राजेश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। माता-पिता ने उसे खूब पढ़ाकर, अच्छे संस्कार देकर इस समाज में रहना और जीवन यापन करना सिखाया ।अब राजेश बिजली विभाग में नौकरी भी करने लगा। रोजाना वे अपने दफ्तर बस से जाया करता।
इस बस में मीरा नाम की लड़की कॉलेज जाया करती है। समय बीतता गया। राजेश और मीरा दोनों में आकर्षण कब प्रेम में बदल गया पता ही नहीं चला। राजेश और मीरा दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह समझने लगे। दोनों ने मन ही मन में फैसला कर लिया कि वह अपने प्रेम के बारे में अपने माता-पिता से बात करेंगे ।
बस इसी निश्चे के साथ राजेश ने अपने माता-पिता को मीरा के बारे में बताया। माता-पिता ने खानदान के बारे में पूछा। तो राजेश ने बताया कि मेरा एक अच्छे खानदान की लड़की है। वह मेरी तरह अपने माता-पिता की इकलौती औलाद है ।राजेश के माता-पिता मीरा के माता-पिता से मिले और दोनों पक्षों में मीरा और राजेश की शादी के लिए रजामंदी हो गई।
फल स्वरुप मीरा और राजेश की शादी हो गई ।मीरा के माता-पिता बुढ़ापे की दहलीज पर थे और दूसरी तरफ राजेश के माता-पिता भी बुढ़ापे की दहलीज पर थे। मीरा और राजेश की शादी के बाद की जिंदगी कुछ समय के लिए बहुत ही प्यार से व्यतीत हुई परंतु एक समय ऐसा भी आया।
जिस समय राजेश और मीरा की जिंदगी में खींचतान शुरू हो गई। राजेश के माता-पिता चाहते की मीरा उनके बेटे के साथ ससुराल में ही रहे परंतु मीरा के माता-पिता चाहते की राजेश मीरा के साथ मायके में रहे। इस खींचतान के बीच अक्सर मीरा और राजेश में तनाव शुरू हो गया
और दोनों ने यह निर्धारित किया कि मेरा अपने माता-पिता के साथ रहेगी और राजेश अपने माता-पिता के साथ रहेगा। इस प्रकार दिन बीतने लगे ।कुछ समय बाद मीरा के पिता बहुत बीमार हो गए और राजेश मीरा के घर पर जाकर उनके उसके माता-पिता उसके पिता की सेवा में जुट गया परंतु कुछ समय बाद मीरा के पिता का स्वर्गवास हो गया।
अब मेरा अपने अपनी मां के साथ अकेली हो गई। तद उपरांत मीरा ने राजेश की बेटी को जन्म दिया ।मीरा की मां राजेश की बेटी का पालन पोषण करने में पूरी तरह व्यस्त हो गई और राजेश अपने माता-पिता की सेवा में लग रहा ।समय बीतता गया और राजेश की बेटी अब स्कूल भी जाने लगी ।
मीरा कई बार राजेश को कहती कि वह उसके पास आकर रहे परंतु राजेश हमेशा उसे समझाता कि वह अपने माता की सेवा करें और वह अपने माता-पिता की सेवा करेगा। मैं किसी भी हालत में अपने माता-पिता को अकेला नहीं छोड़ सकता। मीरा इस बात पर कई बार मान जाती
और कई बार गुस्सा भी करती परंतु राजेश सब कुछ समय पर छोड़कर अपने माता-पिता की सेवा में लग जाता है ।माता-पिता को राजेश की आदत हो गई थी। अब वह कई बार स्वार्थ में पड़कर राजेश को अपनी तरफ पूर्ण रूप से खींचने का प्रयास करते रहते।
राजेश के माता-पिता मीरा को बुरा भला कहते रहते परंतु राजेश दोनों परिवारों में सामंजस्य बनाने के लिए हमेशा प्रयास ही करता रहता ।इसी तरह समय बिता गया और राजेश के माता-पिता अब राजेश को कभी कभार उसकी पत्नी से मिलने के लिए भेजते ।
