तोफे की कीमत नहीं नियत देखी जाती है – लेखिका बबीता झा

अमन और आकाश बचपन के दोस्त थे। सुख-दुख में दोनों हमेशा एक दूसरे के साथ रहते थे। सब उनकी दोस्ती को कृष्ण और सुदामा की दोस्ती मानते थे, क्योंकि अमन बहुत अमीर था। उसके आगे पीछे नौकर चाकर गाड़ी सब रहती थी, और आकाश के घर में उसे दो टाइम की रोटी भी बड़ी किल्लत से मिलती थी।

सुबह के 9:00 बज रहे थे। आकाश घर का सभी काम निपटाकर स्कूल के लिए तैयार हो रहा था। तभी अमन की गाड़ी रुकी। आकाश शोर मचाते हुए अंदर आया और बोला, “जल्दी तैयार हो जा। आज मैं तुझे स्कूल छोड़ देता हूं।” और एक बड़ा सा चॉकलेट का डिब्बा उसकी छोटी बहन रूबी को बढ़ा दिया। अमन रूबी को बहुत प्यार करता था। वह हमेशा रूबी से राखी बंधवाने आया करता था। अमन की अपनी कोई बहन भी नहीं थी।

आकाश की मां को यह सब अच्छा नहीं लगता था। आकाश की मां को कभी-कभी ऐसा लगता था, जैसी कि अमन महंगे महंगे गिफ्ट देकर हम लोगों का अपमान करता है, हमारी गरीबी का मजाक उड़ाता है। इसलिए अमन को बार-बार मना करती, “इतने महंगे गिफ्ट मत दिया करो।” लेकिन अमन के कान पर जूं तक नहीं रेंगती थी।

आकाश अमन से बोला, “भाई, आज तुझे स्कूल नहीं जाना क्या? जो मुझे छोड़ने आ गया है।”

अमन ने कहा, “हाँ, जाना है। लेकिन लेट से। तो सोचा तुझे स्कूल पहले छोड़ दूंगा, फिर जाऊंगा।”

आकाश उसे समझा रहा था कि लोग उसकी इतनी बड़ी गाड़ी से स्कूल जाते देखेंगे तो मजाक उड़ाएंगे। इसीलिए किसी न किसी बहाने आकाश उसके आने से पहले अपनी स्कूल चला जाता था। आज अमन आकाश के घर जल्दी आ गया। अब आकाश क्या करता? अमन की जिद के आगे उसकी एक नहीं चलती थी। फिर दोनों साथ-साथ निकल गए।

उन दोनों को साथ में जाते देख सब की आंखें फटी की फटी रह जाती थी। आकाश को भी अमन की गाड़ी से जाने में खुशी नहीं मिलती थी। वह उसकी गाड़ी में सर झुकाए बैठा रहता था, सोचता, “लोग सोचते होंगे कि इतनी बड़ी गाड़ी में बैठने के लिए ही अमन से दोस्ती की होगी।” लेकिन अमन के आगे कुछ बोल नहीं पाता था।

आकाश को स्कूल छोड़कर अमन अपने स्कूल चला गया। आकाश की स्कूल के दोस्त सोच रहे थे कि आकाश की दोस्ती इतनी अमीर लड़के से कैसे हो गई। आकाश भी इस समय को याद कर रहा था जब उसकी दोस्ती अमन से हुई थी।

बारिश का समय था। मुंबई में तो कभी भी बारिश हो जाती थी। अमन और आकाश बहुत छोटे थे। आकाश अपनी मां के साथ अपने रंग-बिरंगे छाते के साथ स्कूल जा रहा था कि तभी अमन की नजर उसे रंग-बिरंगे छाते पर पड़ी। उसने अपनी गाड़ी रुकवाई और उस छाता को लेने रोड पर आकाश की तरफ दौड़ गया। आकाश को आश्चर्य हो रहा था कि अमन उसकी तरफ क्यों आ रहा है। मां और बेटी दोनों ही अमन की तरफ देख रहे थे। कि तभी एक गाड़ी बड़ी तेजी से उनके पास आ रही थी।

अमन बच्चा था। वह गाड़ी से उतरा और छाता को देखते हुए आकाश की ओर दौड़ने लगा, “मुझे भी वही छाता चाहिए।” मां भी गाड़ी से निकल कर अमन की तरफ दौड़ी। जब तक मां जाती, तब तक गाड़ी आगे से निकल गई। सब शोर मचाने लगी। बच्चों को चोट लग गई। सुनते ही अमन की मां बेहोश हो गई। उसे आकाश की मां ने संभाला। तभी लोगों ने देखा गाड़ी अमन को नहीं, आकाश को ठोक कर चली गई थी। क्योंकि आकाश अमन को बचाने दौड़ा था। भगवान का शुक्र था कि ज्यादा चोट नहीं लगी थी। हाथ में फ्रैक्चर हो गया था।

आकाश को सबने अमन की गाड़ी से उठाकर हॉस्पिटल ले गए। आकाश के हाथों में 3 महीने के लिए प्लास्टर हो गया। ठीक होने पर उसका हाथ थोड़ा टेढ़ा ही रह गया। उसी दिन से अमन अपनी जिंदगी आकाश की देन समझता है। उसी दिन से दोनों की दोस्ती दुनिया की नजरों में मिसाल बन गई।

आकाश आज शाम को स्कूल से थोड़ा लेट आया। मां परेशान हो रही थी। अमन भी आकाश को ढूंढते ढूंढते उसके घर आ गया था कि तभी आकाश घर आ गया और आते ही बिस्तर पर लेट गया। मां ने पूछा, “क्या हुआ? क्यों लेट हो गए? और आते ही बिस्तर पर क्यों लेट गए?”

आकाश बोला, “थोड़ा चक्कर आ रहा था।”

मां बोली, “एग्जाम का समय है। ठीक से खाते पीते नहीं हो तो कमजोरी तो होती ही होगी। इसीलिए चक्कर आ गया होगा।”

तभी अमन बोला, “क्या बात है आकाश? इस बीच में तुम्हें चक्कर ज्यादा आ रहे हैं? सब ठीक है ना? अगर ठीक नहीं लग रहा है तो मैं तुम्हें डॉक्टर के पास ले जाता हूं।”

आकाश बोला, “ऐसा नहीं है। मैं ठीक हूं। तुम लोग परेशान मत हो।”

अमन बोला, “की मां के हाथ का खाना नहीं खाते हो। इसी वजह से चक्कर आ रहे हैं। चलो, मैं भी मां के हाथ का खाना बहुत दिनों से नहीं खाया। दोनों साथ में खाते हैं।”

फिर अमन बोला, “और कुछ दिनों में मेरा जन्मदिन भी आने वाला है। याद है ना? उसमें तुम्हें जरूर आना है।” और खाना खाकर अमन वहां से चला गया।

आकाश जानता था, इस बार अमन नहीं मानेगा। क्योंकि उसका 18वां जन्मदिन था और आज तक आकाश उसके किसी भी जन्मदिन में नहीं गया था। आकाश कोई न कोई बहाना बनाकर टाल देता था। और इस बहाने की वजह उसकी गरीबी थी, वो जानता था कि अमन के जन्मदिन पर सब बड़े-बड़े तोहफे लेकर आएंगे और मैं उसके लिए वो नहीं ला सकता।

कुछ ही दिनों में अमन का जन्मदिन आ गया। आज रविवार है। आज ही अमन का जन्मदिन है। आकाश आज जल्दी ही तैयार होकर घर से निकलने लगा। मां ने कहा, “आकाश, इतनी जल्दी कहा जा रहे हो?

आकाश बोला, “आज अमन का जन्मदिन है। मुझे जल्दी ही घर से निकलना है।”

मां ने कहा, “मैंने दो-चार लड्डू अमन के लिए बनाए हैं। उसे चुपचाप दे देना। उसको मेरे हाथ के लड्डू बहुत पसंद हैं।”

आकाश लड्डू लेकर चला गया। यहां सब लोग आ गए थे। अमन आकाश का इंतजार कर रहा था। “कहां चला गया? अभी तक नहीं आया है। उसके आने पर ही मैं अपना केक काटूंगा। वह जानता है। उसके पास तो फोन भी नहीं है, जो मैं उसे फोन कर पाता कि केक काटने का समय भी हो गया है।”

अमन बार-बार दरवाजे की तरफ देख रहा था कि तभी सामने से आकाश आता हुआ दिखाई दिया। थोड़ा झिझकता हुआ सा। इतने सारे बड़े लोगों के बीच में साधारण से कपड़े में, छोटा सा गिफ्ट हाथ में लिए, पीछे जाकर खड़ा हो गया। अमन ने उसे देखा और दौड़कर उसके पास गया और बोला, “इतनी देर कहां था? मेरे लिए कुछ स्पेशल लाया है क्या?”

