विधि का विधान – खुशी

आलेख आलेख मुझे छोड़ कर मत जाओ चिल्लाते चिल्लाते रूही नींद से जागी।मां आलेख कहा है क्या वो आज भी नहीं आया।राम जी बोले श्री क्या हुआ कुछ नहीं आज फिर रूही आलेख के नाम से चिल्ला रही है।बात भी तो बड़ी है अपनी रूही कितनी खुश थी आलेख के साथ शादी तय होने पर सबको देख कर यही लगता दोनो सिर्फ एक दूसरे के लिए बने हैं

कितने खुश थे दोनो उसी बीच राघव का रिश्ता भी रूही के लिए आया ।राघव को भी पहली नजर में छुई मुई सी रूही से प्यार हो गया था राघव की मां मीना राघव का रिश्ता ले कर आई ।राघव के पिता का देहांत बहुत कम उमर में हो गया था तब बिज़नेस राघव की मां उर्मिला और उनके भाई आदित्य ने संभाला था।

पढ़ाई पूरी कर राघव ने मामा के साथ कारोबार को नई ऊंचाई दी।उसने रूही को एक शादी में देखा था तभी उसने रूही से विवाह करने की इच्छा जाहिर की थी परंतु जब राघव का रिश्ता रूही के लिए आया तो रूही की मां ने बताया रूही की सगाई हो गई है और तीन महीने बाद शादी है।

राघव बहुत उदास हो गया। उर्मिला बोली बेटा सैकड़ों लड़कियां है कोई और पसंद कर लो।नहीं मा सैकड़ों है पर रूही नहीं मेरे दिल को छूने वाली इधर आलेख जो पायलट था उसकी और रूही की शादी की तैयारी शुरू हो गई थी।आलेख ने रूही को बहुत शॉपिंग करवाई ।

रूही के दिल में आलेख और आलेख के दिल में रूही बसते थे।रूही और आलेख की शादी का दिन आ गया सब कुछ अच्छे से चल रहा था।शादी हुई और आलेख और रूही यूरोप टूर गए एक महीने बाद वो लौटे और आलेख ने अपनी एयरलाइंस ज्वाइन कर ली।आज आलेख us जा रहा था फ्लाइट लेकर 7 दिन बाद वो लौटने वाला था।

रूही उदास थी इसलिए आलेख ने अपनी मां इंदु से कहा रूही को उसकी मां के घर छोड़ आता हूं ताकि उसका दिल बहल जाए।इंदु और राज बोले ठीक हैं बेटा जैसा तुझे ठीक लगे।आलेख अपने माता पिता का इकलौता बेटा था।उसके पिता राज का बिज़नेस था ऑटोमोबाइल का धनाढ्य संपन्न परिवार था।

आलेख को भी वो कई बार कह चुके थे कि तुम अपना बिजनेस संभाल लो।पर आलेख ने बचपन से पायलट बनने का सपना देखा था।आलेख रात को ही रूही को छोड़ आया।रूही उसके गले लग रो पड़ी।आलेख मत जाओ मुझे छोड़ कर मत जाओ।पागल हो गई क्या मेरी जॉब है मैडम और सात दिन तो यू ही निकल जाएंगे मैं रोज तुम्हे कॉल करूंगा

और जानेमन तुम रोओगी तो मै जा नहीं पाऊं गा।आलेख घर आया और उसके पास अगले दिन का schedule आया उसमें चेंज था। फ्लाइट वाया अहमदाबाद हो गई थी वो पहले दिल्ली से अहमदाबाद आए लोडिंग का काम चल रहा था।आलेख ने रूही को कॉल किया।रूही बोली अपना ध्यान रखना और जल्दी आना i miss u. Me too ऐसा कह कर आलेख ने फोन रखा और अपना फोटो क्लिक कर रूही को भेजी।लोडिंग हो गई फ्लाइट रनवे पर आ गई और उड़ने के लिए तैयार थी।

फ्लाइट उड़ी और 10 मिनट बाद ही वो फ्लाइट मेडिकल हॉस्टल पर जा कर क्रैश हो गया सब तरफ आग का गोला उठ रहा था उधर रूही के पापा 4 बजे ऑफिस से आए उन्होंने न्यूज लगाई तो यही खबर चल रही थी। पायलट्स के फोटो देख राम के हाथ से बैग गिर गया।रूही की मम्मी श्रिया बाहर आई क्या हुआ।टीवी पर आलेख की फोटो देख वो भी घबरा गई।रूही कमरे में सो रही थी

