निलेश एक आदर्श बेटा था।जिसके परिवार में मां मीना पिताजी राजेश एक बहन पूनम और भाई राहुल थे।निलेश अपने पूरे परिवार में श्रवण कुमार के नाम से प्रसिद्ध था। मां का लाडला ।मां बाप की बात सुनने और मानने वाला कभी उनके सामने जबान नहीं खोली।
सब कहते मामा बॉय है ये हर बात में यही कहता जैसे मम्मी कहे।इसलिए MBA कर उसने पिता का ही बिजनेस संभाला।भाई बहनों का ध्यान रखता।सब की आँखों का तारा था।अब निलेश के लिए लड़कियां देखी जा रही थी।निलेश की मां और बहन रिश्ता देखती कोई लड़की उन्हें जचती ही नहीं थी किसी में ये कमी है तो वो कमी है हर जगह बात टूट जाती।
राजेश कहते भगवान ऐसी कौन सी लड़की की तलाश में हो तुम । अरे मुझे बहु ऐसी चाहिए जो मेरे श्रवण कुमार जैसी हो जो मैं कहूँ वो करे । नहीं तो आज कल की लड़कियां आते ही पति को अपनी मुट्ठी में कर लेती है।आज निलेश का 28 वा जन्मदिन था उसकी नानी का फोन आया कब शादी कर रहा है। नीलेश बोला नानी आप मां से ही पूछो।
ज्यादा मां मां मत करा कर अपनी भी कोई पसंद ना पसंद है कि नहीं नानी बोली अच्छा सुन तुझे सुमन याद है अरे वो शर्मा जी की बेटी जिसके साथ तू खेलता था और कहता था इसी से शादी करुंगा।सुमन बहुत सुलझी हुई और समझदार लड़की है पढ़ी लिखी है बच्चों को अकाउंट्स पढ़ाती है घरदारी में अव्वल उसी से तेरा रिश्ता करूंगी जा अपनी मां को फोन दे।
मीना मैने निलेश के लिए लड़की पसंद की है कौन मां मीना बोली अरे शर्मा जी की बड़ी बेटी सुमन बहुत सुलझी और अच्छी लड़की है गाय है तो तुझे तेरे बेटे के दूर होने का भी डर नहीं समझी अगले हफ्ते आजा बात चलाती हूं तेरे भरोसे बैठी तो मेरा बेटा बूढ़ा हो जाएगा।मीना बोली ठीक है मां अगले हफ्ते हम आते है।
अगले हफ्ते सब सुमन के घर पहुंचे छोटा सा घर था ये देख ही मीना का माथा ठनका बोली मां कहा ले आई हो तू चुप कर जब बच्चे एक दूसरे को पसंद करते है तो हम कौन होते हैं तारीख पक्की कर ही नानी और मामा उठे।घर आकर मीना ने बड़ा शोर मचाया बड़ा श्रवण कुमार बनता था खुद ही चक्कर चला लिया।
नहीं मां वह तो नानी ने कहा था मैं आपकी बात कैसे टाल सकता हूं। प्लीज मां मुझे माफ कर दीजिए यदि आप कहेंगे तो मैं मना कर दूंगा। हां मेरी मां के सामने मेरी बेइज़्ज़त ती करवाना ताकि वह और भाई कहीं कि मेरी बात नहीं मानी। आने दो महारानी को देखती हूं 2 महीने बाद शादी हो गई और सुमन निलेश कीजदगी में आ गई।
निलेश बचपन से ही सुमन को बहुत पसंद करता था। इसीलिए इस विवाह पर वह बहुत खुश था और उसे पता था कुछ समय के बाद मन भी मान जाएगी और सुमन उसे अपना बना लेगी। पर यहां पहले दिन ही मीना ने सुमन के खिलाफ मह।ज़ छेड़ दिया।
घर का सारा काम सुमन करती और नीलेश के सामने यह दिखाई की वह सुमन से कितना प्यार करती है और निलेश के पीछे वह सुमन का जीना मुहाल करके रखती। सुमन की सेहत गिरती जा रही थी लोग कहते हैं शादी के बाद खुशी से लड़कियां फूलती हैं उन पर निखार आता है पर यहां दिन पर दिन सुमन की तबीयत गिर रही थी।
आखिर निलेश ने इस बात का पता लगाने का फैसला किया वह शाम को एक डॉक्टर के पास सुमन को लेकर गया डॉक्टर ने बताया कि इन्हें कोई मानसिक परेशानी है इसी कारण उनकी सेहत गिर रही है आप इनका ध्यान रखिए इनका वजन भी काम हो गया है और चेहरा पीला पड़ गया है।
निलेश बहुत परेशान था कि वह क्या करें उसने सुमन से सारी बात पूछें पहले सुमन ने कुछ नहीं बताया पर बाद में वह टूट गई और उसने बताया कि मां उसे कितना परेशान करती है सारे घर का काम करवाती है। उसे तो नौकरानियों की तरह रखती है।कामवाली के सामने भी उसके पिता को गालियां देती है कि बिना दहेज के मेरे घर आ गई मेरे बेटे को फंसा लिया।
