“ कितनी बार कहा है निकुंज मुझे तुम ये वक़्त बेवक्त लाल गुलाब का फूल या गुलदस्ता लाकर मत दिया करो…. ।”राशि निकुंज के हाथों को झटकते हुए बोली जो बड़े प्यार से उसके लिए लाल गुलाबों का गुलदस्ता लेकर आया था
“ वो क्या है राशि …जब भी ऑफिस से आते वक़्त….ट्रैफ़िक सिग्नल पर गाड़ी रूकती है कुछ छोटे बच्चे फूल , गुलदस्ते बेचने चले आते हैं उन्हें देख बिना लिए रहा नहीं जाता … मैं इतने प्यार से लाता हूँ और तुम नाराज़ हो जाती हो…. शादी के बाद इतना कौन करता होगा…. दूसरे कभी ऐसे अपनी बीबी को दे तो वो खुश हो जाए पर तुम …।”निकुंज ग़ुस्से में गुलदस्ता मेज पर रख कमरे में जाकर बैठ गया
राशि निकुंज के लिए चाय बनाने के लिए चली गई…..
गैस की लौ पर चाय ज्यों ज्यों उबल रही थी वो अतीत को याद कर सिहर रही थी…..किसी तरह खुद को संयत कर चाय लेकर निकुंज के पास गई जो अभी भी ऑफिस के कपड़ों में ही बैठा था
“ सॉरी निकुंज …. पता नहीं मुझे क्या हो जाता है…. कोशिश करूँगी ऐसे रिएक्ट नहीं करूँ….।” राशि निकुंज को मनाने की कोशिश करने लगी
“ राशि कोई बात है मन में तो कहो….कोई क़िस्सा कोई हादसा कुछ तो जुड़ा है उससे जो तुम एकदम से ग़ुस्सा करने लगती हो…।” निकुंज जो बहुत देर से राशि के इस तरह के व्यवहार को लेकर सोच रहा था पूछ बैठा
“ निकुंज ये गुलदस्ता मुझे मेरे पापा की याद दिला देता है…..जानते हो …. उनका एक्सीडेंट भी उसी गुलदस्ते की वजह से हुआ था…. मुझे आज भी याद है…. उस दिन मम्मी का जन्मदिन था…. पापा ऑफिस के काम में भूल गए….जब घर आए तो वो भी ख़ाली हाथ ….हम सब इस इंतज़ार में थे कि पापा केक लेकर आएँगे और हमें बाहर खिलाने ले जाएँगे…..
मम्मी भी पापा के भूल जाने से बहुत नाराज़ हो गई थी….. फिर पापा किसी तरह मम्मी को मनाएँ और हम सब बाहर खाना खाने गए….. जब खाकर घर की ओर आ रहे थे तो सड़क की दूसरी ओर एक फूल वाले का दुकान देख कर पापा कार रोक कर बोले अभी आता हूँ…. ये कह कर वो सड़क के उस ओर चले गए…
.जब वो गुलाबों का गुलदस्ता लेकर आ रहे थे तो उनकी नज़र गुलदस्ते पर थी और हमारी नज़रें पापा की ओर ….तभी हमने देखा सामने से एक ट्रक तेज़ रफ़्तार से आ रहा था और पापा जल्दी जल्दी सड़क क्रास करने में लगे थे और बस वो ट्रक…… हम सब कार में से उन्हें हटने को कह रहे थे….
मम्मी जल्दी से निकल कर उनकी ओर भागी पर उसके पहुँचने से पहले ही हमारी दुनिया उजड़ चुकी थी….. हमारे घर में उसके बाद कभी कोई फूल नहीं आया निकुंज…. ऐसा लगता है उसकी वजह से ही पापा हम सब को छोड़ कर चले गए।” कहते कहते राशि फफक पड़ी
“ सॉरी राशि….. अब समझ आया तुम इतना ग़ुस्सा क्यों करती हो….. मैं तो सोचता था पत्नी खुश हो जाती फूल पाकर पर तुम तो….. अब से नहीं लाऊँगा…. जो चीज़ देख तुम्हें दुख हो वो काम कभी नहीं करूँगा ।” राशि को सीने से चिपका निकुंज ने कहा
बहुत समय तक फिर निकुंज कभी कोई फूल लेकर नहीं आया….
कभी-कभी सेवा करवाने के लिए बीमार होने का दिखावा करना पड़ता है – दिव्या सोनी : Moral Stories in Hindi
राशि ये बात एक दिन अपनी माँ से कर रही थी तब उसकी माँ ने कहा,“ बेटा मानती हूँ वो हादसा हम सब के जीवन में दुख लेकर आया था…. पर अब तेरे जीवन में प्यार के पलों को आने दे…. ज़िन्दगी भर ये सोच कर फूलों से नफरत करना कहाँ तक सही है….. दामाद जी की ख़ुशी भी तो देखा कर….
सच में किसका पति अपनी बीबी को फूल या गुलदस्ता बिना किसी अवसर के देता होगा…. अपने जीवन की ख़ुशियों को देख मेरी बच्ची….. उन फूलों की वजह से अपने दिल में उपजी नफ़रत की दीवार को गिरा दे …. फूलों से प्यार करना सीख … ठीक है तेरे पापा उसकी वजह से चले गए पर ये भी तो देख जाते जाते भी अपने प्यार के लिए फूल को ही चुने…..
तुम दोनों के बीच एक दूसरे की पसंद को … प्यार को जगह दें ….फूलों से नफ़रत को वजह नहीं…..तुम दोनों को खुश देखकर पापा भी खुश होंगे ये क्यों नहीं सोचती… तुम्हें दुखी देखकर वो खुश तो नहीं होते होंगे ।”
राशि माँ की बात समझने की कोशिश करने लगी…. और फिर उसने धीरे-धीरे ही सही अब उसे भी फूलों से नफ़रत की जगह प्यार होने लगा था … अपने पसंद के पसंद को स्वीकार करने लगी आखिर प्यार में फूलों की खास जगह जो होती है ।
दोस्तों बहुत बार हम किसी चीज को किसी हादसे से जोड़ कर हम अपने उपर इस कदर हावी कर लेते हैं कि बाद में अच्छे पलों का आनंद लेने से चूक जाते हैं ।
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धन्यवाद
रश्मि प्रकाश
#नफरत की दीवार