जीवन भोपाल के पास एक छोटे से गावं मैं रहता था और पशु आहार का कारोबार करता था. पंजाब से माल आता था ओर आस पास के छोटे पशु पालक माल ले जाते थे. बिक्री बहुत ज्यादा नहीं थीं पर कमाई काफ़ी ज्यादा थीं. जीवन की पत्नी ज्योति अपना घर ओर बच्चे नीता व नितिन क़ो संभालती थीं. नितिन छोटा था
लेकिन समझदार ओर पढ़ाई में तेज था परन्तु नीता पड़ने में औसत थीं. नितिन अभी 10वी में था कि पिताजी की तबियत खराब रहने लगी. नितिन कॉलेज के दूसरे साल में था कि पिताजी क़ी तबियत काफ़ी बिगड गई, भोपाल के अच्छे से अच्छे डाक्टर क़ो दिखाया ओर पैसा भी बहुत खर्च किया पर बचाया नहीं जा सका.
पिताजी के गुजर जाने के बाद नितिन ने पढ़ाई छोड़ दी और पिताजी का करोबार संभाले लगा. नितिन कि पूरी कोशिश रहती कि माँ ओर बहन क़ो किसी तरह कि कोई परेशानी न हों. नीता के एम. बी. ए. करते
ही उसकी शादी अच्छे परिवार में पढ़े लिखे, रहीस लडके गौरव से करा दी. गौरव अपने पिताजी का खानदानी व्यापार संभालता था. नितिन ने शादी में अपनी हैसियत से कहीं ज्यादा खर्चा किया ओर नीता क़ी खुशी का पूरा ध्यान रखा. इन सब के लिए उसने बाजार से काफ़ी लोन भी उठाया था
शादी के बाद नीता का रहन सहन काफ़ी बदल गया. गौरव ने शादी के बाद एक पार्टनर के साथ मिलकर नया शोरूम खोला. पार्टनर ने हेरा फेरी करके घाटा दिखाया, और शोरूम बन्द करना पड़ा.
नुकसान से उभरने के लिए नितिन ने गौरव क़ो मार्किट से पैसे उठाकर मदद क़ी. नितिन सब खर्चो का हिसाब किताब बराबर लिख कर रखता था.
फिर एक दिन अचानक नीता घर आई और नितिन से बोली, मुझे पिताजी क़ी जायदाद से आधा हिस्सा चाहिए. नितिन ओर माँ ने बहुत समझाया, क़ी हमारे पास पैसे नहीं है, पहले ही बाजार में बहुत उधारी है. परन्तु नीता अपनी बात पर अड़ी रही.
बोली पैसे नहीं है तो मकान दुकान बेचकर मेरा हिस्सा देदो. नितिन बोला, मकान दुकान बेच दूँगा तो हम रहेंगे कहाँ ओर खायेंगे क्या? नीता बोली, ये सब मैं नहीं जानती, पिताजी क़ी जयदाद पर मेरा भी बराबर का हिस्सा है. अगर सीधी तरह से नहीं दोगे तो अदालत से ले लूँगी. नीता का ये रूप देखकर नितिन सदमे मैं खड़ा रहा ओर माँ,
बेटी के आगे हाथ जोड़कर बोल रही थीं, बेटी ये तू क्या बोल रही है? सारी जमा पूंजी तो तेरे पिताजी क़ी बीमारी, तेरी पढ़ाई और शादी मैं लगा दी, आज भी हम उसका कर्ज चुका रहे है. तभी नीता का ड्राइवर गाड़ी लेकर आ गया और वो माँ क़ो रोता हूँ छोड़ कर चली गई.
कुछ दिन बाद अदालत का नोटिस आया ओर कोर्ट में हाजिर होने क़ो बुलाया. नितिन ने घर के सारे खर्चो का हिसाब किताब निकला ओर उनके बिल ढूंढ कर जमा किये. फिर एक पेज पर वो सब खर्चे लिखे जो नीता क़ी पढ़ाई, शादी ओर उसके पति क़ो बिज़नेस के लिये दिये थे.
