अब और नहीं – लतिका श्रीवास्तव 

हर बार सुजल उसे बेइज्जत करता वह चुप रहती।

शायद उसके प्रति अगाध विश्वास, अलगाव का भय, आर्थिक निर्भरता और पुत्र के भविष्य की आशंका मृणाल को उसकी कटूक्तियों को अनदेखा करने पर बाध्य कर देते थे।

वह इस तथ्य से अवगत था इसीलिए वह आए दिन उस पर अत्याचार करता उसे खून के आंसू रुलाता ।जानता था यह मुझे छोड़ कहीं जा ही नहीं सकती।

क्यों जहर के घूंट पीती रहती है कब तक सहती रहेगी मां सावित्री जी समझाती जब उसे तेरी कद्र नहीं है अब तो एक पुत्र का बाप भी बन गया फिर भी हरकतों में कोई सुधार नहीं है..क्यों घुट रही है अभी तेरे मां बाप जिंदा है ।

मृणाल सब सुनती और दूसरे कान से बाहर निकाल देती।

उसके दिल में सुजल के प्रति भरोसा  कि बेटे का भविष्य वह सही बनाएगा इतना गहरा था कि मां की बातें वहां तक पहुंच ही नहीं पाती थीं।

लेकिन आज मृणाल का हृदय क्षत विक्षत हो गया जब सुजल ने मृणाल पर तो हाथ उठाया ही और मां को बचाने आए  दो वर्ष के अबोध पुत्र निक्कू को भी निर्ममता से पीट दिया और जमीन पर पटक दिया।

निक्कू मां से लिपट बिलख रहा था ” मां पापा हमसे प्यार नहीं करते ना तभी तो इतना मारते हैं।मुझे पापा से बहुत डर लगता है मां।देखना एक दिन मार मार के मुझे भी मार डालेंगे  और तुझे भी हिचकी भर भर कर रोते निक्कू की दशा देख और बात सुन आज तो मृणाल के होश उड़ गए।भरोसा टूट कर बिखर गया।

चुप हो जा निक्कू चुप ।अभी तक मैं खून के आंसू रोती रही सहती रही तेरे भविष्य की खातिर।लेकिन अब नहीं। आज के बाद कोई मेरे बच्चे को खून के आंसू नहीं रुला सकता।जो रुलाएगा उसके साथ रहना ही नहीं है।चल मेरे साथ हम यहां नहीं रहेंगे  तेज दृढ़ आवाज से निक्कू चुप ही हो गया और इस नई निडर मां को टकटकी लगा देखने लगा।

कहां जाएंगे मां हम।वहां भी पापा आ गए तो वह फिर सहम गया।

नहीं वहां नहीं आ पाएंगे और अगर आ भी गए तो मैं रिपोर्ट कर दूंगी लेकिन अपने कलेजे के टुकड़े को खून के आंसू नहीं रुलाऊंगी रण चंडी बनी मृणाल ने निक्कू के आंसू पोंछ गोदी में उठा लिया और नई राह की ओर निडर कदमों से चल पड़ी।

खून के आंसू रुलाना#मुहावरा आधारित लघुकथा

लतिका श्रीवास्तव 

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