  श्रिया उसके पास गई उसे उठाया रूही रूही उठ क्या हुआ मां आलेख का फोन आया क्या।आलेख कहा है अभी तो मेरे पास बैठे थे।आलेख चला गया सदा के लिए पागल हो गई हो क्या मम्मी क्या बोल रही हो रूही चिल्लाई आवाज सुन राम भी आ गए वो बोले जल्दी चलो आलेख के घर।आलेख के यहां रूही अपने माता पिता के साथ आई वहां का माहोल तो बिल्कुल अलग था

इतनी भीड़ रूही को देख उसकी सास उसके गले लग रो पड़ी बोली रूही अभी खबर नहीं आई बेटा आलेख आयेगा।मां आप लोग क्या कह रहे हैं आलेख अभी मेरे पास बैठे थे जब मां अंदर आई और टीवी पर एक और आग का गोला उठता दिखा और खबर आई कोई नहीं बचा रूही बेहोश हो गई 5 दिन बाद उसे होश आया वहां नर्स खड़ी थी रूही आलेख आलेख चिल्लाने लगी ।

डॉक्टर आई उसे देखा फिर घर वालो को बताया कि रूही होश में आ गई है पर उसे कोई और झटका मत दीजियेगा वो उसके लिए नुकसान दायक हो सकता हैं इसलिए सबने सर्वसम्मति से उसके miscarrige की बात छुपा ली।रूही तब से ऐसी ही थी

दो साल हो गए थे उसे आलेख के गम में उसकी मां भी बीमार हो गई थी।जिंदगी पटरी से उतर गई थी।उधर राघव ने अपनी शादी का इरादा छोड़ दिया था उसकी मां इतना समझती पर नहीं एक बार उनके घर एक पंडित आया राघव की मां उर्मिला ने पूछा मेरे बेटे की शादी कब होगी। बहुत जल्दी और इसी की पसंद की लड़की से राघव वही से गुजर रहा था

बोला मेरी पसंद अब कहा? पंडित जी बोले बेटा ये तो विधि का विधान है तो तय है वो होगा ही उसे कोई नहीं रोक सकता।राघव ने ये सुन रूही का पता करवाया। रूही के साथ क्या हादसा गुजरा यह सुन राघव के पैरों तले जमीन ही खिसक गई।उधर रूही और आलेख के माता पिता की यही कोशिश थी कि रूही अपने जीवन मे लौट आए इसलिए आलेख के पिता ने उसे अपने बिजनेस में लगा लिया।

वो सुबह जाती शाम को कभी अपने घर कभी आलेख के घर चली जाती।आज इंदु की डॉक्टर की अप्वाइंटमेंट थी वही राघव भी अपने किसी दोस्त से मिलने आया हुआ था। रूही को देख राघव आगे आया और दोनों टकरा गए।रूही बोली आप देख कर नहीं चल सकते।

राघव का गार्ड आगे आया मैडम प्लीज़ मेक अ डिस्टेंस नहीं रामभद्र इनकी नहीं मेरी गलती है मै टकरा गया था।रूही आज भी वैसी थी बस मुस्कुराना भूल गई थी।कितनी निश्चल हंसी थी उसकी जिसने राघव को दीवाना बनाया था।राघव ने घर आ कर अपनी मां को सारी बात बताई।

उर्मिला बोली बेटा वो विधवा है मां वो मेरी नियति है इसलिए शायद उसके साथ यह हादसा गुजरा अगले हफ्ते हम उनके घर जाएंगे बात करने।

नहीं घर नहीं पहले मै फोन पर बात करूंगी।उर्मिला ने रूही की मां को फोन किया शादी का सुन वो अवाक रह गई क्योंकि रूही तो आलेख को भूली ही नहीं थी।श्रिया ने ये बात राम से की और फिर वो इंदु और राज के यहां पहुंच गए उन दोनों को सारी बात बताई यह भी बताया कि यह रिश्ता रूही के लिए पहले भी आया था।

