भाभी की चिट्ठी – गीता वाधवानी

 यह मैं क्या सुन रहा हूं, बड़े भैया अपनी साली ज्योति से शादी कर रहे हैं? 

 छोटे भाई सौरभ ने बड़े भाई दीपेश को फोन लगाया और पूछा-” भैया लोग यह क्या बातें कर रहे हैं, क्या सचमुच आप ज्योति से शादी कर रहे हो? ” 

 दीपेश ने कहा -हां! 

 सौरभ -” (सौरभ की भाभी का नाम लता था) भाभी के गुजरने पर जब मैं आया था तब तो आपने कुछ नहीं बताया था और फिर अब ऐसे अचानक, और अभी तो भाभी को गुजरे दो महीने पूरे भी नहीं बीते हैं। ” 

 दीपेश -” तू नहीं समझेगा, रह नहीं पा रहा हूं अकेला, तू भी तो यहां नहीं है। ” 

 सौरभ -” भैया भूल गए क्या, अपने ही तो छोटी सी बात पर धक्के मार कर घर से निकाला था। तब भाभी कितना रोई थी। कह रही थी राजीव और सौरभ में कोई फर्क नहीं है, दोनों मेरे बेटे हैं। पर आप किसी की सुनते कहां है। शायद आप पूरी जायदाद लेना चाहते थे, इसीलिए मुझ पर चोरी का झूठा इल्जाम लगाकर मुझे घर से निकाल दिया। ऐसे ही मांग लेते, तो मैं सब कुछ दे देता। ”       गीता वाधवानी दिल्ली

 दीपेश-” नालायक, बातों ही बातों में मुझे लालची बता रहा है। बाबूजी ने सब कुछ तो लता के नाम कर दिया था। शादी में बुला रहा हूं, आना है तो आ वरना तेरी मर्जी। ” 

 सौरभ ने पहले कुछ साल हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की और फिर दूसरे शहर में जाकर नौकरी करने लगा अपनी भाभी से हमेशा फोन पर बात करता था और भाभी भी उसे फोन करती रहती थी। लता भाभी उसे हमेशा अपने पास बुलाती थी पर वह जाता नहीं था। अपने बेटे राजीव को उसकी छोटी सी उम्र में भाभी ने उसे खो दिया था। 

 एक दिन राजीव स्कूल से आया, तब वह 12वीं कक्षा में था। कहने लगा सर में बहुत दर्द हो रहा है। दर्द की दवाई खाकर कुछ देर सो जाता हूं। दवाई खाकर वह सो गया और फिर कभी जागा ही नहीं। 

 बेचारी भाभी तब से बीमार रहने लगी। एक बार हार्ट अटैक भी आ चुका था। तब सौरभ बहुत रोया था। 

       एक दिन लता भाभी ने फोन करके सौरभ को कुछ ऐसी बातें बताएं कि सौरभ के होश उड़ गए। 

 उसने कहा-” भाभी मैं कल आता हूं और भैया से बात करता हूं। ” 

 भाभी ने उसे बात करने से मना कर दिया और कहा कि अगर किसी दिन मुझे कुछ हो जाए तो तुम मेरे वकील रामनाथ जी से जाकर मिलना और वह भी तुम्हें फोन करेंगे।    गीता वाधवानी दिल्ली

 इस बात को होने के लगभग 6 महीने के भीतर भाभी गुजर गई। सौरभ के पास वकील रामनाथ का फोन आया। सौरभ उनसे मिलने उनके ऑफिस गया। वकील ने उसे कुछ प्रॉपर्टी के कागजात दिखाएं और एक वीडियो दिखाया। कागजात के साथ भाभी ने सौरभ के नाम एक चिट्ठी लिखी थी। 

 लता भाभी ने लिखा था-” मेरे बेटे सौरभ, सारे कागज ध्यान से पढ़ना और मेरा एक वीडियो है उसे भी देख लेना, सबूत के तौर पर काम आएगा। तेरे भैया का बहुत समय से मेरी बहन ज्योति के साथ अफेयर चल रहा है। जब राजीव मेरा प्यारा बच्चा 11वीं में पढ़ता था लगभग तभी से। उन दोनों को लगता है कि मुझे कुछ पता नहीं है लेकिन मैंने कई बार छुपकर उनकी बातें सुनी थी। वह मुझसे अस्पताल के कागज के बहाने जायदाद के कागज पर हस्ताक्षर भी करवाना चाहते थे। ज्योति दिखावा करने के लिए कुछ दिन चली जाती थी और फिर आ जाती थी। मेरे मना करने पर भी मानती नहीं थी। 