राजेश की बेटी भी उसे बहुत याद करती। राजेश मन ही मन में बहुत दुखी होता और अपनी पत्नी और बेटी से मिलने के लिए तड़पता परंतु माता-पिता की जिद के आगे और उनके बुढ़ापे के आगे वह टूट जाता और अपने मां को समझाते हुए सब कुछ समय पर छोड़ देता।
एक समय ऐसा भी आया जिस समय मीरा की मां बहुत बीमार हो गई। अब राजेश अपने माता-पिता को कुछ पल के लिए स्वस्थ छोड़कर मीरा की माता की सेवा के लिए जाने लगा। वह रोज मीरा के पास जाता और उसकी माता की सेवा करता और फिर वापस घर पहुंच जाता। इस पर उसके माता-पिता उसे पर बहुत क्रोध करते हैं
और उसे कहते हैं कि वह न जाए परंतु राजेश भी उनकी इस बात से सहमत नहीं होता। राजेश जानता था कि मीरा की माता के पास अब ज्यादा समय नहीं है और वह यह कभी नहीं चाहेगा कि जिस समय उसकी माता इस दुनिया को छोड़कर जाए। तो उसकी इकलौती बेटी उसके पास ना हो।
वह पूरी तरह से मीरा का साथ दे रहा था और कहीं ना कहीं मीरा भी उसे कभी भी माता-पिता के पास जाने से नहीं रोकती परंतु कई बार गुस्से से वह भी बुरा भला कह देती परंतु बाद में राजेश से माफी मांग कर सब ठीक कर लेती । राजेश को एक दिन अचानक पता चला की मीरा की मां की हालत बहुत खराब है
और वह मीरा के पास पहुंच गया ।जहां पर उसकी मां अंतिम सांस ले रही थी ।राजेश ने मीरा का भरपूर साथ दिया और एक समय ऐसा भी आया। जब मीरा की मां इस संसार को अलविदा कह कर चली गई ।इस समाचार को सुनकर राजेश के माता-पिता दंग रह गए।
अब वह राजेश से कहते कि वह जल्दी ही मीरा को उनके पास ले आए और दोबारा वापस वहां पर कभी न जाए परंतु राजेश चाहता था। कि मीरा के माता-पिता के सारे क्रिया कर्म उनके घर में पूर्ण रूप से किया जाए । ताकि मीरा को जिंदगी भर किसी प्रकार का कोई रंज मन में ना रहे ।
परंतु राजेश के माता-पिता इस बात पर राजी नहीं होते और प्राय राजेश से भी झगड़ पड़ते परंतु राजेश जानता था कि उसके माता-पिता अब बूढ़े हो चुके हैं। अधिक उम्र होने के कारण सोचने की क्षमता और स्वार्थ के वशीभूत होकर वह ऐसा कर रहे हैं। इसलिए वह कोई भी गलत कदम नहीं उठाना चाहता था।
जिससे मीरा के दिल को ठेस पहुंचे ।उसने पूरी समझदारी से काम लिया ताकि ना उसके माता-पिता को किसी प्रकार की परेशानी हो और ना ही मीरा अकेला महसूस करें ।गांव के लोग राजेश के घर पर जाकर उसके माता-पिता को भड़काते कि आपका बेटा गलत कर रहा है।
आपको उसे काबू में करना चाहिए और मीरा को अपने ससुराल लेकर आना चाहिए। अब उसका वहां पर कुछ नहीं है परंतु राजेश जानता था कि यदि मुझे अपना परिवार चलाना है और सब को जोड़कर रखना है। तो मुझे अपनी बुद्धि से ही काम लेना पड़ेगा ।
वह एक अच्छा बेटा बनने के चक्कर में अपनी पत्नी के साथ गलत नहीं कर सकता और राजेश अपनी बुद्धि अनुसार काम करता गया और एक समय ऐसा आया ।जब मीरा स्वयं ही राजेश के पास उसके घर पर जाकर उसके माता-पिता के साथ खुशी-खुशी रहने लगी ।
यदि राजेश ने संतोष रखकर और अपनी बुद्धि का प्रयोग नहीं किया होता ।तो आज उसका घर टूट गया होता। राजेश ने दोनों परिवारों की इज्जत रख ली। अब वह एक अच्छा बेटा भी बन गया और एक अच्छा पति भी बन गया।
धन्यवाद।
लेखक :संजय सिंह।