मैं बस एक विकल्प ही हू और वो ही रहूंगी, मैं कभी किसी की प्राथमिकता नहीं बन सकती।
मैं चाहे जितना भी कोशिश कर लू पर कुछ नहीं होता, मैने सपने में भी नहीं सोचा था ऐसी किस्मत होगी मेरी की कोई पूछने वाला ही नहीं है।
शुरूआत में अब मीठे होते है बाद में धीरे धीरे पता चलता है कि जो जैसा दिखता है वैसा होता नहीं है, फट से गिरगिट की तरह रंग बदल लेते है। किस पर भरोसा करु मैं? सबकी मदद करने का आप मुझे यही फल दे थे हो ना, रोती हुई, मंदिर में बैठी सौम्या बोली।
रोते रोते कब उसकी वही मंदिर में आँख लग गई पता ही नहीं चला।
सौम्या बहुत अच्छी और दयावान लड़की थी, पर अक्सर उसका फायदा उठा लिया जाता था। अचानक से एक सफेद रोशनी आई और मोर पंख धारण, मुरली धारण किये, पीताम्बर कपड़ों में सौम्या के घर आये। सौम्या ने दरवाजा खोला और पूछा आप कौन, उधर से एक मधुर आवाज आई “मेरा नाम माधव है, मैने एक हफ्ते से कुछ नहीं खाया है, कुछ खाने को मिलेगा।
सौम्या ऐसे घर आये मेहमान को खाली हाथ नहीं भेजना चाहती थी, तो उसने घर पर बनी रोटी और सब्जी कुछ फल उनके हाथ में दे दिए।
माधव हल्का सा मुस्कुराये और बोले “आप कुछ परेशान लग रहे है, सब ठीक है ना? साथ ही में आपकी आँखें भी सूजी हुई है।”
सौम्या का हल्का सा गला भर आया और उसने बताया कि कैसे आज उसके दफ्तर में उस पर इल्जाम लगाए गये है कि उसने कंपनी के जरूरी कागज़ात दूसरी कंपनी को दे दिए कुछ पैसों के लिए। जो सच नहीं है। मैं कभी भी ऐसा करने का अपने सपने में भी नहीं सोच सकती।
माधव बोले “मैं जानता हू सखी, तुमने कुछ नहीं किया है”।
सौम्या ये सुन कर अचंभित हो गई, और आखिर हो भी क्यों ना, जिस कंपनी में, जिन लोगों के साथ वो इतने सालों से काम कर रही है, उनको उसके ऊपर भरोसा नहीं हुआ और आज आया आदमी जो कुछ नहीं जानता है वो उस पर भरोसा कर रहा है।
माधव आगे बोले भगवद्गीता में एक श्लोक है *”कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन |*
*मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि”*
इसका तात्पर्य है “कर्म पर तुम्हारा अधिकार है, फल पर नहीं” और “जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है, जो होगा वह भी अच्छा ही होगा”।
ये सुन कर सौम्या के मन को ना जाने अलग सी शांति मिल रही थी जैसे वो कही गोलोक आ गई हो, उसका मन कर रहा था वो पल हमेशा के लिए वही थम जाये। इतने में ही उसको अजीब सी ध्वनि आ रही थी और फिर वो पूछती है “माधव ये कौनसी आवाज़ आ रही है? ये आवाज़ मुझे चुभ रही है।
सौम्या के माथे पर शिकन आ गए थे, अचानक से उसकी नींद खुली और देखा कि उसके पास पड़ा फोन बज रहा था और वो सपना देख रही थी। उसने फोन उठाया और देखा उसके मैनेजर का कॉल आ रहा है।
सौम्या को लेकिन अब भय नहीं था, उसको अब ना डर लग रहा था ना रोना आ रहा था।
सौम्या ने फोन उठा कर हेलो बोला उधर से उसका मैनेजर भारी आवाज में बोला “सौम्या हमने बेसमेंट के सीसीटीवी चेक करवाए थे और उससे हमें पता चला कि दफ्तर के जरूरी पेपर्स किसी और ने लीक करवाए थे, तुमने नहीं। कल से दफ्तर तुम वापिस आ सकती हो।
सौम्या सब सुन रही थी और उसने बड़े आराम से बोला, सर अब मैं और आप लोगों के साथ काम नहीं कर पाऊंगी, आपसे मुझे काफी कुछ सीखने को मिला चाहे वो काम के मामले में हो या फिर दुनिया कैसे है उस बारे में भी सीखने को मिला, पर अब मैं इस कंपनी में और काम नहीं कर पाऊंगी, मैं आपको मेरा रेजिग्नेशन लेटर मेल कर दूंगी। ये बोलते ही उसने अपना पहनते कट कर दिया और मंदिर की तरफ देख कर बोली “मैं जानती हू लड्डू गोपाल जी वो आप ही थे और ऐसी ही मैं अब आगे बढूंगी क्योंकि मुझे पता है आप मेरे साथ थे, है और हमेशा रहेंगे, वरना *ऐसी किस्मत कहाँ* किसी की होती है आप खुद आ कर मुझे दर्शन दे प्रभु।
*एक महीने बाद*
सौम्या अब एक नई और एक अच्छी कंपनी में काम कर रही है और साथ में उसकी कदर भी हो रही है।
रोज़ सबसे पहले सुबह उठ कर सौम्या अपने लड्डू गोपाल जी का धन्यवाद करती है क्योंकि आज वो जैसे भी सब उन्हीं की ही कृपा की वजह से है।
#हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।।
#हरे राम हरे राम , राम राम हरे हरे।।
लेखिका
तोषिका