राज को तो कोई इंकार नहीं था पर इंदु थोड़ा चीड़ गई थी।मेरे बेटे के जाते ही उसकी पत्नी की शादी के चक्कर में पड़ गए वो मेरे आलेख की अमानत है नहीं इंदु राज बोले रूही की उमर क्या है 24 साल इतनी कम उमर और पहाड़ जैसी जिन्दगी वो अकेले कैसे गुज।रेगी आज हम है कल नहीं उसके पैरों में बेड़ी मत डालो छोड़ दो

उसे आप परसो शाम की मीटिंग फिक्स कीजिए हम चारों उनके घर जाएंगे।राम ने राघव की मां को फोन कर बताया कि हम लोग परसों शाम आपके घर आयेंगे।सब लोग बुधवार शाम राघव के घर थे।राघव की मां और राघव सबसे बड़े प्यार से मिले ।राघव से मिल इंदु और श्रिया का डर भी खत्म हो गया।राघव बहुत सुलझा हुआ लड़का था।

राज ने कहा मै रूही से बात करूंगा अगले दिन सब खाना खा रहे थे तभी श्रिया और राम आए ।मां पापा आप अचानक हा बेटा तेरी याद आ रही थी बस इसलिए सब हॉल में आ बैठे।राज बोले बेटा मुझे तुमसे कुछ बात करनी है बोलिए पापा बेटा हमारी उम्र हो रही है और तुम्हे इस तरह देख कर तो हम और बूढ़े हो गए हैं।

तुम हमारी बात मानो और शादी के लिए हा कर दो।नहीं मै आलेख को धोखा नहीं दे सकती।आलेख चला गया है उसे जाकर भी 2 साल हो चुके है बेटा जाने वाले के साथ जाया नहीं जाता ज़िंदगी एक मौका दे रही है तो बेटा उसे अपना लो कल राघव अपनी मां के साथ आ रहा है तुमसे मिलने तुम एक बार मिल लो।

रूही बहुत बेमन से तैयार हुई तय समय पर राघव अपनी मां के साथ राज के घर आए।बाते हुई रूही आई रूही बोली आप? तुम इन्हें जानती हो। जी ये उस दिन हॉस्पिटल में मिले थे।बेटा तकदीर तुम्हे मिल।ना चाहती है।राघव बोला कोई रूही को प्रेशराइज मत करे ये उसका अपना फैसला होना चाहिए।

राघव बोला रूही मैने अपनी नियति में तुम्हे मांगा है और लिखा है तुम मेरी जिंदगी हो।बाकी फैसला तुम्हारा है जो तुम चाहेगी वही होगा।रूही सोचती रही रात को उसके सपने में आलेख आया अपनी जिंदगी में आगे बढ़ो।मै हमेशा तुम्हारे साथ हूं पर तुम्हारा अतीत हूँ प्लीज़ मुझे आजाद करो तुम मेरे नाम से बैठी रहोगी मैं यही रहूंगा मुझे भी मुक्ति चाहिए मेरी रूही आगे बढ़ो प्रिय ।

रूही उठी आलेख आलेख इंदु भागती हुई आई क्या हुआ बेटा मां आलेख आया था उसने कहा है मुझे आजाद कर दो तुम शादी कर लो मै मुक्त हो जाऊंगा।इंदु और रूही रोती रही अगले दिन राज और राम राघव के घर पहुंचे सारी बातें तय हुई और राघव रूही का विवाह हो गया।राघव ने अपनी मां के अलावा रूही और आलेख दोनो के माता पिता को संभाला ।

राज ने अपना बिजनेस भी राघव को सौंप दिया समय बीता रूही 2 प्यारे बच्चों की मां बनी।आज उनकी शादी को 15 साल हो गए हैं दोनों एक साथ खुश थे। आज घर में पूजा थी वही पंडित जी आए बोले देखा विधि का विधान कोई नहीं टाल सकता ये तेरे भाग्य में थी इसलिए तुझे ही मिली सही कहा पंडित जी आपने वो मेरी किस्मत थी और मुझे ही मिली।

रूही आगई और पूजा शुरू हुई सबके चेहरों पर हंसी थी।रूही के माता पिता संतुष्ट थे कि रूही को अच्छा जीवन साथी मिल गया और वो फिर से मुस्कुरा उठी है।

जीवन परीक्षा लेता है यह सत्य है परंतु विधि का विधान कोई नहीं टाल पाया यह परम सत्य है।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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