दहेज – एम. पी. सिंह 

अनु कि शादी अनिल से हुई तो वो दहेज में बहुत सारा सामान लेकर आई. दहेज के दम पर वो बहुत इतरा रही थी. वैसे जो भी सामान वो लाई थी, लगभग वो सब पहले से घर मैं मौजूद था, पर फर्क इतना था कि थोड़ा पुराना था पर कोई खराबी नहीं थी. दो चार … Read more

अधिकार – खुशी

नंदीश एक हैंडसम लड़का था।वो स्मार्टनेस और खूबसूरती का मिला जुला मिश्रण था।कॉलेज में तो जो उसे देख ले वो लड़की उस पर फिदा थी।इस बात को वो भी जानता था और कॉलेज में उसके बड़े अफेयर भी रहे।तभी उसके कॉलेज में ध्वनि आई जो उसकी जूनियर थी जिसे देख पहली बार नंदीश का दिल … Read more

बचपन को खिलने दो – कमलेश आहूजा

“ये तू क्या सारा दिन हँसी ठिठोली करती रहती है सबके साथ।थोड़ा सा तो गंभीर रहना सीख।भाई बहनों में सबसे बड़ी है।जैसा तू करेगी वैसा ही छोटे भाई बहन करेंगे।”घर के सभी लोग अक्सर नेहा को यही नसीहत देते रहते थे। नेहा तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी थी।पढ़ाई लिखाई में होशियार थी।हर साल फर्स्ट … Read more

जंग – संगीता त्रिपाठी 

 “नेहा ,तुम मुझे नही पहचान रही …मैं तुम्हारा पति विनय..”विनय  अधिकार से नेहा का रास्ता रोक कर बोला ।    “मेरा रास्ता छोड़ दें ..”     “कैसे छोड़ दें ,मत भूलो नेहा कानूनन तुम अभी भी मेरी पत्नी हो “दुष्टता से विनय बोला    “हां मां ,आप अपने पति और बेटे  को भूल गई ..”    बेटे की बात … Read more

दिल ढूंडता है – रवीन्द्र कान्त त्यागी

“नाश्ता तैयार हो गया क्या नीतू? जरा जल्दी निकलना है।” बाथरूम से नहाकर निकलते हुए बेताब से मधुर ने कहा। “अरे गीता, नाश्ता तैयार हो गया क्या। साहब को जल्दी निकलना है।” नीतू ने आवाज लगाई। “बस मेमसाब, आलू उबलने ही वाले हैं।” “ओ माय गौड़। अभी देर लगेगी। मुझे निकलना पड़ेगा नीतू। बिल्डिंग में … Read more

सपने सुहाने – गरिमा चौधरी

सुबह का समय था। रसोई से ज़ोर–ज़ोर से बर्तनों की खनखनाहट आ रही थी, मानो बर्तन नहीं, किसी के मन की कड़वाहट टकरा–टकरा कर आवाज़ कर रही हो। नेहा ने गैस पर चाय चढ़ाते हुए फिर एक नज़र दीवार पर घड़ी की तरफ़ डाली। “आठ बजने वाले हैं और ये लड़की अभी तक बिस्तर से … Read more

क्या? मम्मी जी आपके यहां करवा चौथ नहीं मनाते। – ज्योति आहूजा

हर लड़की की तरह सारिका के मन में भी शादी को लेकर तरह- तरह की उमंगे थी। शादी के बाद उसका ससुराल कैसा होगा? ससुराल में हर तरह के फंक्शन, त्यौहार खूबधूमधाम से मनाए जाते हो। सजने सवरने की शौकीन सारिका इसी उमंगों के साथ अपना रिश्ता होने के बाद शादी के दिन का इंतजार … Read more

   बाबा तेरे आंगन की….- लतिका श्रीवास्तव

चलिए कन्यादान की रस्म होने वाली है पंडितजी बुला रहे हैं मेघा ने आकर कहा तो रामेश्वर जी के दिल में एक हलचल सी मच गई मानो प्राचीन रस्म रिवाज वर्जनाओं की बेड़ियां तोड़ने को बेताब हो गए हों। जब से निम्मी की शादी तय हुई अजीब सी आकुलता उनके मन को बेचैन करती रहती … Read more

किस्मत अपना रास्ता खुद चुनती है – गरिमा चौधरी

रीमा ने गेट से अंदर दाख़िल होते ही नाक पर रुमाल रख लिया। “हे भगवान, ये कैसी जगह है?” उसने धीरे से माँ के कान में फुसफुसाया, “चारों तरफ़ धूल, खुले नाले, गाय-बैल… और आप कह रही थीं कि यहाँ ‘बहुत बड़ा कारोबार’ है!” माँ ने आँखें तरेरीं—“धीरे बोल, लोग सुन लेंगे। ये तेरे मामा … Read more

घूँघट

शादी के बाद पहली बार नैना अपने पति के साथ मायके आ रही थी  नैना की भाभी( मधु)—सुबह से ही बिना रुके दौड़-भाग में लगी थी। चूल्हे पर खीर उबल रही थी, गैस पर कढ़ी चढ़ी थी और बीच-बीच में वह सजावट भी ठीक करती जा रही थी। उधर, मधु की देवरानी निधि, जो नई-नई … Read more

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