नंदिनी और पूनम आपस में घनिष्ठ सहेलियाँ । दोनों का एक-दूसरे के बिना गुज़ारा नहीं था। नंदिनी के पिता शहर के जाने-माने वकील थे और पूनम के पिता एक मुनीम। घर में माँ और एक भाई रवि था। घर की आमदनी कम और खर्च ज्यादा था, इसलिए कई बार नंदिनी पूनम की फीस भर देती, उसके लिए कपड़े दिलवा देती। जब भी पूनम नंदिनी के घर आती, नंदिनी की माँ मनोरमा उसकी खूब खातिर करतीं।
नंदिनी का भाई नितिन भी लंदन में लॉ की पढ़ाई कर रहाथीं था। वह जब भी भारत आता, पूनम के लिए भी कोई न कोई उपहार जरूर लाता। पूरा परिवार पूनम को नंदिनी की तरह ही प्यार करता था।
पर इतना प्यार और अपनापन मिलने के बाद भी पूनम के मन में नंदिनी के लिए एक अनजानी-सी जलन थी। उसे लगता था कि नंदिनी के पास वह सब कुछ है, जिसकी कमी उसे हमेशा खलती रही।
हर कोई नंदिनी की तारीफ करता था।
“नंदिनी कितनी समझदार है।”
“कितनी खूबसूरत और संस्कारी लड़की है।”
“उसका व्यवहार तो बिल्कुल अपनी माँ जैसा है।”
लोगों की ये बातें पूनम के मन में धीरे-धीरे ज़हर घोल रही थीं।
वह मुस्कुराकर सब सुनती, लेकिन भीतर ही भीतर सोचती—
“आखिर नंदिनी में ऐसा क्या है जो मुझमें नहीं? मैं भी तो उसके साथ रहती हूँ। मुझे कोई क्यों नहीं देखता?”
इसी बीच नंदिनी के लिए राजीव का रिश्ता आया।
राजीव शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति का बेटा था। पढ़ा-लिखा, समझदार और शांत स्वभाव का था। उसका परिवार भी अच्छा और संस्कारी था। पहली मुलाकात में ही राजीव को नंदिनी पसंद आ गई।
नंदिनी के घर में खुशी का माहौल था।
मनोरमा ने पूनम को गले लगाकर कहा,
“बेटा, नंदिनी की शादी है, अब तो तुम्हारी जिम्मेदारी है कि तुम मेरी बेटी की तरह उसके साथ रहना।”
पूनम मुस्कुरा दी।
“आंटी, आप चिंता मत कीजिए। नंदिनी मेरी सबसे अच्छी सहेली है। उसकी खुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ।”
लेकिन उसके मन में कुछ और ही चल रहा था।
राजीव की एक मुलाकात के बाद पूनम ने पहली बार उसे अकेले देखा। राजीव ने भी उसे नंदिनी की सहेली समझकर सामान्य बातचीत की। पूनम को महसूस हुआ कि राजीव उससे भी प्रभावित हो रहा है।
उस रात पूनम सो नहीं पाई।
उसके मन में एक खतरनाक विचार आया—
“अगर राजीव नंदिनी का नहीं रहा तो?”
उसने तुरंत अपने मन को समझाया—
“नहीं… मैं ऐसा नहीं कर सकती। नंदिनी ने मेरे लिए इतना कुछ किया है।”
लेकिन लालच और जलन ने दोस्ती पर धीरे-धीरे जीत हासिल कर ली।
कुछ दिनों बाद पूनम ने राजीव से अकेले मिलने का बहाना बनाया।
उसने कहा,
“राजीव, मुझे आपसे कुछ जरूरी बात करनी है। शादी से पहले आपको नंदिनी के बारे में कुछ जानना चाहिए।”
राजीव चौंक गया।
“नंदिनी के बारे में? क्या हुआ?”
पूनम ने झूठी चिंता का चेहरा बनाकर कहा,
“मैं नहीं चाहती कि बाद में आपको कोई परेशानी हो। नंदिनी उतनी सीधी नहीं है, जितना आप समझते हैं।”
राजीव ने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया।
“तुम उसकी सहेली हो। फिर ऐसी बातें क्यों कर रही हो?”
पूनम ने कुछ झूठी तस्वीरें और पुराने संदेश दिखाए, जिन्हें उसने बड़ी चालाकी से गलत अर्थ देकर राजीव के सामने रखा था।
राजीव के मन में संदेह पैदा हो गया।
उधर नंदिनी अपनी शादी के सपनों में खोई हुई थी। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसकी सबसे करीबी सहेली उसकी खुशियों की नींव हिला रही है।
धीरे-धीरे राजीव नंदिनी से दूर रहने लगा। उसके फोन का जवाब कम देने लगा और मिलने से भी बचने लगा।
नंदिनी परेशान होकर पूनम के पास पहुँची।
“पूनम, पता नहीं राजीव को क्या हो गया है। वह मुझसे ठीक से बात ही नहीं कर रहा।”
पूनम ने उसे गले लगाते हुए कहा,
“तुम ज्यादा मत सोचो। शायद शादी का तनाव होगा।”
नंदिनी ने अपनी सहेली पर पूरा विश्वास करते हुए सिर उसके कंधे पर रख दिया।
“तू है ना मेरे साथ?”
