नलिनी एक स्कूल में अध्यापिका थी।सुंदर सलोनी जो देखे वो उसे पलट कर जरूर देखता।इतनी सुंदर होने पर भी 30 वर्ष तक उसका विवाह नहीं हुआ।सभी पूछते पर वो क्या उतर देती घर में मां पिताजी थे एक बड़ा भाई विवेक था उसकी पत्नी आनंदी थी
पर भाई भाभी अपनी ही दुनिया में मस्त थे दिन भर ऑफिस लेट आना फिर एक बेटा मोहित जिसे दिन रात मां सावित्री ही देखती ।पिताजी एक किराने की दुकान के मालिक थे।वो सुबह 9:00 बजे जाते और 9:00 ही वापस आते।तो दिन भर घर में कोई होता ही नही था।नलिनी भी सुबह 7:00 बजे निकलती फिर 4:00 बजे घर में घुसती।
मां जब तब शादी की बात करती पर नलिनी कोई जवाब नहीं देती इसी परेशानी से बचने के लिए उसने एक दो ट्यूशन पकड़ ली।उसे स्कूल में भी कहा गया कि होम ट्यूशन कर ले पर उसने सिरे से इनकार कर दिया।इसलिए वो शाम को घर पर ही 8 10 बच्चों को ट्यूशन पढ़ा देती थी।
यही दिनचर्या थी कई बार आनंदी विवेक को कहती भी तुम्हारी बहन 30 की उमर में ही बुढ़िया है क्या किसी से बात नहीं करती कुछ नहीं इतनी सुंदर है इसके रिश्ते की बात चलाये।विवेक बोला एक दो जगह बात की थी इसी ने मना कर दिया।आनंदी अपने पड़ोस के लड़के रवि को ट्यूशन पढ़ाती थी।
एक दिन उसे लेने उसकी मां की जगह उसका मामा आदित्य आया।आनंदी ने रवि से पूछा यह कौन है? उसने कहा मेरे मामा है दुबई में होते हैं कुछ दिन हमारे पास आये है? आदित्य ने नलिनी को देखा उसे वह बहुत पसंद आई। अब आदित्य ही रवि को लेने और छोड़ने आता।
रवि को भी आनंदी अच्छी लगती थी।घर आये तो आदित्य ने पूछा इसकी ट्यूशन टीचर देखने में तो इतनी सुंदर है फिर उसकी शादी क्यों नहीं हुई?अरे पता नहीं लड़का देख तो रहे हैं संजोग नहीं जुड़ रहे हैं।आदित्य की बहन वैशाली चाय लाते हुए बाहर आ कर बोली।
वो शांत ही रहती हैं ज्यादा किसी से बोलती भी नहीं पर छोटी थी तब ऐसी नहीं थी माजी बताती थी कि इतनी चुलबुली थी कि बस पर ये अचानक ही इतनी खामोश हो गई। लड़कियां बड़ी हो जाती हैं तो शांत हो ही जाती हैं।आदित्य जब तक यहाँ था वो ही रवि को लेने छोड़ने आता। परसों वो अपने घर जाने वाला था
अपने माता पिता के पास अजमेर आज जब वो रवि को लेने आया तो लगभग सारे बच्चे जा चुके थे।रवि आदित्य को देख गुस्सा हुआ बोला मामू लेट क्यों हो गए।बेटा ट्रैफिक में फंस गये थे इसलिए चलो आओ तभी बाहर बारिश होने लगी।नलिनी की मम्मी बोली बेटा बाहर बारिश हो रही है।
यही बैठ जाओ बैठो मै चाय बनाती हूं।मां आप बैठे मै बनाती हूं।सावित्री आदित्य से घर बार के बारे में पूछ रही थी वो भी खुश अखलाकी से जवाब दे रहा था।उसने बातों बातों में ये भी बताया कि उसके लिए भी लड़की देख रहे हैं क्योंकि 2 महीने बाद वो दुबई चला जाएगा।
बारिश बंद हुई तो आदित्य और रवि घर आ गए।सावित्री बोली अच्छा लड़का है काश तेरा जोड़ हो पाता।उधर आदित्य घर आया तो वैशाली से बोला दीदी एक बात कहूँ मुझे नलिनी बहुत पसंद है क्या आप उसके लिए मेरा रिश्ता ले कर जाएगी।मै देखती हूं पहले उनसे पूछती हूं
तब तक तू माँ बाबा को कुछ नहीं बताना।ठीक हैं अगले दिन आदित्य चला गया।अब रवि अपनी मां के साथ या मेड के साथ आता ।नलिनी ने पूछ ही लिया तुम्हारे मामा नहीं आते वो बोला वो नानू नानी के पास गये है मेरी मामी लाने।मामी तुम्हारे मामा की शादी हो गई है? नहीं दीदी अभी तो आदि भाई के लिए लड़कियां देख रहे हैं।
अच्छा आज नलिनी का दिल उदास था बच्चे चले गए तो वो सिरदर्द का बहाना बना अंदर अपने कमरे में आ लेट गई।आज उसे अपना अतीत याद आ रहा था जिसके कारण वो इतनी कठोर हो गई थी।उसे भी आदित्य पहली नजर में पसंद आया था पर वो अपने अतीत में खो गई ।
एक चुलबुली घर पड़ोस में सबकी जान थी दादी शारदा तो बहुत चाहती थी उसे उसकी पक्की सहेली आराधना जिसके यहां वो रोज़ जाती थी बचपन से उसके घर उसके माता पिता और वो होते थे उसका भाई महेश जो हॉस्टल में रहता था। नलिनी नई नई सयानी हुई थी दादी और मां समझाते अब किसी के भी घर कम जाया कर और जरा संभल कर पर कहते है
ना जितना संभालो उतना ही बिगड़ता है दशहरे की छुट्टियां थी दिन में दोनो सहेलियां आराधना के आंगन में खेल रही थीं तभी आराधना घर के अंदर पानी लेने गई और नलिनी आंगन में बाहर के दरवाजे से अंदर आते हुए महेश से जा टकराई ।महेश बोला अरे देख के चलो उमर का लड़कपन उसे महेश का यू देखना पसंद आया।
धीरे धीरे उन दोनों की मुलाकाते बढ़ी ।महेश हमेशा कहता तुम्हे अपनी दुल्हन बनाऊंगा।फिर कभो उसके पैरों को छूता कभी हाथों को कभी उसे गले लगाता यह सब नलिनी को भी अच्छा लगता।एक दिन आराधना अपने माता पिता के साथ बाजार गई थी महेश घर में अकेला था उसने बहाने से नलिनी को बुलाया कि आराधना बुला रही है।
शारदा बोली भी की वो क्यों नहीं आई ।वो बोला दादी वो कुछ काम कर रही है ना इसलिए ।नलिनी उसके घर आई अंदर आते ही महेश ने उसे अपनी बाहों में भर लिया और छेड़ छाड़ करने लगा।नलिनी को कुछ अच्छा नहीं लगा वो पीछे हो गई।महेश बोला जानेमन यही तो मौका है एक होने का आओ तुम्हे कुछ दिखाऊं उसने पोर्न वीडियो लगाया नलिनी बोली छी क्या गंद है बंद करो मै घर जा रही हूं और आराधना कहा है।
वो तो माँ बाबा के साथ बाहर गई है इसलिए तो तुम्हे बुलाया है वो पास आने लगा जैसे ही वो उसे निर्वस्त्र कर कुछ कर पाता दरवाजा बजा ।महेश डर गया बोला कौन है तू कपड़े पहन मै आता हूं दरवाजे पर दादी थी ।दादी आप हा नलिनी को भेज उसके पिताजी बुला रहे हैं।नलिनी तो गई वो यह कह रहा था कि नलिनी बाहर आ गई दादी की पारखी नजरों ने सब समझ लिया था वो नलिनी को ले घर आ गई
और उससे पूछा नलिनी अपराध बोध से भर गई और वो चुप हो गई दादी ने समझा इसके साथ कुछ गलत हुआ है।मां पिताजी को कह उन्होंने वो शहर ही बदल दिया पापा को ट्रांसफर के लिए मजबूर कर पिताजी तो वहाँ जाकर महेश को पीटना चाहते थे
पर पड़ोस और बदनामी के कारण दादी ने बात दबा दी।तबसे पापा उससे बात नहीं करते और मां भी लिए दिये ही रहती ।दादी इस ग़म में चल बसी किसी ने उसका हाल नहीं जाना ।तबसे वो खुद को दादी की मौत का ज़िम्मेदार मानती थी और उस घटना के कारण अपराधबोध से ग्रस्त थी।
आदित्य के घर से रिश्ता आया था पिताजी तो कुछ बोले नहीं मा और भाई बोले कब तक हमारी छाती पर बैठी रहोगी।मै शादी नहीं करूंगी ।
आदित्य ने कहा मै एक बार आपसे मिलना चाहता हूं फिर जो आपका फैसला है वो मुझे मान्य है।आदित्य ने जब नलिनी को कुरेदा तो उसे समझ आ गया इसके अतीत में कुछ घटा है जिसके कारण यह चिंतित है।उसने अपने फ्रेंड कुणाल से कॉन्टेक्ट किया जो साइकिएट्रिस्ट था
उसने एस ए फ्रेंड नलिनी से बात की और हिप्टनाइज करके उसके अतीत का राज़ जान लिया जिसमें उसकी तो कोई गलती नहीं थी ना ही उसने ऐसा कुछ किया था जिसके अपराध बोध में वो जी रही थी ।उसकी मां ने बताया दादी का देहांत भी बीमारी के कारण हुआ था।
आदित्य उनके घर आया और उसने सबके सामने ही नलिनी से कहा जिस बात का बोझ तुम अपने सिर पर ले कर घूम रही हो तुमने कुछ नहीं किया है।नलिनी बोली तुम्हे नहीं पता क्या हुआ था।आदित्य बोला मुझे सब पता है और किसी को कुछ बताने की जरूरत नहीं पर मै पक नहीं हूँ।
अब तो बड़ी हो गई हो पता है ना कब कोई पाक नहीं रहता बेवकूफ उसने तुम्हे डराया और तुम डर गई मै सब जान चुका हूं कुछ दिन कुणाल से मेडिसिन लो फिर हम शादी करेंगे।आदित्य की मेहनत और कुणाल के कारण आज नलिनी अपराधबोध और झूठे डर से आजाद हुई आज उनकी शादी थी।
आदित्य उसे छेड़ रहा था मुझे तो आने दोगी पास रवि बोला नहीं ये मेरी मामी है मेरे पास रहेगी।वैशाली बोली नहीं बेटू मामी तो दुबई जाएगी 15 दिन सबके साथ रह वो दुबई आ गए एक नए सफ़र पर खूबसूरत और समझदार जीवन साथी के साथ।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी