विश्वास को एक तीन पंक्ति के कागज के पुर्जे से तार तार करके, मेरी … Read more

क्या आप खुश हैं? – रश्मि प्रकाश

‘‘सुनो जी, जब तुम्हारे रिटायरमेंट का वक्त आएगा ना उसके पहले ही हम अपना घर बनाएँगे और हाँ हम अपना घर अपने हिसाब से बनायेंगे…जिसकी दीवारों पर सजी एक -एक ईंट हमारे प्यार की गवाही दें….हम बच्चों के हिसाब से कुछ भी नहीं करेंगे….जो करेंगे अपने लिए सोच समझकर।”तनु ने पति विवेक से कहा ‘‘ … Read more

लोग क्या कहेंगे… – रश्मि झा मिश्रा

.…सीधे पल्ले की साड़ी पहने… सर पर पल्लू संभालती… जानकी काकी बड़े से शॉपिंग मॉल के दरवाजे पर आकर ठिठक गई… उन्हें कुछ अच्छी साड़ियां लेनी थी… इसलिए टैक्सी वाले ने उन्हें यहीं उतार दिया… अब इतने बड़े मॉल में अकेले घुसते उनके कदम हिचकिचा रहे थे…  वह हिम्मत कर आगे बढ़ी… लोग आ जा … Read more

रिश्तों की रीचार्जिंग – श्वेता अग्रवाल

रिशभ और सिमी की शादी को 10 साल हो चुके थे। दोनों अपने-अपने काम में इतने व्यस्त रहते थे कि अब वो पुराने दिनों की मस्ती, रोमांस और बातचीत कहीं गायब हो गई थी। रिश्ते बस एक रूटीन बनकर रह गए थे। सुबह ऑफिस की भागदौड़, शाम को थकान और वीकेंड्स पर भी बस थोड़ा … Read more

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