असहाय नहीं हूं – विमला गुगलानी

 राम लाल बाबू सुबह की सैर से वापिस आए, तो जोरों की भूख लगी हुई थी। बहू नमिता, बेटा अश्वनी और दोनों बच्चे किर्ती और निशांत सब जा चुके थे। उन्होंने अपनी चाबी से ताला खोला और अंदर आ गए। हाथ पैर धोकर जब रसोई में नाश्ता लेने गए तो चार सूखी सी रोटियां और … Read more

असमर्थ – सोनिया अग्रवाल 

बीते कुछ  रोज पहले मेरी नानी  जी  (माया देवी) गुजर गई।  83 से 84 साल कुछ उम्र रही होगी। बहुत बीमार थी कई दिन से। न कुछ खाती थी ना ही पीती थी। तीन महीने से तो बिस्तर से भी नही उठ पाती थी। (उनके पति श्री रामलाल जी) मेरे नाना जी भी तकरीबन इसी … Read more

मैं  असमर्थ नहीं हूं – हेमलता गुप्ता

मां. मैं सोच रहा था इस बार दिवाली पर पीछे के कमरे को सही करवा देते हैं और उसमें एक टीवी भी लगवा देते हैं! क्यों बेटा.. पीछे का कमरा तो हमारा स्टोर रूम है उसको सही करवाने की क्या जरूरत है वह तो अच्छा भला है वैसे भी हम उसमें सोते बैठते थोड़े हैं, … Read more

लोगों का काम है कहना… – उमा महाजन

  अपने घर के अंदर की सफाई समाप्त करने के पश्चात् पोर्च को साफ करने के लिए सविता अपने हाथ में पकड़े हुए वायपर से पूरी ताकत से पोर्च का पानी खींचती हुई जैसे ही गेट पर पहुंची कि उसे सामने से उनकी सोसायटी की पिछली गली में रहने वाली अपनी सखी रेखा आती दिखाई दी। … Read more

सास का दर्द बहू ही समझती है – लतिका पल्लवी 

मालिनी जी भोग के लिए लड्डू बना रही थी तभी उनकी बेटी का फोन आया। उनके फ़ोन उठाते ही उधर से आवाज आई माँ भाभी कहाँ है? मालिनी जी ने पूछा क्यों पूछ रही हो? वो क्या है न माँ मै कब से भाभी को फ़ोन लगा रही हूँ पर उन्होंने उठाया ही नहीं इसीलिए … Read more

करवाचौथ का व्रत – लतिका श्रीवास्तव

बहुरानी पहले करवाचौथ की बधाई सदा सौभाग्यवती रहो खुश रहो सुमित्रा जी ने नवेली बहू नीलम को पैर छूने पर आशीष देते हुए गदगद हो गईं । आओ यहां बैठो तुम्हारा पहला करवाचौथ है इसलिए तुम्हे कुछ परंपराएं बता दूं।जिसे सुन कर तुम्हे अपार खुशी होगी सुनकर नीलम उत्सुक हो उठी। जानती हो हमारे घर … Read more

 क्योंकि जब माँ मुस्कुराती है — तब ही घर ‘घर’ बनता है। – दिव्या सिन्हा

“माँ कैसी हैं अब?”नेहा ने घर में कदम रखते ही अपने बड़े भाई आदित्य से पूछा। आदित्य ने गहरी साँस ली, चेहरे पर थकान और मन में चिंता साफ झलक रही थी —“पहले जैसी नहीं रहीं, नेहा। कुछ महीने से तो जैसे उनमें कोई जान ही नहीं बची। खामोश रहती हैं, किसी से बात नहीं … Read more

असमर्थ – खुशी

जीवन लाल के चार बेटे और एक बेटी थी ।उनकी पत्नी सावित्री और एक विधवा बहन आशा उन्ही के साथ रहती थी।जीवन लाल की कपड़े की मिल थी।जीवन लाल की बच्चों में जान बसती थी।मदन ,बसंत, रमेश और सुरेश और प्यारी सी बेटी चंदा ये उनका भरा पूरा परिवार था। बच्चों के मुंह से एक … Read more

असमर्थ – विनीता सिंह

सुबह सूरज निकल रहा है, सूरज की किरणें चारों दिशाओं में फैल रही पक्षियों के चहकने की आवाज कानों आ रही तभी, आरती जी घर के मन्दिर में पूजा कर रही है, तभी पूजा की घंटी की आवाज सुनकर आरव सोकर उठ गया और तकिए का सहारा लेकर बैठ गया , तभी मां आई और … Read more

एक आंख ना भाना – हेमलता गुप्ता

तनु को समझ नहीं आ रहा था उसकी मामी उसके साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रही है, 3 साल पहले तनु की मम्मी पापा की एक एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई थी तब तनु 12वीं कक्षा में थी परीक्षा के बाद में तनु की मामी उसे अपने साथ ले आई तनु की मामी के दो … Read more

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