अधिकार – खुशी

नंदीश एक हैंडसम लड़का था।वो स्मार्टनेस और खूबसूरती का मिला जुला मिश्रण था।कॉलेज में तो जो उसे देख ले वो लड़की उस पर फिदा थी।इस बात को वो भी जानता था और कॉलेज में उसके बड़े अफेयर भी रहे।तभी उसके कॉलेज में ध्वनि आई जो उसकी जूनियर थी जिसे देख पहली बार नंदीश का दिल डोल गया था।

वो उससे बात करने के मौके ढूंढता और फिर वेलेंटाइन डे पर नंदीश ने ध्वनि को प्रपोज किया ।सबने ध्वनि  को 7 वे आसमान पर पहुंचा दिया कि कॉलेज का हैंडसम लड़का जिसके पीछे पूरा कॉलेज पड़ा है और वो तेरे प्यार में पागल है।ध्वनि भी धीरे धीरे नंदीश की तरफ आकर्षित हो रही थी।

कैंपस प्लेसमेंट में जैसे ही नंदीश का सिलेक्शन हुआ उसने ध्वनि के घर अपने माता पिता को भेज दिया।नंदीश के पापा बैंक में थे और मां हाउस वाइफ।ध्वनि के पापा gov employee थे और मां उसकी भी पहले टीचिंग में थी पर अब घर पर ही रहती थी।नंदीश के माता पिता आए सब कुछ तय हो गया।

पर ध्वनि के पापा चाहते थे कि ध्वनि अपनी पढ़ाई पूरी करे।पर नंदीश को तो एक एक दिन भारी लग रहा था। इसलिए उसके पिता ने कहा तेरा जहां प्लेसमेंट होगा शादी तभी करेंगे तब तक ध्वनि भी पढ़ लेगी।नंदीश को बैंगलोर प्लेसमेंट मिली और ध्वनि का सेकंड ईयर कंपलीट हो गया वो थर्ड ईयर में आई और उसकी शादी हो गई।

पिता राजीव की इच्छा नहीं थी वो चाहते थे कि बेटी पढ़ ले पर मां रजनी बोली अच्छा वर है बच्चे भी एक दूसरे को पसंद करते है कर दीजिए ।और नंदीश और ध्वनि की शादी हो गई कुछ दिन वो दिल्ली रहे फिर बैंगलोर चले गए।नंदीश ध्वनि को भूत प्यार करता हर समय उसके आगे पीछे होता फिर ध्वनि गर्भवती हो गई और उससे घर के काम नहीं होते ।

नंदीश को अभी भी वो प्यार और रंगीन रात चाहिए थी जो इस अवस्था मे possible नहीं था।धीरे धीरे चीड़ चीड़ और झगड़ा होता।नंदीश ने अपनी मां को कुछ दिन बुला लिया सास के आने से थोड़ा फरक पड़ा क्योंकि वो ध्वनि और घर का ध्यान रखती पर नंदीश का दिल ध्वनि से भर गया था

और उसका अपने ऑफिस की कुलीग रचना से अफेयर शुरू हो गया था।अब नंदीश देर रात घर आता अलग सोता ध्वनि से भी खींचा खींचा रहता।नंदीश की मां सपना समझाती की बेटा इस समय बहु को तेरी जरूरत है ऐसा मत कर।फिर एक दिन आकर बोला मां मुझे ऑफिस के काम से 6 महीने के लिए अमेरिका जाना है।सपना जी बोली बहु की हालत देख उसे तेरी जरूरत है।मैने तो इसे ये मुसीबत पालने को नहीं कहा था कहा भी था अबॉर्शन करवा ले पर नहीं अब भुगतो।

