षड्यंत्र – गरिमा जैन

भाभी मेरे लिए चाय बना दीजिए और साथ में पकोड़े भी

अच्छा छोटी आप चलिए मैं अभी बनाती हूं 

अरे यह आपके चेहरे को क्या हो गया ? दिखाइए जरा ।

कुछ नहीं ,कुछ नहीं !

यह कैसा निशान है चेहरे पर?

कुछ नहीं मैं फिसल कर गिर गई थी 

भाभी मैं छोटी बच्ची नहीं हूं फिसल के गिरने पर ऐसा निशान कभी नहीं पड़ता ।क्या भैया आप पर हाथ उठाते हैं ?

अरे छोटी ,यह सब तो होता ही रहता है गृहस्थ जीवन में ,अब यह सब छोटी-छोटी बातें मैं किसको बताऊं !

छोटी-छोटी बातें ,आपको मार खाना छोटी बात लगती है । अगर मेरा पति मेरे ऊपर हाथ उठाने की कोशिश करें तो मैं उसे जेल की हवा खिला दूंगी ।

अरे छोटी आप भी तो बहुत कष्ट उठा रही है अपने ससुराल में, तभी तो सबको छोड़कर आप यहां आ गई ।

कष्ट, कष्ट की कोई बात नहीं है भाभी ,बस मन नहीं मिल पाता है मेरा उन लोगों से ।मेरे ऊपर हाथ उठाना तो दूर  इन्होंने कभी घूर  कर भी मुझे नहीं देखा ।

अच्छा छोटी तब तो जीजा जी बहुत अच्छे होंगे ।

बहुत अच्छे हैं भाभी मेरी सारी बात भी मानते हैं लेकिन कभी-कभी वह मेरी बात को टाल देते हैं, बस इसी बात पर हमारी लड़ाई हो जाती है।

बात टाल देते हैं जैसे..

जैसे भाभी मुझे हीरे का एक कान का बहुत सुंदर डिजाइन लगा । मैंने उनसे कहा कि मुझे वह चाहिए ,अब अमीर घर में शादी हुई है तो उसका कुछ तो फायदा हो ।इन्होंने टाल दिया, बोले दिवाली पर देखते हैं। 

बस इतनी छोटी सी बात !

इसे आप इतनी सी बात कहती हैं ?मैं जानती नहीं क्या कि मेरी सास हर महीने कितना खर्च करती है और मेरी देवरानी, वह तो हजारों  की शॉपिंग एक बार में करके आती है ।तो मैं क्यों पीछे रहूं । मैं गरीब घर की लड़की हूं इसीलिए ,मुझे कुछ खरीद के दिया नहीं जाएगा !जब तक मुझे वह हीरे का टॉप्स नहीं मिलेगा मैं ससुराल वापस नहीं जाऊंगी ।

छोटी ,जैसी आपकी मर्जी ,यह बात छोड़िए ।

भाभी आप यह बताइए क्या आपने  मम्मी को यह बात बताई कि भैया आप पर हाथ उठाते हैं ?

अरे छोटी लीजिए ,बात बात में आपकी पकौड़ी भी बन गई और चाय भी ।आप चलिए ,मैं बचे हुए पकोड़े लेकर आती हूं।

ठीक है भाभी लेकिन मैं चुप नहीं रहूंगी ।मैं मम्मी और भैया से इस बारे में बात जरूर करूंगी।

 मम्मी यह लो भाभी ने चाय और पकौड़े बनाए हैं ।

अच्छा ,खैर तुम्हारी भाभी खाना तो ठीक-ठाक ही बनाने लगी है ।छोटे घर की लड़की लाने से यह तो फायदा है । ज्यादा खर्च भी नहीं करवाती और काम भी चुपचाप मुंह बंद के करके करती है।

मम्मी यह तुम किस तरह की बातें कर रही हो आज ,पहले तो तुमने इस तरह की कोई बात नहीं की ।छोटे घर की लड़की ,अमीर घर की लड़की ,यह सब क्या होता है ।

क्यों विम्मो क्या तुम्हारी सास तुमसे इस तरह बात नहीं करती? तुम भी तो छोटे घर की लड़की हो !

मम्मी तुम यह कैसे बातें कर रही हो !मेरी सास तो कभी भी इस तरह की बातें मुझे नहीं करती कि मैं छोटे घर से आई हूं, हां कभी-कभी मैं अटपटी से जिद जरूर कर लेती हूं और जिद्द करके मायके भी आ जाती हूं लेकिन मुझे कभी किसी ने ससुराल में यह ताना नहीं दिया कि मैं गरीब घर की लड़की हूं इसीलिए मुझे ज्यादा काम करना चाहिए या फिर मुझे खर्च नहीं करना चाहिए।

वाह विम्मो तब तो तेरे ससुराल वाले बड़े अच्छे हैं !

लेकिन मम्मी क्या तुम भैया को कुछ नहीं बोलोगी ?

अब भैया की बात कहां से आ गई ,वह बेचारा तो चार दिन के लिए दिल्ली गया है ।

तुम्हें मालूम है मम्मी भैया ने भाभी को मारा है कल रात… उनके चेहरे पर काले निशान पड़ गए हैं ।

तो उसने भी मुंह लगाकर बहस की होगी ..

मम्मी तुम यह कैसी बात कर रही हो !अगर भाभी ने बहस कर भी दी तो क्या भैया उन्हें मारेंगे?

हां मार भी सकता है अगर जरूरत से ज्यादा मुंह चलाएगी तो मार खायेगी ही ।यह सब बात छोड़ो ,वह देखो तुम्हारी भाभी और पकोड़े लेकर आ गई।

मम्मी तुम उनसे पूछोगी नहीं इतनी चोट कैसे लगी ?