पूनम ने उसकी पीठ थपथपाई।
“हमेशा।”
लेकिन यह “हमेशा” सबसे बड़ा झूठ था।
कुछ दिनों बाद राजीव ने नंदिनी से शादी करने से इनकार कर दिया।
घर में जैसे तूफान आ गया।
नंदिनी के पिता ने बहुत कोशिश की, लेकिन राजीव अपने फैसले पर अड़ा रहा। उसने सिर्फ इतना कहा,
“माफ कीजिए, मैं इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ा सकता।”
नंदिनी टूट गई।
जिस सहेली को वह अपनी बहन से भी बढ़कर मानती थी, उसी के सामने बैठकर वह रो रही थी।
“पूनम, आखिर मुझसे ऐसी कौन-सी गलती हो गई?”
पूनम ने उसे सीने से लगा लिया।
“रो मत नंदिनी… मैं हूँ ना।”
लेकिन उसी रात पूनम के फोन पर राजीव का संदेश आया—
“क्या हम मिल सकते हैं?”
पूनम के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
उसे लगा उसकी चाल सफल हो गई। कुछ दिनों में राजीव ने पूनम से शादी कर ली। पूनम हवा में उड़ रही थी मुझे सब मिल गया।अब मैं राज करूंगी। राजीव और पूनम विवाह के बाद घूमने चले गए।
नंदिनी की हालत खराब थी उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो गया था और जब उसने सुना पूनम और राजीव ने शादी कर ली तो वो और टूट गई।
नंदिनी के पिता एक अनुभवी वकील थे।
उन्होंने राजीव के परिवार से हुई बातचीत और सामने आई बातों की तहकीकात शुरू कर दी। कुछ ही दिनों में उन्हें पता चला कि राजीव को भेजी गई तस्वीरें और संदेश छेड़छाड़ करके बनाए गए थे।
जब सच सामने आया तो नंदिनी के पिता ने पूनम से सीधे सवाल किया।
“ये सब किसने किया?”
पूनम के चेहरे का रंग उड़ गया।
नंदिनी सामने खड़ी थी। पूनम
सच बता दो मेरी बहन।मैंने तुम पर कभी शक नहीं किया। लेकिन आज मैं तुमसे जवाब मांग रही हूं। पूनम चुप रही। नंदिनी रोने लगी और बोली मैंने तुम्हें अपनी बहन माना । तुमने मुझे ही लूट लिया। तुम मुझसे कहती तो सही मैं खुद राजीव से तुम्हारी शादी करवा देती ।
पूनम आखिरकार टूट गई।
“क्योंकि… मुझे तुमसे जलन होती थी।”
नंदिनी स्तब्ध रह गई।
“जलन?”
“हाँ,” पूनम रोते हुए बोली, “तुम्हारे पास सब कुछ था। प्यार, पैसा, सम्मान… और अब राजीव भी। मुझे लगा जिंदगी में पहली बार मुझे भी कुछ ऐसा मिलना चाहिए जो तुम्हारा हो।”
नंदिनी ने दर्द भरी आवाज़ में कहा,
“पूनम, मैंने तुझे कभी अपने से कम नहीं समझा। तुझे जो मेरा था, उसमें हिस्सा दिया… लेकिन तूने मेरे विश्वास को ही छीन लिया।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
राजीव ने भी पूनम से सारे संबंध खत्म कर दिए। और उसे तलाक दे दिया।उसे अपनी गलती का एहसास तो हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
कुछ समय बाद राजीव ने नंदिनी से माफी माँगी और पूरी सच्चाई उसके सामने रखी। नंदिनी ने उसे माफ कर दिया।
वर्षों बाद एक दिन पूनम नंदिनी के घर आई।
दरवाजे पर खड़ी होकर उसने कहा,
“क्या तुम मुझे माफ कर सकती हो?”
नंदिनी कुछ देर उसे देखती रही।
फिर बोली,
“माफ तो मैंने तुम्हें उसी दिन कर दिया था, जिस दिन तुमने सच स्वीकार किया था। लेकिन पूनम… माफी और विश्वास एक चीज नहीं होते। माफी देने में एक पल लगता है, लेकिन टूटा हुआ विश्वास दोबारा बनाने में पूरी जिंदगी भी कम पड़ सकती है।”
पूनम की आँखों से आँसू बह निकले।
उस दिन उसे समझ आया कि उसने नंदिनी से सिर्फ उसकी खुशियाँ छीनने की कोशिश नहीं की थी—
उसने उस इंसान का विश्वास तोड़ा था, जिसने उस पर सबसे ज्यादा विश्वास किया था।
और विश्वासघात का दर्द किसी भी दुश्मनी से ज्यादा गहरा होता है।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी