अब और नहीं – लतिका श्रीवास्तव 

हर बार सुजल उसे बेइज्जत करता वह चुप रहती। शायद उसके प्रति अगाध विश्वास, अलगाव का भय, आर्थिक निर्भरता और पुत्र के भविष्य की आशंका मृणाल को उसकी कटूक्तियों को अनदेखा करने पर बाध्य कर देते थे। वह इस तथ्य से अवगत था इसीलिए वह आए दिन उस पर अत्याचार करता उसे खून के आंसू … Read more

खून के आसूं रुलाना – खुशी

सरला एक तेजतर्रार औरत थी पूरे मोहल्ले में प्रसिद्ध दो बेटियां वो भी मां के अनुरूप और एक बेटा प्रणय पति नीरज जी भी चुप रहने वाले उनकी बीवी के सामने चलती ही नहीं थी।बड़ी बेटी हर्षा की शादी घर के पास ही हुई थी और छोटी गीतू की दूसरे शहर पर वो भी अपने … Read more

निर्मला, तेरी किस्मत खुल गई! – मीनू झा

“बेटा, बड़ी खुशी की बात है! तुम्हारा बेटा डॉक्टरी की परीक्षा पास कर गया। अब तो तुम्हारे मज़े ही मज़े हैं,”निर्मला जी ने फोन पर अपनी बड़ी बेटी से कहा। “मां, अभी तो आरिफ ने बस परीक्षा पास की है, डॉक्टर बनने में तो अभी बहुत समय लगेगा।” “हाँ, सो तो है, पर चलो — … Read more

तभी तो सासू मां बेटी के घर रहने चली जाती हैं –  मीनू झा

“भाभी, मम्मी जी जो बार-बार दीदी के घर जाने की ज़िद करती हैं और चली भी जाती हैं, अच्छा लगता है क्या?”दीप्ति ने फोन पर अपनी जेठानी सोनाली से पूछा। “क्या कहूं दीप्ति, बुरा तो मुझे भी बहुत लगता है, लेकिन उनको क्या कहा जा सकता है। बेटों को ही समझना चाहिए न ये बात।” … Read more

बहू सिर्फ़ काम करने के लिए नहीं होती – आरती कुशवाहा

सुबह के दस ही बजे थे, पर शर्मा हाउस में शोर ऐसा था जैसे पूरा मुहल्ला जुट आया हो। ड्रॉइंग रूम में बड़े से स्पीकर पर गाने बज रहे थे, किचन में गैस पर एक साथ तीन-तीन बर्तन चढ़े थे, और आँगन में प्लास्टिक की कुर्सियाँ पोंछी जा रही थीं। “अरे नेहा, जरा जल्दी कर, … Read more

धोखेबाज़ कौन? – मीनाक्षी गुप्ता

राहुल की लग्जरी कार जैसे ही सिग्नल पर रुकी, अचानक उसकी आँखें सड़क पार जा टिकीं। उसने देखा कि उसकी प्रेमिका किसी दूसरे लड़के के साथ बाहों में बाहें डालकर घूम रही है। उसे बहुत दुःख हुआ, उसका दिल टूट गया। “धोखेबाज़ लड़की! हद है! मेरे जैसे सच्चे आशिक़ को यह सिला मिला? मैंने इस … Read more

समय समय की बात है – विनीता सिंह

एक शहर में रितु और साहिल बहुत अच्छे दोस्त थे ।रितु रंगों को बड़ी सुन्दर ढंग से उनकी कैनवस पर पेंटिंग्स बनाती।वही साहिल बहुत अच्छी कहानियां लिखता।रितु और साहिल दोनों ही अपने अपने घरों से दूर रह रहे थे एक ही कालेज में पढ़ते थे तो उनकी दोस्ती हो गई। दोनों अपने अपने क्षेत्र में … Read more

अधिकार प्रेम पर – रोनिता कुंडु

भैया… मैं तो दो तल्ले सोने का झुमका लूंगी, एक लौती बुआ हूं इसकी, अब इतना तो हक बनता है और नामकरण मेरे दिए हुए नाम से ही संपन्न होगा, तो कम में कैसे छोड़ दूं तुम्हें? सोनम ने अपने भैया जतिन को उसके बेटे के नामकरण पर कहा।  प्रभा जी:  अरे बेटी! तूने कुछ … Read more

सम्पति पर अधिकार किसका? – लतिका पल्लवी 

जो बेटा माँ बाप की सेवा नहीं कर सकता,उसे उनके पैसो पर भी नजर नहीं रखनी चाहिए।अभिषेक जी नें अपनी सम्पति से बेदखल करके अपने बेटे अनय को अच्छे से समझा दिया था। पापा नें उसे अपनी सम्पति से बेदखल कर दिया है सुनकर अनय तो एकदम ठगा ही रह गया था। कहाँ तो उसने … Read more

खून के आंसू रुलाना – सुदर्शन सचदेवा 

आज के समय में जिंदगी की रफ़तार जितनी तेज हो गई  है , उतनी ही मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। ऐसी ही एक कहानी है रिद्धि की, जो एक साधारण परिवार से थी, पर उसके सपने बिल्कुल असाधारण थे। वह फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती थी, लेकिन हालात ने उसे खून के आँसू रुलाने में … Read more

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