ढलती उम्र का साया

सुबह का समय था। रसोई में रिया टिफिन पैक कर रही थी। रवि ऑफिस जाने की जल्दी में तैयार हो रहा था। उसने ऊँची आवाज़ में कहा —“रिया, मेरा टिफिन तैयार हो तो जल्दी दो। मुझे देर हो रही है।” रिया ने टिफिन आगे बढ़ाते हुए धीरे से कहा —“सुनिए, क्या आज भी आप पापा … Read more

आशीर्वाद – गरिमा चौधरी

“वाह री नई बहू! सुबह-सुबह सोफे पर पैर चढ़ाकर बैठी है, हाथ में मोबाइल, सामने लैपटॉप… और सासू माँ वहाँ किचन में बर्तन खटखटा रही हैं। ज़रा-सा भी ख्याल नहीं कि घर में बड़ों की भी कोई ज़रूरत होती है कि नहीं!” शारदा चाची ने ड्राइंग रूम से ही ऊँची आवाज़ में कहा ताकि उनकी … Read more

बदनसीब बाप

“नंदू… उठ जा बेटी… देख, तेरे बाबा आ गए हैं… आँख तो खोल…”राघव चौधरी स्ट्रेचर पर सफ़ेद चादर से ढँकी उस काया से लिपटकर रो रहे थे। उनकी सूखी उँगलियाँ चादर के किनारे को बार-बार पकड़कर छोड़ देतीं, जैसे यक़ीन ही न हो कि भीतर लेटी देह अब कभी नहीं जागेगी। पास खड़ी नर्स ने … Read more

अब और नहीं – लतिका श्रीवास्तव 

हर बार सुजल उसे बेइज्जत करता वह चुप रहती। शायद उसके प्रति अगाध विश्वास, अलगाव का भय, आर्थिक निर्भरता और पुत्र के भविष्य की आशंका मृणाल को उसकी कटूक्तियों को अनदेखा करने पर बाध्य कर देते थे। वह इस तथ्य से अवगत था इसीलिए वह आए दिन उस पर अत्याचार करता उसे खून के आंसू … Read more

खून के आसूं रुलाना – खुशी

सरला एक तेजतर्रार औरत थी पूरे मोहल्ले में प्रसिद्ध दो बेटियां वो भी मां के अनुरूप और एक बेटा प्रणय पति नीरज जी भी चुप रहने वाले उनकी बीवी के सामने चलती ही नहीं थी।बड़ी बेटी हर्षा की शादी घर के पास ही हुई थी और छोटी गीतू की दूसरे शहर पर वो भी अपने … Read more

निर्मला, तेरी किस्मत खुल गई! – मीनू झा

“बेटा, बड़ी खुशी की बात है! तुम्हारा बेटा डॉक्टरी की परीक्षा पास कर गया। अब तो तुम्हारे मज़े ही मज़े हैं,”निर्मला जी ने फोन पर अपनी बड़ी बेटी से कहा। “मां, अभी तो आरिफ ने बस परीक्षा पास की है, डॉक्टर बनने में तो अभी बहुत समय लगेगा।” “हाँ, सो तो है, पर चलो — … Read more

तभी तो सासू मां बेटी के घर रहने चली जाती हैं –  मीनू झा

“भाभी, मम्मी जी जो बार-बार दीदी के घर जाने की ज़िद करती हैं और चली भी जाती हैं, अच्छा लगता है क्या?”दीप्ति ने फोन पर अपनी जेठानी सोनाली से पूछा। “क्या कहूं दीप्ति, बुरा तो मुझे भी बहुत लगता है, लेकिन उनको क्या कहा जा सकता है। बेटों को ही समझना चाहिए न ये बात।” … Read more

बहू सिर्फ़ काम करने के लिए नहीं होती – आरती कुशवाहा

सुबह के दस ही बजे थे, पर शर्मा हाउस में शोर ऐसा था जैसे पूरा मुहल्ला जुट आया हो। ड्रॉइंग रूम में बड़े से स्पीकर पर गाने बज रहे थे, किचन में गैस पर एक साथ तीन-तीन बर्तन चढ़े थे, और आँगन में प्लास्टिक की कुर्सियाँ पोंछी जा रही थीं। “अरे नेहा, जरा जल्दी कर, … Read more

धोखेबाज़ कौन? – मीनाक्षी गुप्ता

राहुल की लग्जरी कार जैसे ही सिग्नल पर रुकी, अचानक उसकी आँखें सड़क पार जा टिकीं। उसने देखा कि उसकी प्रेमिका किसी दूसरे लड़के के साथ बाहों में बाहें डालकर घूम रही है। उसे बहुत दुःख हुआ, उसका दिल टूट गया। “धोखेबाज़ लड़की! हद है! मेरे जैसे सच्चे आशिक़ को यह सिला मिला? मैंने इस … Read more

समय समय की बात है – विनीता सिंह

एक शहर में रितु और साहिल बहुत अच्छे दोस्त थे ।रितु रंगों को बड़ी सुन्दर ढंग से उनकी कैनवस पर पेंटिंग्स बनाती।वही साहिल बहुत अच्छी कहानियां लिखता।रितु और साहिल दोनों ही अपने अपने घरों से दूर रह रहे थे एक ही कालेज में पढ़ते थे तो उनकी दोस्ती हो गई। दोनों अपने अपने क्षेत्र में … Read more

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