आँखें नीची होना – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

वह एक संयुक्त परिवार है । जहाँ सास नीरजा , ससुर दशरथ जी दो देवर , एक छोटी ननंद थी । ऐसे घर में विशाल की पत्नी और घर की बड़ी बहू बनकर सुहानी ने कदम रखा था । वह धीरे-धीरे अपने आपको इस माहौल में ढालने की कोशिश कर रही थी ।

उस घर में नीरजा का बोलबाला है वह जो कहती है वही होता है यह उस घर का नियम समझ लीजिए ।

विशाल ने भी बता दिया था कि घर की शांति के लिए तुम माँ की बात सुना करो । इसलिए वह भी हर बात सास से पूछ कर करने लगी । उसके रिश्तेदार सब सामने कहते थे नीरजा तुझे तेरे लायक़ बहू मिली है पीछे हँसते थे बिचारी को गूँगी बना दिया है । सुहानी माँ बनने वाली थी नीरजा उससे फिर भी काम कराती यह कहकर कि काम करते रहने से डिलीवरी होने में दिक़्क़त नहीं होगी ।

एक दिन सब डायनिंग टेबल पर बैठे हुए थे नीरजा ने सुहानी से कहा अंदर से और रोटी बनाकर ले आ शायद ये कम पड़ेंगी ।

सुहानी अंदर गई बहुत देर हो गई वह नहीं आई तो नीरजा रसोई में गई तो देखा सुहानी नीचे बैठी हुई थी । सुहानी को इस तरह बैठे हुए देख कारण बिना पूछे उस पर बरसने लगी । मैंने भी चार बच्चों को जन्म दिया है , ऐसे नाटक मत कर चल उठ काम कर कहा ।

सुहानी ने धीरे से कहा कि मुझे चक्कर आ रहा था इसलिए मैं बैठ गई थी । वहीं विशाल था उसने कुछ नहीं कहा सुहानी को इस बात का ज़्यादा बुरा लगा । वह धीरे-धीरे उठकर दूसरे काम देखने लगी ।

उस दिन हुआ यह था कि नीरजा बाथरूम में गिर गई थी….  चोट तो उसे नहीं आई थी । विशाल ने ही देखा था उसको उठाकर कमरे में लिटाया  स्प्रे लगाया और वहाँ से चला गया ।

इस बात पर नीरजा को ग़ुस्सा आया और विशाल से कहा जिसके ऊपर बीतती है , उसे पता चलता है , दर्द क्या होता है ? तुमने मुझसे कुछ नहीं पूछा यहाँ बिठाकर जा रहे हो ।

 विशाल ने कहा माँ उस दिन सुहानी की हालत भी ख़राब थी जैसे आपने कहा जिसपर बीतती है , वही जान सकता है कि दर्द क्या होता है । उस दिन आप सुहानी से कह रहीं थीं कि नाटक मत कर मैंने भी चार बच्चों को जन्म दिया है । विशाल की बात पर नीरजा की आँखें नीची हो गई उसे अपनी गलती का एहसास हुआ ।

#आँखें नीची होना

के कामेश्वरी

Leave a Comment

error: Content is protected !!