मेरी मां को उसके बाप ने और उसने घोलकर कछ पिला दिया। जिसकी वजह से मेरी मां ने मेरे बेटे को फंसा दिया। मैं इसका तलाक करवा के अपने बेटे की दूसरी शादी करूंगी मेरा बेटा मेरी सुनता है।मेरी बात जरूर मानेगा। सुमन रो पड़ी मै मर जाऊंगी आपके बिना ।पिताजी ने अगर मेरी तलाक का सुना तो वो मर जाएंगे मेरे सिवा उनका कौन है।
निलेश बोला तुम चिंता मत करो मै हूँ ना।अगले दिन निलेश ने घर में बताया कि मीटिंग के सिलसिले में उसे बेंगलुरु जाना है सुमन ने उसकी पैकिंग की पर वो डरी हुई थी सहमी हुई थी।
निलेश बोला मुझ पर विश्वास करती हूं ना तो सब ठीक होगा निलेश निकल गया और मीना अपने रंग में आगई। सुमन को बोली निकल यहां से निलेश 2 दिन के बाद आएगा तेरा पत्ता यहां से साफ हो जाना चहिए। अब तू इस घर में नहीं रहेगी। मां मैं कहां जाऊंगी।।
आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रही हैं। तूने मेरे बेटे को फंसा कर उससे शादी की । नहीं माँ यह गलत है नानी रिश्ता नहीं थी। निकल यहां से तू यहाँ नहीं रहेगी। मीना ने सुमन का हाथ पकड़ कर उसे धक्का दिया सामने निलेश खड़ा था।मां आप ये क्या कर रही है यह मेरी पत्नी है बेटा ये चोर है देख रुपए चुरा रहीं थी मैने पकड़ लिया ।
किसी से फोन पर छुप कर बात भी करती है इसे छोड़ दे तेरी दूसरी शादी करूंगी सुंदर और अच्छी लड़की लाऊंगी पैसे वाली भी फिर उसे भी ऐसे ही तंग करना।ये क्या कह रहा है सही कह रहा हूं मां यह मेरी पत्नी है उसके मान सम्मान की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है जैसा मै आपका करता हूं और मैं अपनी पत्नी का बार बार सहन नहीं करूंगा।
नानी और मामा आपने देख लिया अपनी आँखों से पापा आप ने भी देख लिया अब आप लोग बताइए कि मुझे क्या करना चाहिए।सुमन मुझे माफ करदो मेरी वजह से तुम्हे ये सब सहना पड़ा।मै अब सुमन के साथ यहाँ नहीं रहूंगा।देख लिया मीना तुमने कितना समझाती थी मै की बेटे को थोड़ी आजादी दो वो तुम्हारा सम्मान करता है
तुमने उसका दिल दुखा दिया जो हमेशा तुम्हारे सम्मान में खड़ा रहता था तुम्हारी बात नहीं टालता था तुम उसकी एक खुशी सहन नहीं कर पाई।
मीना तुम्हारा बेटा तुम्हारे कारण जा रहा है रोको उसे तुम इतनी निष्ठुर तो नहीं हो बिन माँ की बच्ची को माँ सा प्यार दो बच्चों को रोक लो राजेश बोले तब तक निलेश सुमन को ले आया बोला मां हम जा रहे हैं क्योंकि मैं आप के खिलाफ एक अपशब्द नहीं बोल सकता ना ही आपका अपमान कर सकता हूं इसी प्रकार सुमन का भी दिल मै नहीं दुखा सकता ।
मीना बोली बेटा रुक जा मै गुस्से में अंधी हो गई थी मुझसे ये बर्दाश्त नहीं हुआ कि तूने किसी को खुद पसंद कर लिया सिर्फ इसीलिए बेटी मुझे माफ करदो मै अपने एक छत्र राज्य में किसी और को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी।तुम घर छोड़ कर मत जाओ मै अपनी भूल की माफी मांगती हूं और वादा करती हूं कि मैं सुमन को बेटी की तरह रखूंगी और प्यार दूंगी।
आप सब मुझे एक मौका दीजिए।नानी बोली यदि आज के बाद सुमन को कोई तकलीफ हुई तो याद रखना मै खुद आकर बच्चों को ले जाऊंगी हमेशा के लिए।मीना ने बच्चों के लिए खुद को बदला और बच्चों ने मां को बदलने का मौका दिया।सुमन की तबियत में सुधार हुआ।
3 महीने बाद सुमन निलेश और मीना डॉक्टर के पास गये डॉक्टर बोली वाह सुमन तुम्हारी तबियत तो बहुत अच्छी हो गई है जी सासू मां का प्यार है निलेश बोला डॉक्टर ने टेस्ट किए बोली चलो आप लोगों को और बधाई मुझे शक था इसीलिए मैने टेस्ट करवा लिया आप दादी बनने वाली है।
मीना बहुत खुश हुई और अपनी बहु को प्यार किया।घर आ कर अपनी मां को फोन कर बताया मां अपनी बेवकूफी में मैं अपना सब गंवाने वाली थी पर ईश्वर ने समय से मेरी आंखे खोल दी।निलेश के मन में आज संतोष था कि वो मां और बीवी दोनों के साथ इंसाफ कर पाया।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी