सीमा – खुशी

पलक एक खुशनुमा मिजाज की लड़की थी जिसके परिवार में मां मीना पिताजी राजेश दो भाई सुरेश और मगेश उनकी पत्नियां काव्या और सोनिया उनके दो दो  बच्चे ऐसा भरा पूरा परिवार था।पलक में सबकी जान बसती वो भी बड़बड़ करती रहती बच्चों पर जान छिड़कती एक प्यारा परिवार था। माता पिता चाहते थे कि उसका भी रिश्ता किसी अच्छे घर में हो जाए ताकि ये जिम्मेदारी भी पूरी हो जाए।

पलक के लिए राजीव का रिश्ता आया राजीव के परिवार में बड़ा भाई विवेक  उसकी पत्नी सुधा सास ससुर शकुंतला और राकेश और एक ननद आर्या  जो गुजरात में अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी।सब कुछ अच्छा था मां बाप भी यही सोच के खुश थे कि भरा पूरा परिवार मिला तो उसे अकेला पन महसूस नहीं होगा।राजीव it कंपनी में काम करता था गुरुग्राम में जॉब थी।रिहायशी फरीदाबाद थी अपना घर बढ़िया परिवार कमाऊ लड़का माता पिता और क्या चाहते हैं।पलक भी इंटीरियर डिजाइन का कोर्स पूरा कर चुकी थी मास्टर्स उसने इंटीरियर डिजाइन में ही किया था वो एक फर्म में ट्रेनी की तरह काम कर रही थी।

घर के पास रिश्ता मिल गया माता पिता ने चट मंगनी पट ब्याह कर दिया। पलक शादी हो कर आई तो पार्टी हनीमून इन  सब में ही समय निकल गया पर पलक एक बात नोट कर रही थी उसके घर में सब शाम की चाय एक साथ पीते थे।रात के खाने पर पापा सब को साथ ही बिठाते थे। भाभियां भी अकेले काम नहीं करती थी मम्मी और वो पूरी मदद करवाते शाम की रोटी तो पलक ही बनाती ताकि भाभिया भी गरम गरम खाना खा सके। यहां सब अपने कमरों में बंद रहते थे।खाना भी अपने कमरे में खाते कोई किसी से बात ही नहीं करता था। सुबह ससुर राकेश 9:00 बजे जाते तो मेड उनका नाश्ता बनाती वो अकेले नाश्ता कर चले जाते।

जेठ विवेक 11 बजे जाते उनका नाश्ता 11 बजे बनता ।जेठानी सुधा 12 बजे सो कर उठती पहले 6 बजे उठ बच्चों को भेजती फिर सो जाती हमेशा यही कहती सुबह उठ कर मेरे सिर में दर्द होता है।सास शकुन्तला 7 बजे उठती वॉक पर जाती 8 -8:,30 बजे वापस आ कर वाट्स ऐप पर एक्टिव होती ससुर जी के साथ चाय पी तो पी वरना अपने कमरे में सबसे जल्दी राजेश जाता था शादी से पहले उसका नाश्ता खाना बाहर ऑफिस में ही होता था पर जबसे पलक आई वो सुबह जल्दी उठती बच्चों का लंच उनका नाश्ता राजेश का ब्रेकफास्ट लंच सब प्रॉपर और हेल्दी होता बच्चे मयंक और कनिका सुधा से चाची की तारीफ करते मॉम चाची रोज न्यू डिशेज और लंच देती हैं हमारे सारे फ्रेंड बहुत तारीफ करते है।

आप तो लंच में कुछ भी रात का या ब्रेड देते थे चाची देखो रोज नया नया बनाती हैं।राजेश भी तारीफ करता सब मेरे लंच का इंतजार करते हैं कितना टेस्टी बनाती हो। आज शकुन्तला बड़ी परेशान थी इसको उसको फोन लगा रही थी।पलक ने पूछा मम्मीजी क्या बात है? अरे कुछ नहीं श्यामा चार दिन छुट्टी पर जा रही है।खाना कौन बनाएगा? मम्मी डोंट वरी मै बना लूंगी।घर की बहु खाना बनाए खाना बनाने आई हो तुम यहां ।वाट अ नॉनसेंस ।मॉम ये जिस बैकग्राउंड से आती है यही तो बात करेगी सुधा बोली ।

शकुंतला सब जगह फोन कर चुकी थी 4 दिन के लिए मेड अरेंज करना मुश्किल हो रहा था।इसलिए उसने पलक को कहा ठीक है बेटा तुम देख लो फिर 4 दिन खाना तुम्हारी जिम्मेदारी।पलक खुश हो गई ससुर साहब गर्म गरम पराठे और लंच देख खुश । विवेक ने भी कभी इतना अच्छा नाश्ता खाना नहीं खाया था वो भी बहुत तारीफ करता सब लोग खुश थे। राकेश ने तो बोला भी कि पलक अब मै तुम्हारे हाथ का ही खाना खाऊंगा मेरा खाना श्यामा नहीं बनाएगी।श्यामा 6 दिन के बाद वापिस आई तो घर और किचेन का नक्शा बदला हुआ था।

हर चीज जगह पर फ्रिज खाली था ।बासा खाना फ्रीज में नहीं था।श्यामा  राधा और परी जो दूसरी काम वालिया थी उनसे बोली घर को क्या हुआ कुछ नहीं छोटी बहु ने सारा घर सम्भाल लिया है।रसोई साफ सफाई सबका ध्यान रखती है।फ्रिज कितना साफ़ है पहले तो खाना बच जाता था हमारी पार्टी हो जाती थी अब क्या करेंगे।वही तो परी बोली पहले यू ही सामान पड़ा रहता था अब तो ये ध्यान रखती है।देखते हैं क्या होता हैं  । शकुंतला बोली अरे श्यामा तू आ गई चल अपना काम संभाल ले पर राकेश विवेक ने कहा मम्मी हमारा खाना प्लीज़ पलक ही बनाएगी ।राकेश बोले हा बहु के हाथ में जायका है।बच्चे भी बोले चाची इस बेस्ट ।

यह सुन सुधा को गुस्सा आ गया क्योंकि आए दिन विवेक भी उसे सुनाता किट्टी पार्टी में बिजी रहती हो घूमती हो थोड़ा घर पर बच्चों पर ध्यान दो।सुधा पलक से बहुत चिढ़ने लगी थी एक दिन उनके घर में फैमिली डिनर था पलक ने अच्छे से तैयारी की क्योंकि सुधा के मायके वाले भी आए थे सबने तारीफ की विवेक ने सबके सामने बोल दिया हमारा घर तो अब घर लगता है।बाहर का खाना खा कर गैस और पेट में दर्द रहता था परंतु जब से पलक आई बच्चे और हम सबका खाने का हिसाब बढ़िया हो गया।राजेश जी भी बोले हमारी बहु लाखों में एक है घर को जन्नत बना दिया है। आर्या भी आई हुई थी वो भी अपने पिता की बात सुन रही थी क्या मम्मी बहु लाई हो या कामवाली ।

अरे तेरे पापा तो बस मुझे ही बोलने लगे है कि बहु कितना ध्यान रखती हैं मेरा और तुम तुम्हारी दादी आई थी गांव से उनकी भी इतने आगे पीछे थी कि बस ।अरे ड्रामा करती हैं ये इसे आदमियों को रिझाने का बहुत शौक है भाभी आप ये क्या कह रही हैं? सही कह रही हूं तुम्हारा अपना पति है पर तुम दूसरों के पति पर डोरे डालती हो अपने पति को देखो मेरे बच्चों और पति को हथियाने की कोशिश कर रही हो क्या तुम्हारा पति काफी नहीं है? सुधा की मां भी बोली अपनी गृहस्थी संभलती नहीं है दूसरों की नहीं।पलक रोने लगी और अपने कमरे में आ गई। राजेश कमरे में आया बोला नीचे क्या हुआ भाभी चिल्ला क्यों रही थीं।मैने तुमसे कहा भी था दूर रहो सबसे तुम्हे ही अच्छा बनने का शौक था भुगतो।पलक रोती रही और सोचती रही मै कहा गलत थी।

अगले दिन वो अपने मायके आ गई बहुत रोई वो अपनी मां के गले सारी बात कह सुनाई । मां मैंने तो अपना घर समझ सबका ध्यान रखा और इन लोगों ने मेरे ऊपर इतनी गंदी तोहमत लगाई है।मै वहां नहीं जाऊंगी प्लीज़ मां मुझे फोर्स मत करना।उधर राजेश भी पलक को बहुत मिस कर रहा था।पलक उसका कितना ख्याल रखती थी।पापा की रिपोर्ट्स भी नॉर्मल आई थी उनका कैलेस्ट्रॉल , सूगर सब ठीक आया था।वो भी पलक को बहुत याद कर रहे थे।उन्होंने एक दो बार पूछा भी कि पलक कब तक आएगी पर राजेश चुप रहा उनके इसरार पर उसने सारी बात बताई। राजेश ने अपनी मां से पूछा मम्मी पलक को कब लाना है।वो खुद गई हैं हमने थोड़ी निकला है ले आ।

राजेश पलक को लेने ससुराल गया वहां किसी ने इस बात का जिक्र नहीं किया पर निकलते हुए पलक के भाई ने ये जरूर कहा राजेश जी हमारी बहन हमारे लिए अनमोल है और वो चरित्रवान है अगली बात ऐसा नहीं होना चाहिए। पलक घर आ गई पर उसने चुप्पी साध ली अब वो सिर्फ राजेश का काम  करती और उसने अपनी फर्म फिर ज्वाइन कर ली अब वो राजेश के साथ निकली और उसी के साथ आती।राकेश और विवेक सब नोट कर रहे थे पर वो चुप हो गए ।घर में एक अजीब सी शांति थी।पलक ने अपनी सीमा बांध ली थी।

सवाल शाम को उन्होंने राजेश  को मैसेज कर घर के बाहर मिलने बुलाया और कहा बेटा तुम्हारी मां के व्यहवार से मै शुरू से ही परेशान था तुम्हारे दादी बाबा का उसने हमेशा तिरस्कार किया या यूं कहो जवानी और पैसे के नशे में मैने भी ध्यान नहीं दिया।फिर वो सीधे से विवेक के लिए भी अपनी सहेली वंदना की बेटी सुधा को ब्याह लाई जो बिल्कुल उसके जैसी है बेटी को भी यही संस्कार दिए बाहर रह तो वो और जिद्दी और खुदसर हो गई है।तुम कहोगे पापा मुझे सब पता है आप क्यों बता रहे है तो ये इसलिए बता रहा हूं कि पलक के आने के बाद पहली बार मेरी मां इस घर से खुश हो कर गई भर भर आशीर्वाद दिया पहली बार उन्हें लगा मै बेटे के घर आई ।

मैने भी उन्हें समय दिया सिर्फ पलक बेटी की वजह से अब सुनो मैने अपना साथ वाले घर का ऊपर का पोर्शन किरायदारों से खाली करवा लिया है कल से उसने सफेदी शुरू हो जाएगी फिर तुम और पलक वही शिफ्ट हो जाना क्योंकि बेटा चरित्र पर सवाल कोई बर्दाश्त नही करेगा।20 दिन बाद पलक और राजेश अपना सामान ले कर नीचे आए शकुन्तला और सुधा वही बैठे थे।अब ये क्या ड्रामा है कहा चले।राकेश जी आगे आए बोले ये दोनों यहां से जा रहे है।कहा जा रहे है यहां क्या कष्ट है इन्हें।तुम से मै बाद में बात करता हूं तभी वहां सुधा के बच्चे आए और पलक से लिपट रोने लगे चाची चाची हमें छोड़ कर मत जाओ। बेटा इन्हें जाने दो।पलक और राजेश चले गए।राजेश जी थोड़ी देर मे आए ।

शकुन्तला बोली ये क्या तमाशा था।चुप रहो तुमने देखा नहीं बहु ने एक सीमा खींच दी हैं वो इतनी खुश मिज़ाज थी घर को घर समझती थी तुमने क्या किया उसका चरित्र ही दागदार कर दिया क्यों बहु तुम्हे अपने पति पर भरोसा नहीं था कि उससे दस साल छोटी बच्ची के साथ तुमने संबंध जोड़ दिया।घर का काम करने वाली औरत नौकरानी और जो बाहर घूमे नौकर के भरोसे घर छोड़े।वो औरते अच्छी है बहु तुम तो अपने बच्चों से भी लतालुकात हो ।वो अब यहां नहीं आएगी वो अपने पति के साथ ही वहां रहेगी। तुमने ये भी ना सोचा कि मेरी तबीयत उसी की वजह से ठीक हुई तुम रहो अपनी तरह से पर मुझे मेरी बेटी की तरफ जाने से कोई नहीं रोक सकता।

यह कह राकेश चले गया। कुछ दिनों बाद विवेक को प्रमोशन मिला सुधा विवेक बच्चों के साथ बैंगलोर चले गए।अब शकुन्तला अकेली थी राकेश सुबह जाते शाम को आते।बेटी ने भी कहा मै बिजी हूं बार बार कॉल मत किया करो।आज शकुन्तला अपनी गलती पर पछता रही थी पर ये रेखा उसी की वजह से ही हो खींची गई थी।उधर राजेश और पलक अपने घर में खुश थे।उधर विवेक भी सुधा से बात नहीं करता था।कई बार वो और शकुन्तला बात करते मां हमने गलत किया क्या? पर अपनी इगो में कोई भी आगे नहीं जाना चाहता था।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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