सीमा और मीना देवरानी और जेठानी दोनों की ज्यादा नहीं बनती थी सीमा बड़े घर की बेटी नखरे बहुत ज्यादा थे सीमा की लव मैरिज हुई अनुज कभी भी सीमा को किसी बात से रोक-टोक नहीं करता था सुबह आराम से उठना नाश्ता करके अपने कमरे में फिर चली जाती थी आराम से खाना खाना खाने में भी बहुत नखरे थे
अपना खाना अलग बना लेती थी एक दिन सास रीमा ने दोनों बहू को बुलाकर अपने पास बैठाकर समझाया कि मेरे चले जाने के बाद तुम दोनों मिलजुल कर रहा करो सीमा ने कहा कि मां जी हम तो अभी भी मिलजुल कर रहते हैं तभी मीना ने कहा बात तो सही कह रही है अम्मा मैं भी यही चाहती हूं
कि हम दोनों मिलकर काम करें लेकिन मैं आपको एक सलाह देती हूं कि हम अभी अपने काम का बंटवारा कर लेते हैं सास ने कहा मेरे जीवित रहते हुए तुम दोनों यह काम बिल्कुल नहीं करोगी आपस में मिलजुल कर काम करोगी तो जिससे प्रेम भाव हमेशा बना रहेगा और आगे आने वाली पीढ़ी भी तुम लोगों से यही सीखेगी
की हमें हमेशा मिलजुल का काम करना है फिर से मीना ने ने कहा अम्मा आप नहीं समझ रही हैं मैं किसी चीज का बंटवारा नहीं करना चाहती हूं लेकिन यदि हमें कुछ बातें सीखना पड़ती हैं तो उसके लिए हमें अपने तरीके बदलने पड़ते हैं यदि सीमा शाम का खाना बना ले और मैं सुबह का पूरा काम कर लूं
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तो हम दोनों में कोई लड़ाई झगड़ा नहीं होंगे और ना कोई ज्यादा काम करेगा ना कोई कम काम करेगा… दोनों का बराबर काम होगा.. लेकिन सास ने कहा- नहीं मीना तुम अपनी हमेशा चलाने की कोशिश करती हूं यह सब नहीं चलेगा.. मैं जो कहती हूं.. वही करो सास रीमा को ज्यादा कुछ भी नहीं पता था वह सोचती थी
की देवरानी जेठानी अपना काम कर लेती है ..दोनों बहुएं मेरी बहुत अच्छी है मीना ने सोचा चलो ठीक है अब मैं ज्यादा बहस बाजी नहीं करती हूं.. कुछ दिन बाद अचानक मीना की मम्मी की तबीयत खराब हो गई मायके में और फोन आया कि जल्दी दीदी आ जाओ! हम लोगों से मम्मी बिल्कुल नहीं सभंल रही हैं मीना ने बिना सोचे समझे ही अपनी सास से कहा कि
मैं शाम की ट्रेन से अपने मायके जा रही हूं मेरी मम्मी की बहुत तबीयत खराब हो गई है मैं उनको संभालने के लिए 10 से 15 दिन के लिए जा रही हूं.. यह सुनकर सास रीमा को थोड़ा धक्का लगा क्योंकि वह भी ज्यादा काम नहीं कर पाती थी घर में इतने सारे लोग होने पर भी कोई किसी काम में मदद नहीं करता था।
मीना बहुत शांति से अपना काम कर लेती थी सास ने हांमी भर दी और मीणा अपने बच्चों को लेकर मायके चली गई.. और यह भी था कि बच्चों की छुट्टियां भी लग गई थी मीना जाकर अपनी मां की सेवा में लग गई
और बच्चे भी मामी के बच्चों के साथ खेला करते वहीं पर मीना ने बच्चों के लिए स्विमिंग क्लास और कराटे क्लास भी लगा दी भैया को अपनी नौकरी पर वापस जाना था मीना ने फोन पर अपने पति को या कह दिया कि मुझे आने में अभी थोड़ा समय लगेगा बच्चे भी यहां पर खुश हैं …
वहीं दूसरी और ससुराल में सीमा के ऊपर पूरा काम का वर्डन आ गया सीमा बहुत टेंशन में रहती थी.. उसकी सुबह उठने की बिल्कुल आदत नहीं थी सास के घुटने में बहुत दर्द रहता था ज्यादा वह खड़ी भी नहीं हो पाती थी।
खड़े होकर कोई काम नहीं कर पाती थी सभी को नाश्ता खाना बहुत लेट मिलने लगा.. शाम का खाना तो वह छोड़ ही देती थी सुबह जो जैसा बन गया घर में लड़ाई झगड़ा ना हो इस कारण से अनुज बाहर से बहुत कुछ आर्डर कर देता था।
जिससे घर में शांति बनी रहे पर सासू मां बाहर का ज्यादा कुछ खाती नहीं और यदि कभी बाहर का का भी लेती थी।
तो उन्हें उल्टी दस्त होने लगती थी बीमार पड़ जाती थी यह सब देखकर बड़े भाई मनोज ने कहा कि मम्मी आप किसी की बात नहीं मानती हो अब सीमा को देखिए काम तो कर लेती है पर हम लोगों को समय पर कुछ भी नहीं मिल पाता है इसलिए आप एक बाई लगा लीजिए कम से कम हम लोगों को खाना तो वक्त पर मिल जाया करेगा दो वक्त की रोटी कमाने के लिए हम लोग जाते हैं और वह भी अच्छे से नहीं मिलती ।