आकाश सबके सामने देना नहीं चाहता था। सहमसा वो गिफ्ट को पीछे हाथ करके रखा था। तभी अमन ने उसके हाथों से गिफ्ट का डिब्बा छीन लिया और खुशी होकर बोला, “अरे, यह तो मां के हाथ के लड्डू हैं। और यह क्या है? यह तो वही छाता है जैसे बचपन में मैं तुम्हारे हाथ में देखी थी। इसी की वजह से तो हमारी दोस्ती हुई थी।”

अमन ने उसे खोलकर देखा। तो उसमें दोनों दोस्त का नाम लिखा था। अमन ने कहा, “लेकिन यह तो महंगी होगी। इतना करने की क्या जरूरत थी? मेरे लिए तो मां के हाथ के लड्डू ही मेरा तोहफा था।”

तभी वहां पर अमन की मां आई और आकाश के सिर पर हाथ फेरते हुए बोली, “आकाश, इतना करने की क्या जरूरत थी?”

की तभी एक आदमी आकाश के पास आया और बोला, “आकाश बेटा, तुम यहां हो। तुम्हारे कुछ पैसे बाकी रह गए थे। जब तक मैं तुम्हें देता, तुम वहां से निकल गए थे। तुम्हें यहां देखा तो याद आया।” कहकर उसने आकाश की तरफ कुछ पैसे बढ़ाए।

अमन ने यह देखा तो चौंक गया। बोला, “क्या बात है? अंकल, कौन से पैसे हैं?”

उसे आदमी ने कहा, “कुछ दिन पहले मेरे बेटे का एक्सीडेंट हो गया था। उसको खून की जरूरत थी जो कि कहीं भी नहीं मिल रही थी। और आकाश को पैसे की जरूरत थी। तो उसने मेरे बेटे के लिए अपना खून दिया। उसी के कुछ पैसे बाकी रह गए थे। जब तक मैं इसे देता, तब तक यह आगे निकल गया था।”

सुनकर अमन के पैरों से जैसी जमीन खिसक गई। “इतना कौन करता है!”

अमन ने अपने दोस्त को गले लगाया और बोला, “तुम्हें इतना कीमती तोहफा देने की क्या जरूरत थी!”

अमन की मां ने भी आकाश से कहा, “आकाश बेटा, किसी भी रिश्ते में तोहफे की कीमत नहीं, नियत देखी जाती है। तुम्हें इतना सब कुछ करने की जरूरत नहीं थी।”

अमन की माँ की बात सुनकर आकाश की आँखें भर आईं। वह धीरे से बोला,

“आंटी, मैंने कभी कुछ बड़ा करने के बारे में नहीं सोचा। जो दिल ने कहा, वही किया। दोस्ती में हिसाब नहीं होता।”

अमन ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया और सबके सामने कहा,

“आज अगर कोई सबसे अमीर है, तो वह आकाश है… क्योंकि उसके पास ऐसा दिल है, जो बिना कुछ पाए भी सब कुछ दे सकता है।”

उस दिन पहली बार आकाश को अपनी गरीबी भारी नहीं लगी। उसे लगा जैसे उसकी सादगी, उसकी ईमानदारी और उसका बलिदान ही उसकी असली दौलत हैं।

अमन ने ठान लिया कि आगे की हर खुशी, हर सफलता वह अपने दोस्त के साथ साझा करेगा—बिना किसी ऊँच-नीच के।

लोगों की नज़र में वह दिन अमन का जन्मदिन था,

लेकिन सच तो यह था कि उस दिन दोस्ती फिर से जन्मी थी—

जहाँ न अमीरी मायने रखती थी, न गरीबी…

मायने रखता था तो बस दिल से निभाया गया रिश्ता।

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