 पर बाद में वे लोग शायद घर से बाहर मिलने लगे। फिर राजीव मुझे छोड़ कर चला गया। मैं टूट चुकी थी और इन दोनों को देखकर बिल्कुल टूट गई। तब इन दोनों को ज्यादा मौके मिलने लगे। तेरे भैया ने तुझे भी घर से निकाल दिया। मैं बिल्कुल अकेली हो गई। 

 अब कुछ दिनों से लग रहा है कि मेरा जीना मुश्किल है। मैं इन दोनों को सबक सिखाना चाहती हूं। अब जो करना है, आगे तुम्हें ही करना है। ” 

 सौरभ समझ गया था कि उसे क्या करना है। 

 वकील से कागज और वीडियो क्लिप लेकर सौरभ दीपेश की शादी में पहुंचा। ज्योति बहुत इतरा इतरा कर फोटो खिंचवा रही थी। उसे अपनी बहन का कोई गम नहीं था। शादी हो गई। 

 अगले दिन सुबह दीपेश ने सौरभ से कहा-” तुम कहते हो ना, कि तुम्हें जायदाद में कुछ नहीं चाहिए, तो इन कागजों पर चुपचाप साइन कर दो और सब कुछ छोड़कर चले जाओ। तुम्हारी भाभी ने सब कुछ मेरे नाम कर दिया है, सिर्फ तुम्हारे साइन चाहिए। ” 

 सौरभ -” पहले आप यह तो देखिए” 

 ऐसा कहकर सौरभ ने विल वाले कागज उसकी ओर बढ़ाए। तब तक वकील साहब भी आ चुके थे। दीपेश ने कागज खोलकर देखा उसमें लिखा था अगर मेरे पति दीपेश मेरे मरने के 1 साल के अंदर शादी कर लेते हैं तो उनका प्रॉपर्टी पर कोई हक नहीं रहेगा। मैं यह प्रॉपर्टी सौरभ के नाम करती हूं। दीपेश और उनकी पत्नी को घर से निकाल दिया जाए। ” 

 दीपेश और ज्योति के पैरों तले जमीन खिसक गई। दोनों चिल्लाने लगे कि कागजात नकली है। असली कागज हमारे पास है। 

 दीपेश तुरंत कागज ले आया और वकील साहब को दिखाने लगा। वकील साहब मुस्कुरा रहे थे। 

 उन्होंने कहा -“कि कागज देखने की जरूरत आपको है मुझे नहीं” 

 दीपेश ने फाइल खोलकर ध्यान से देखा तो उसमें प्रॉपर्टी के कागज नहीं थे बल्कि उसमें अस्पताल के कुछ कागज लगे हुए थे और नीचे लता की साइन थी। लता ने साइन कर दिए इस खुशी में दीपेश ने कागजात पर ध्यान ही नहीं दिया था। 

 फिर थोड़ी देर में वह चिल्लाने लगा कि तुम्हारे कागज असली होने का क्या सबूत है। 

 तब वकील साहब ने वीडियो क्लिप दिखाई जिसमें लता अपनी विल पर साइन कर रही थी और साथ ही दो गवाह और भी थे जिन्होंने साइन किए थे। 

 दोनों को धोखा देने का फल मिल चुका था। फिर एकाएक दोनों सौरभ के सामने गिड़गिड़ाने लगे कि हमें इस घर में रहने के लिए एक कमरा दे दो। सौरभ के मन में दया उमडी। 

 उसने मन में सोचा तो उसे लगा कि उसकी भाभी बहुत रो रही है और उदास है। तब उसने उन दोनों को वहां से जाने के लिए कह दिया और उन दोनों को वहां से अपना सा मुँह लेकर जाना पड़ा। 

 स्वरचित अ प्रकाशित गीता वाधवानी दिल्ली 

#ऐसी भाभी सबको मिले

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