सास रीमा ने कहा कि अब अपनी पत्नी को बुला लो तभी मनोज ने कहा कि नहीं मम्मी अभी उसका फोन आया है कि उसे आने में समय लगेगा।
उसकी मम्मी अभी चल फिर नहीं पा रही है और उनका अभी एक और ऑपरेशन होना है।
रीमा ने कहा कोई भी बहु इतने दिन के लिए मायके नहीं जाती है और मैं एक बात बता दूं कि मेरे घर में कोई बाई नहीं लगेगी।
सब लोग मिलकर काम करोगे तो मिलकर काम हो जाएगा अनुज ने कहा कल से मैं सीमा की मदद कर दिया करूंगा ।
लेकिन सीमा को समय पर उठाना पड़ेगा सीमा ने कहा मैंने आप लोगों की सारी बातें सुन ली है और मुझे जैसा रहना है मैं वैसे ही रहूंगी।
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नहीं तो मैं मायके चली जाऊंगी यह सुनकर रीमा ने कहा बहू तुम कैसी बातें कर रही हो मीना को देखो कम से कम 4 से 5 सालों बाद मायके गई है तुम तो लगभग अपने मायके जाती रहती हो हम लोग तुमसे कभी कुछ नहीं कहते हैं।
लेकिन तुम मौके का क्यों फायदा उठा रही हो तभी सीमा ने कहा की मां की फिर एक बाई रख लेते हैं।
मैं इतना सारा काम नहीं कर पाऊंगी रीमा ने बहुत सोचा उसके बाद डिसीजन लिया कि ठीक है एक बाई रख लेते हैं।
जब तक मीना वापस नहीं आती है बाई रखने के बाद सारा घर और परेशान हो गया ।
किसी को उसके साथ का खाना नहीं जम रहा था रीमा को समझ नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करें उसके घर में एक नहीं चल रही थी बाहर से खाना भी आर्डर हो रहा था बाई भी खाना बना रही थी इतना सब होने के बाद भी खाना घर से बहुत फेंका जा रहा था।
सुबह उठते ही रीमा अपने सिर पर हाथ रख कर बैठ गई और सोचने लगी कि आज मेरी बहुत बड़ी गलती हो गई है मीना ने कहा भी था।
कि सुबह और शाम हम दोनों के लिए बांट दिए जाएं लेकिन मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
आज मुझे समझ में आया कि मीना कितनी सच कह रही थी मुझे भी उसका साथ देना था… यदि मैं उसका साथ देती तो आज मुझे यह दिन देखना ना पढ़ते हैं।
उस समय सुबह-सुबह मीना का फोन आया और कहने लगी अम्मा आपकी अब तबीयत कैसी है ।
तभी रीमा ने कहा कि बेटा अब जल्द ही वापस आ जाओ घर की हालत बहुत खराब हो रही है तुमने इतने साल जो संभाल मुझे तो पता ही नहीं चला ।
और आज तुम्हारे जाने के बाद मुझे एहसास हुआ कि तुम कितने अच्छे से शांति से काम करती थी।
मीना ने कहा अम्मा मैं आपको यही बताने के लिए फोन कर रही थी।
कि मैं दोपहर की ट्रेन से आ रही हूं मेरी मम्मी की अब तबीयत ठीक है ।
अरे बेटा फिर तो तू जल्दी वापस आ जाओ तेरे ही इंतजार कर रही हूं ।
सीमा की जो आंसू निकल रहे थे यह खबर सुनकर मोती में परिवर्तित हो गए रीमा को एहसास हो गया कि मुझे दोनों बहू को बराबर से प्यार काम और सम्मान देना चाहिए।
तभी जिंदगी में दोनों ही मिलजुल कर रहेंगी और आगे आने वाली पीढ़ी को भी एक अच्छा संदेश देंगी।
रीमा ने सीमा को आवाज देकर कहा कि तेरी जेठानी आज वापस आ रही है इसलिए आज से तुम भी अपने कर्तव्य को पूर्णता निभाना ।
और इतने दिनों में जो गलतियां की है उन्हें सुधारने की कोशिश करना सीमा ने कहा की अम्मा मैं अपनी गलतियों को सुधारने की कोशिश करूंगी ।
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रीमा ने कहा कि तुम जो देर से उठती हो यह तुम्हारे लिए भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
और तुम्हारे बच्चे भी इसलिए तुम्हारी बात नहीं मानते हैं सीमा ने कहा की मम्मी में अब आपकी हर बात माना करूंगी ।
और मुझे एहसास हो गया है कि मुझे भी दीदी मीना से सीखना चाहिए कि ससुराल और मायके को कैसे संभालना है ।
यह कहते हुए सीमा ने सास रीमा के चरण स्पर्श किए और उनके बगल में बैठकर उनसे आशीर्वाद लिया ।
दोस्तों में इस कहानी के माध्यम से यही कहना चाहूंगी कि हमें घर में रहते
हुए कभी किसी से कंपटीशन नहीं करना चाहिए।
बल्कि कुछ ना कुछ हर दिन सीखते रहना चाहिए कभी किसी काम को बोझ समझकर नहीं हंस कर मुस्कुरा कर मिलजुल कर सीखना चाहिए।
विधि जैन