अब किसकी शिकायत करोगी….. – रश्मि प्रकाश

“ माँ आज बद्दुआ नहीं दोगी…अब शिकायत नहीं करोगी… ?” जयदेव ने जैसे ही कहा उनकी माँ कलावती ज़ोर ज़ोर से रोते रोते कहने लगी “ चली गई रे इस घर को छोड़कर हमेशा के लिए…अब कौन मोहे सवेरे की चाय देवेगा…. उसे बुला ले रे वापस जय…मत जाने दे।”  “ अब वो कभी नहीं … Read more

बुढ़ापे का असली सहारा ना बेटा ना बेटी बल्कि बहूं होती है – विनीता सिंह

पंडित राम स्वरूप जी और उनकी पत्नी सावित्री देवी उनके  दो बच्चे एक बड़ी बेटी और एक बेटा  दोनों बच्चे पढ़ लिख गए बेटी की शादी कर दी ससुराल चली गई। बेटा की नौकरी लग गई वह भी दूसरे शहर में रहने लग सप्ताह में शनिवार को आता और सोमवार की सुबह वापस लौट जाता … Read more

बुढ़ापे का असली सहारा ना बेटा ना बेटी बल्कि बहू होती है – हेमलता गुप्ता

गुड़िया बेटा.. देख कुछ समय के लिए अगर आना हो जाए तो आ जाना, तेरी मां कल स्टंट डलवाने जा रही है क्या पता अस्पताल से वापस भी आऊं या ना आऊं! क्या मम्मी… आजकल स्टैंड डलवाना कोई बड़ी बात नहीं है और पहले से ही अगर अपने दिनचर्या और खानपान पर ध्यान देती तो … Read more

बद्दुआ – कुमुद मोहन

“मां जी!पापा की बहुत तबियत खराब है भाई का फोन आया है एकबार मुझे देखना चाहते हैं !मै जाऊं?”डरते डरते नीता ने अपनी सास शीला जी को कहा! “क्यूं? तू कोई सिविल सर्जन है क्या जो जाकर अपने बाप को ठीक कर देगी”शीला गुस्से से बड़बड़ाई । तेरे घरवालों का ये रोज रोज का नाटक … Read more

बद्दुआ – दीपा माथुर

शहर के एक छोटे मोहल्ले में, चमचमाती इमारतों के बीच, एक टूटी-फूटी झोपड़ी थी। वहीं रहता था सद्दू — बारह साल का दुबला-पतला बच्चा। माँ पहले ही गुजर चुकी थी और पिता रिक्शा चलाकर जैसे-तैसे पेट पालते थे। घर में चार छोटे भाई और दो बहनें… ज़िम्मेदारी का पहाड़ उस नन्हे कंधे पर था। बच्चा … Read more

रिटायरमेंट – दीपा माथुर

लोग रिटायरमेंट के बाद बीमार क्यों होने लगते है? गार्डन में बोल उछालते हुए अवि ने धीरज से पूछा धीरज ;” हु मेरे दादा जी भी बीमार रहते है दादी दिनभर काम करती है मेरी हर जरूरत का ख्याल रखती है मम्मी,पापा सर्विस पर जाते तो पीछे सारा काम करती है तो व्यस्त रहती है। … Read more

रिश्ते अहंकार से नहीं त्याग और माफ़ी से टिकते हैं – दिव्या मिश्रा

सच्चा रिश्ता वही कहलाता है जिसमें अपनत्व की भावना हो कुछ गलतफहमियों के दस्तक देने पर भी उसमें कोई कड़वाहट न  फैले बल्कि वह अपने रिश्ते में मिठास बने रहने के लिए हर गलतफहमियों को भी नजरअंदाज कर देता है वहीं सच्चा रिश्ता होता है रिश्तों को अमीरी या ग़रीबी के तराजू में नहीं तौला … Read more

रिश्ते अहंकार से नहीं,त्याग और माफ़ी से टिकते हैं – मीनाक्षी

रिश्ते, प्यार और त्यागइतना अहंकार नहीं। यह अच्छा नहीं होता।इसी तरह की एक कहानी है आदेश की, जिसे अहंकार था।वो जो भी ऊँचे मुकाम पर था, अपनी बदौलत समझता था। उसे न पिता से मतलब था, न माँ से। इकलौता बेटा था। पिता ने कितनी मेहनत करके आदेश को पढ़ाया-लिखाया था। दिन-रात नौकरी करता। उसे … Read more

रिश्ते अहंकार से नहीं,त्याग और माफ़ी से टिकते हैं – गीता यादवेन्दु : Moral Stories in Hindi

त्याग और माफ़ी दो ऐसे शब्द हैं जिन्हें आप जितना भी करते जाओ कभी उनकी सीमा ख़त्म ही नहीं होती क्योंकि जिन्हें आपके त्याग और माफ़ी की कद्र नहीं है वे कभी उसका मूल्य नहीं समझते और आपसे सदा त्याग की ही उम्मीद करते जाते हैं और वो भी बिना कोई श्रेय दिए और वे … Read more

आग पर तेल छिड़कना – विनीता सिंह

सरला जी ने अपने बेटे की  शादी की थी ,उनकी बहू सुरभि जो की एक पढ़ी-लिखी और समझदार लड़की है। लेकिन दोनों की सोच में जमीन आसमान का अंतर था ।सरला जी जहां परंपरा को मानने वाली और उनका विचार था की बहू को घूंघट में रहना चाहिए, और वहीं दूसरी तरफ सुरभि  खुले विचारों … Read more

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