नितिन तय समय पर अपने वकील के साथ अदालत पहुंच गया, वहाँ नीता के साथ उसका पति भी आया था. नितिन के वकील ने जज साब क़ो सब कुछ सच सच बता दिया ओर सारे खर्चे आदि का ब्यौरा भी दे दिया. नीता के वकील ने झूठी कहानी सुनाई और कहा क़ी नितिन ने नीता कि शादी भी बिल्कुल साधारण कि थीं ओर सारी जमा पूंजी ओर
सारी प्रॉपर्टी खुद खा जाना चाहता है, पिताजी क़ी प्रॉपर्टी पर बेटी का भी बराबर का हक है. जज सब ने नीता से पूछा तो उसने भी हिस्सा माँगा. जज साब ने नीता के पति, गौरव से बोला, तुम तो समझदार ओर पढ़े लिखें लगते हों, तुम्हारी क्या मर्जी है.
नीता का पति बोला, नीता क़ो अपने बाप क़ी प्रॉपर्टी में बराबर का हिस्सा मिलना चाहिए. फिर जज साब ने पूछा, कि तुम्हारे परिवार में कौन कौन है. गौरव बोला, दो बहने है ओर दोनों का ब्याह हों चुका है, बस घर में विधवा माँ है. जज साब ने अगली तारीख दी ओर कहा कि उसी दिन फैसला भी सुना दूँगा, लेकिन तुम अपनी सालाना कमाई का पूरा ब्यौरा लेकर आओगे ओर अपनी दोनों बहनो हों भी साथ लेकर आओगे. अगर कोई एक भी अनुपस्थित रहा, तो केस ख़ारिज कर दूँगा, इसलिए सोच समझकर ही कोई कदम उठाना.
इसी दौरान जज साब ने वेरिफिकेशन के लिए एक वकील क़ो नितिन के गाँव भेजा ओर सच्चाई का पता लगवाया. जज साब क़ो नितिन की बात में सच्चाई नज़र आई ओर नीता कि बातों में लालच.
अगली तारीख पर गौरव अपनी पत्नी ओर बहनो क़ो भी साथ लेकर आया. जज साब ने उसकी कमाई का ब्यौरा देखा, जो करोड़ो में था. जज साब ने गौरव कि ओर देखा और बोले, बताओ तुम क्या चाहते हों? गौरव बोला, ससुर कि प्रॉपर्टी का आधा हिस्सा उनकी बेटी क़ो मिले, जो इसकी हकदार भी है. तब
जज साब बोले, ठीक है. नितिन की आधी संपत्ति उसकी बहन क़ो मिलती है. अब तुम्हे अभी एक अंडर टेकिंग देनी होंगी, कि तुम अपने पिताजी कि संपत्ति के 3 हिस्से करोगे और 2 हिस्से अपनी बहनो क़ो दोगे.
गौरव बोला, मेरी बहनो क़ो संपत्ति नहीं चाहिए, वो दोनों सम्पन्न है. क्या तुम सम्पन्न नहीं हों? जज साब ने पूछा. तुम प्रॉपर्टी में हिस्सा देकर अपना फर्ज निभाओ, तुम्हारी बहने उसका जो भी करना चाहे, उनकी मर्जी. चलो, आधे घंटे बाद सोच समझ कर वापस आ जाना, आज केस क्लोज करना है. जज साब कि बात सुनकर गौरव क़ो पसीना आ गया क्योंकि दोनों बहनो क़ो 10-10 करोड़ देना होगा. आधे घंटे बाद गौरव का वकील आया ओर बोला, जज साब, हमें नितिन कि संपत्ति से कुछ नहीं चाहिए, हम केस वापस लेते है.
नीता के केस वापस लेते ही गौरव कि बहन बोली, भईया, हमें भी पिताजी कि प्रॉपर्टी में अपना अपना हिस्सा चाहिए. गौरव चिल्लाया, क्या बक रही हों, तुम पागल हों गई हों क्या? बहन बोली, वाह भईया, तुम अपने ससुराल से हिस्सा मांगो, तो ठीक, हम मांगे तो पागल. तुम अपने आप हिस्सा दे देना वरना हमें भी अदालत से लेना पड़ेगा.
निखिल सर पकड़ कर अदालत में ही बैठ गया. पैसों कि लालच में ससुराल से सम्बन्ध बिगाड़ लिए, ओर अब बहनो से भी रिश्तो में खटास पैदा हों गई.
नीता और गौरव अब पछता रहे थे की कुछ लाख का लालच करके करोड़ो के नुकसान मेँ फंस गये.
नितिन ने जज साब क़ो धन्यवाद दिया और बिना अपनी बहन की और देखे शांति से चला गया.
आपकी राय मेँ, क्या जज साब का निर्णय सही था?
धन्यवाद
एम. पी. सिंह, कोटा
स्वरचित, अप्रकाशित