ध्वनि बोली ये क्या कह रहे हो क्यों अबॉर्शन करवाती मै हमें ईश्वर ने नेमत से नवाजा है और तुम उसे मारना चाहते हो।मै कुछ सुनना नहीं चाहता मै अपना करियर खराब नहीं करूंगा ।मै अगले हफ्ते चला जाऊंगा आप चाहे तो इसे दिल्ली ले जाए।ध्वनि ने अपने पिता को फोन लगाया और सिर्फ यही बोली जाना जरूरी है नंदीश का प्लीज़ आप मुझे ले जाय।अगले दिन फ्लाइट से माता पिता पहुंच गए उधर नंदीश के पापा राजेंद्र जी भी बैंगलोर पहुंच गए।

ध्वनि ने कहा जरूरी हैं ऑफिस की तरफ से जाना इसलिए पर सपना सब हकीकत जानती थी।ध्वनि के पिता राजीव बोले कि हम ध्वनि को अपने साथ ले जाएंगे थोड़ा मन बदल जाएगा। ध्वनि अपने माता पिता के साथ दिल्ली आ गई।नंदीश की मां ने सब बाते नंदीश के पिता को बताई की ये किस तरह की बाते बोल रहा था।

राजेंद्र जी बोले बेटा ये समय सबके जीवन में आता है इस समय एक स्त्री को सबसे ज्यादा अपने पति की जरूरत होती हैं वहीं साथ ना हो तो वो टूट जाएगी और तुम ध्वनि के साथ इतनी बेरुखी कर रहे हो डॉक्टर के पास नहीं जाते ये अच्छी बात नहीं है।

आखिर औलाद तो तुम्हारी है ना।पर पापा इतना जरूरी प्रोजेक्ट है प्रमोशन मिलेगा तो हम लोगों का ही तो फायदा है इसलिए मुझे जाने दीजिए।नंदीश चला गया और उसके माता पिता दिल्ली लौट आए।वो ध्वनि के संपर्क में थे ।मिलने आते ख्याल रखते पर नंदीश का कोई फोन नहीं आता।

कभी माता पिता के दबाव में करता भी तो बस उखड़ी उखड़ी बात करता बच्चे और ध्वनि का कभी ना पूछता।नियत समय पर ध्वनि ने स्वस्थ जुड़वा बच्चों को जन्म दिया एक बेटा एक बेटी ।सब खुश थे एक ही बार में परिवार पूरा हो गया ।राजेंद्र जी ने नंदीश को खुशखबरी सुनाई और बोले आजा अपने बच्चों के पास फिर पासपोर्ट अप्लाई कर बहु बच्चे सब को ले जाना।

पापा मै अभी नहीं आ सकता इनफैक्ट ये प्रोजेक्ट बढ़ गया है मुझे अभी 2 साल यही रहना है। तो ठीक हैं मैं बहु बच्चो का पासपोर्ट करवा उन्हें भेज देता हूं।नहीं पापा अभी नहीं अभी मै ही किसी के साथ शेयरिंग में रहता हूं उन्हें कहा रखूंगा।क्यों तुझे 2 साल रहना है

तो घर नहीं दिया कंपनी ने किसे पागल बना रहा है तेरे दिमाग से भूत नहीं उतरा अब तो बच्चे भी हो गए।पापा मैं बिजी हूं शाम को कॉल करूंगा। नंदीश फोन रख चला गया।राजेंद्र जी अपनी पत्नी सपना से बोले कि इस लड़के का दिमाग खराब है देखो बीवी बच्चों को अपने पास बुलाना नहीं चाहता।

कौन अपने बच्चों से दूर रहना चाहेगा।तब तो ध्वनि के प्यार में पागल था और आज उसे देखना नहीं चाहता।उधर राजीव और रजनी भी परेशान थे पर वो ध्वनि के सामने कुछ नहीं दिखाते।ध्वनि नंदीश को कॉन्टैक्ट करने की कोशिश करती पर कोई उत्तर नहीं ना वो मेल का जवाब देता ना ही मैसेज का तीन महीने गुजर गए

अब वो अपने माता पिता से भी बात नहीं करता था।एक दिन नंदीश का मैसेज आया मै अब कभी भारत नहीं आऊंगा और बंधन में मै बंध कर नहीं रह सकता तो तुम्हारे मेरे रास्ते अलग मेरा इंतजार मत करना।ध्वनि का रो रो कर बुरा हाल था।उसने अपने पिता को मैसेज दिखाया राजीव ने राजेंद्र जी को फोन कर घर बुलाया और ये सब बताया और दिखाया।