नहीं मैं नहीं पूछूंगी ।

(छोटी चुपचाप पकौड़ी खाने लगी लेकिन उसके मन में जैसे हजारों सवाल उठ रहे थे ,उसने अचानक मोबाइल उठाया और अपने भाई को फोन लगा दिया ,फोन की पूरी घंटी बज गई लेकिन भाई ने फोन नहीं उठाया । छोटी ना जाने मन में क्या-क्या सोच रही थी ।तभी मोबाइल की घंटी बजी उसे लगा उसके भाई ने उसे फिर से कॉल किया है लेकिन कॉल तो उसके पति का था ।पति का कॉल देखकर उसकी आंख से जैसे आंसू छलक गए। उसे वह सारी बातें याद आ गई जो उसने घर छोड़ते वक्त अपने पति से कही थी ।कितना उटपटांग उसने बोला था और उसके पति ने उसे कुछ भी नहीं कहा था 

हेलो क्या कर रही हो ..

कुछ नहीं ,भाभी पकोड़े बनाकर लाई है वही खा रहे हैं।

वाह तुम वहां पकौड़े खा रही हो और मेरे गले से अन्य का एक दाना भी नीचे नहीं जा रहा ।मुझसे  बहुत बड़ी गलती हो गई ,तुम्हें वह हीरे के टॉप्स मैं जल्द ही खरीद दूंगा ।बस मुझे कुछ दिन का समय दे दो।

संजय, मुझे माफ कर दो।

विम्मो यह क्या कह रही हो ।

मुझे माफ कर दो संजय ,मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई ।मुझे हीरे के टॉप्स नहीं ,तुम्हारा साथ चाहिए, प्यार चाहिए। 

विम्मो यह तुम कैसी बहकी बहकी बातें कर रही हो ।भाभी ने पकौड़ों में कुछ मिला दिया है क्या,?

मैं मजाक नहीं कर रही आप भी मेरे बचपने पर मुझे डांट नहीं सकते थे !

मैं तो तुमसे ऊंची आवाज में बोल भी नहीं सकता ,मैं तुमसे इतना प्रेम जो करता हूं 

बस करिए अब रुलाएंगे क्या !

तो बताओ कब लेने आ जाऊं ।

आपने तो कहा था जैसे जा रही हो वैसे ही आ जाना मैं लेने नहीं आऊंगा

वाह, तो क्या गुस्सा करना सिर्फ तुम्हारा हक है ?मैं गुस्से में कुछ नहीं बोल सकता ! वह तो मेरे मुंह से गुस्से में निकल गया था लेकिन तुम्हारे बिना यहां दिल नहीं लगता, बताओ कब लेने आ जाऊं 

भैया दो दिन के बाद दिल्ली से आ जाएंगे वही मुझे छोड़ने आ जाएंगे 

नहीं विम्मो दो दिन नहीं मैं आज शाम को ही तुम्हें लेने आ रहा हूं और मैने आज रात की पिक्चर की दो टिकट भी ले ली है ,दोनों मिलकर पिक्चर देखेंगे ,फिर बाहर खाना खाएंगे ।मैंने मम्मी से बात भी कर ली है 

उन्होंने क्या कहा?

वह कहां कुछ कहती है ,उन्होंने कहा जैसा तुम्हारा मन

ठीक है मैं भी अभी मम्मी जी से बात कर लेती हूं मैं उन्हें भी कुछ-कुछ उल्टा सीधा बोल दिया था ।एक बार उनसे माफी मांग लूँ 

विम्मो अपनी सास को फोन मिलाने लगती है और विम्मो की माँ और भाभी  किचेन में खाना बनाने चली जाती हैं ।

अरे बहू तुमने तो बहुत अच्छा षड्यंत्र रचा

 षड्यंत्र नहीं मम्मी जी इसे तरकीब कहते हैं 

अरे हां वही ,अब यह जो मेकअप करके चेहरा काला किया है इसे करें रहना जब तक दामाद जी जाकर विम्मो को ले ना जाये

हां मैने तो जीजाजी से पहले ही बात कर ली थी उन्होंने मुझे सब कुछ बता दिया कि कैसे छोटी, बच्चों की तरह थोड़े-थोड़े दिन पर किसी गहने की जिद्द लेकर बैठ जाती है ।जब तक वह गहना बन नहीं जाता वह ऐसे ही मायके आ जाती है, मुझे यह सब ठीक नहीं लगा इसीलिए मैंने आपसे यह तरकीब बताई और नाटक करने को कहा आपने भी सारे डायलॉग अच्छे से याद कर लिये ,हालांकि इनको इस बारे में कुछ नहीं पता!

 कोई जरूरत नहीं अमित से कुछ बताने की । जब तक वह दिल्ली से आएगा विमला अपने ससुराल जा चुकी होगी ।

हां मम्मी बात तो आपने ठीक कही तो फिर खाने में क्या बना लूं 

दामाद जी आएंगे ,पनीर की सब्जी ,खीर ,पूरी और सूखे आलू बढ़िया रहेंगे ।

(पीछे से विमला हस्ती हुई आ रही थी, मम्मी मेरी सास बहुत अच्छी है और तुम्हारी बहू भी बहुत अच्छी है ।उसकी कद्र करना और उसे कभी छोटे घर का बोलकर उसकी बेजती मत करना ।

तीनों सास बहू और बेटी गले मिलकर खूब जोर-जोर से हंसने लगी। इस तरह से बहू की सूझबूझ से और तरकीब से एक बेटी का घर उजड़ने से बच गया …सच भाभी हो तो ऐसी।

                                                       लेखिका

                                                      गरिमा जैन

#ऐसी भाभी सबको मिले

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