राजेंद्र जी और सपना शर्मिंदा थे अपने बेटे के व्यवहार पर वो बोले भाई साहब आज से हमारा रिश्ता भी उससे खत्म।सपना बोली ये आप क्या कह रहे हैं एक ही तो बेटा है।इसलिए तो रिश्ता खत्म कर रहा हूं बेटा है नहीं तो मार डालता।ध्वनि को संभलने में वक्त लगा।राजीव ने उसका एडमिशन फिर कॉलेज में करवा दिया

बच्चो को सपना और रजनी मिलकर संभालती ।लोगों के ताने रिश्तेदारों की बाते सुनते वो लोग सब सह रहे थे।एक दिन राजेंद्र जी आए और बोले हमे ध्वनि की दूसरी शादी के बारे में सोचना चाहिए  वो ये सब क्यों सहे बच्चों को हम पाल लेंगे।भाई साहब हम और आप एक ही अजीयत का सामना कर रहे हैं।

सभी ये पूछते है बेटा कहा है बहु क्यों नहीं आती चलो हम तो झूठ भी बोल दे बैंगलोर में हैं पर आप जब बेटी घर बैठी हो तो मां बाप से ज्यादा दुनिया दुखी होती हैं।इसलिए मैने सोचा है कि आप भी रिटायर है और मैं भी हम मेरा डुप्लेक्स है  फरीदाबाद में वहां शिफ्ट हो जाते है।

रोज हमे भी आना जाना मुश्किल होता हैं और इस माहौल से बच्चे और ध्वनि दूर रहे तो ही अच्छा। बहुत समझाने पर राजीव तैयार हुए और वो लोग शिफ्ट हो गए।नया माहौल था सबको यही बताया कि पति नहीं रहे अब ।ध्वनि ने पढ़ाई कंप्लीट की और आज उसका सिलेक्शन टॉप मोस्ट कंपनी में हुआ

उसे पुणे पोस्टिंग मिल रही थी पर उसने गुड़गांव चुना ताकि वो सबके साथ रह सके 7 साल हो गए थे इस वाक़िए को कई बार सब उसे समझाते शादी कर लो पर वो मना कर देती की मेरे विश्वास खत्म हो गया है इस बंधन पर से विश्वास उठ गया है मेरे बच्चे और आप लोग ही मेरी दुनिया है।सपना का मन बेटे के लिए तड़पता पर राजिंद्र जी के डर के कारण चुप रहती।

उधर नंदीश पहले रचना के साथ लिव इन में रहा फिर शादी कर ली दोनो को ही बंधन पसंद नहीं था पर आस पास के बच्चे फ्रेंड्स के बच्चे देख रचना बोली चलो अब हम भी बच्चा कर ले ।बड़ी मुश्किल नंदीश तैयार हुआ फिर एक दिन वो दोनों रात को लौट रहे थे एक एक्सीडेंट का शिकार हो गए।

जिसमे वह अपने पिता बनने की शक्ति खो चुका था।सबसे पहले उसे रचना ही उसे छोड़ गई जब तुम मर्द नहीं तो तुम्हारे साथ रह कर क्या करूं।नंदीश अकेला रह गया उसकी खूबसूरती देख कई लड़कियां उसके पास आती परन्तु जब वो उनकी जरूरत पूरी नहीं कर पाता तो अपमानित कर चला जाता।

आज घर में बड़ी चहल पहल थी हो भी क्यों ना कृष्वि और कृष्णा का 10 बर्थडे था। बहुत बड़ी पार्टी रखी थी आज सपना जी बड़ी बेचैन थी वो बोल भी चुकी थी आज अपना नंदू होता तो कितना खुश होता अंश तो उसी का है।कौन खुश होता वो जो इन बच्चों को बोझ समझ फेंक गया था।जिसने आज तक हाल चाल नहीं पूछा।उसका नाम मत लो यदि ध्वनि ने सुना तो उसे बुरा लगेगा।

पार्टी बहुत शानदार थी सब लोग चले गए बच्चों को सुला सब हॉल में काफी पी रहे थे कि डोर बेल बजी ।दरवाजा  सपना ने  खोला सामने नंदीश खड़ा था उसे देख सपना उसके गले लग रो पड़ी बोला बेटा कहा चला गया था तू  मैं तुझे कितना याद करती थी। बस अब तू आ गया है  अब कही नहीं जाना।

राजेंद्र जी बोले सपना दूर हो जाओ हम इसे नहीं जानते ये कौन है? इसे  यहां का पता किसने बताया। तुमने सपना क्यों बुलाया इसे यहां।ध्वनि सामने खड़ी नंदीश को देख रही थी।नंदीश उसे देख बोला मेरी ध्वनि मेरे बच्चे मै उनके पास लौट आया हूं।

किस अधिकार से तुम यहां वापस आए हो तुम्हारे पति और बच्चों के पिता के अधिकार से।किस अधिकार की बात कर रहे हो तुम।जब बच्चे गर्भ में थे तब तुम उन्हें मारना चाहते थे आज पिता  हो गए और तुम्हे कैसे पता बच्चे है  तुम कभी डॉक्टर के पास नहीं गए मेरे साथ मैने जब सुना था

हमारे जुड़वा बच्चे हैं मै कितनी खुशी खुशी आई थी तुम्हारे पास तुमने मुझे कमरे में भी नहीं आने दिया और फिर पार्टी करने चले गए।बस रोज एक ही जिद अबॉर्शन करवाओ।आज तक ये बात मैंने किसी को नहीं बताई सॉरी Mr नंदीश गेट आउट ऑफ आवर लाइफ हमारी जिंदगी में आपकी कोई जगह नहीं मेरे बच्चे जानते हैं कि उनके पिता नहीं है।

बहु ये क्या कह रही हो तुम्हारा पति सामने खड़ा है और तुम उसे दुनिया में नहीं है कह रही हो।सही कह रही हैं  राजेन्द्र जी बोले और तूने तो तलाक के कागज भेजे थे वो मेरे पास ही है निकल जा यहां से और तुम चाहो तो अपने बेटे के साथ चली जाओ अब खुद का कुछ नहीं बचा तो दूसरों की जिंदगी में आग लगाने चला आया।

सपना बोली क्या कह रहे हैं आपका  अपना खून है नहीं ये गंदा खून मेरा नहीं है तुम्हे क्या पता ये वहां 8 साल लिव इन में रहा फिर एक्सीडेंट में ये अपनी मर्दानगी खो चुका है इसलिए इसे घर परिवार की याद आई है।क्यों सही कहा ना मैने आपको ये सब कैसे पता नंदीश बोला । राजेंद्र जी बोले तेरे ही दफ्तर में मेरे दोस्त केवल का बेटा भी हैं क्या संस्कारी लड़का है वहीं तेरी करतूते बताता था।

अब जो तू अंधेरे में आया है ना उसी अंधेरे में लौट जा कभी ना आने के लिए मेरी बेटी मेरे पोता पोती मेरा अभिमान है बोझ नहीं समझा । ध्वनि इसका अधिकार खत्म करो और उन्होंने वो डायवोर्स पेपर निकले जो नंदीश ने कभी भेजे थे उस पर ध्वनि के साइन करवा  नंदीश के मुंह पर मारे और उसे घर से निकाल दिया और सपना से कहा जाना चाहती हो तो जाओ।सपना सोफे पर बैठ गई और नंदीश चला गया।

अगले दिन रात की उसकी flight थी वो होटल के कमरे में लेटा सोच रहा था इसी खूबसूरती ने मुझे खुद सर बनाया और सब होते हुए मै कंगाल हो गया आज बीवी है बच्चे है पर मेरा कोई नहीं मैने अपने अधिकार खुद छोड़े और अब किसी पर मेरा अधिकार नहीं।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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