सबसे बड़ा धन परिवार होता है और कोई नहीं – मंजू ओमर 

डोरवेल बजी तो अनाया ने दरवाजा खोला सामने डिलिवरी ब्वाय खड़ा था।अनाया ने पिज्जा आर्डर किया था।वो ब्वाय क्या था एक 40,45 साल का आदमी था । कंपनी की टी-शर्ट पहने हुए था , और वो कांप रहा था क्योंकि बाहर ठंड थी और हल्की सी बरसात भी हो रही थी।

डिलिवरी मैन ठंड से कंपकंपा रहा था, बोला मैडम ये आपका आर्डर। हां लेकिन अंकल आप तो ठंड से कांप रहे हैं ,और भीग भी गए हैं ।बाहर ठंड है और आपने कोई गर्म कपड़े भी नहीं पहने हैं । आईए अंदर आइए ये हीटर जला देती हूं मैं इसपर जरा हाथ पैर सेंक लिजिए ।

तब-तक मैं एक कप गर्म चाय बना देती हूं , नहीं नहीं बेटा मुझे देर हो जायेगी मुझे और भी डिलिवरी पहुंचानी है,समय पर नहीं पहुंचाया तो मेरे पैसे कट जाएंगे।अरे नहीं कुछ नहीं होता आप अंदर आइए।अनाया के बार बार कहने पर वो डिलीवरी मैंन अंदर आ गया ।

तभी अंदर से अनुज की आवाज आई अरे अनाया तुम किससे बातें कर रही हो ।अरे अनुज मैंने पिज्जा आर्डर किया था तो वहीं डिलीवरी ब्वाय , ब्वाय क्या वो तो अंकल से लग रहे हैं ।

बाहर बहुत ठंड थी और वो केवल कंपनी की टी-शर्ट पहने हुए थे कोई गर्म कपड़े नहीं पहने थे ठंड से कांप रहे थे ।तो मुझे दया आ गई और अंदर बुला लिया कि एक कप चाय पिला दूं ।और तुम्हारी कोई पहले की जैकेट पड़ी हो तो वो दे दूं बेचारे को ठंड लग रही है।अनाया बोली।

              अनुज उठा और अनाया से बोला अरे अनाया तुम भी न चाहे जिसको अंदर बुला लेती हो । आजकल समय सही नहीं है अकेले रहती हो मत किसी को अंदर बुलाया करो। जानता हूं तुम किसी को मुश्किल में देखकर परेशान हो जाती हो । हां अनुज समझती हूं मैं ,तुम घर पर थे

इसलिए बुला लिया ।तुम जरा बाहर आकर बैठो तब-तक मैं चाय बना देती हूं। अनुज कमरे से बाहर आया तो देखा डिलिवरी मैन हीटर से अपने हाथ सेंक रहा था। अनुज को देखकर घबरा कर उठ खड़ा हुआ।साहब वो मेमसाब ने मुझे जबरदस्ती अंदर बुला लिया, अच्छा मैं चलता हूं ।अरे नहीं नहीं आप बैठे अनाया चाय लेकर आ रही है।

         अनाया चाय लेकर आई तो बैठकर अनुज और अनाया बात करने लगे उस डिलीवरी मैंन से। अनुज ने पूछा भइया आप तो 40,45 साल के लिए रहे हो । ज्यादातर डिलिवरी ब्वाय कम उम के लड़के ही  होते हैं ,इस उम में ये काम क्या मजबूरी है और ठंड है बाहर और आपने गर्म कपड़े भी नहीं पहन रखे हैं।

छोड़िए साहब हर काम इंसान अपनी खुशी से नहीं करता, बहुत से काम इंसान को मजबूरी में भी करने पड़ते हैं। हां वो तो है आपकी क्या मजबूरी है अनुज बोला।घर परिवार कहां है आपका ,आप कहां के रहने वाले हैं ।कौन कौन है आपके घर में बताइए हमें हो सकता है मैं आपकी कोई मदद कर सकूं 

          अनुज और अनाया के बार बार पूछने पर डिलीवरी मैंन ने सकुचाते हुए बताया , क्या बताऊं भैया मेरा भी परिवार है। मम्मी पापा,एक छोटी बहन और एक छोटा भाई है।इस शहर से दूर रहते हैं ।और मैं काम धंधे के चक्कर में यहां दिल्ली में रहता हूं। आफिस में भी काम करता हूं और शाम को डिलीवरी का काम भी करता हूं।

यही पर एक कमरा लेकर तीन लोग साथ में रहते हैं।और इसी तरह से पेट भरने का काम कर लेता हूं।और आपकी तो उम्र हो गई है शादी वादी नहीं करी क्या,तो डिलिवरी मैन चुप रहा। हां भइया आपकी तो शादी की उम्र हो गई है शादी नहीं की अनाया बोली। हुई थी हमारी शादी लेकिन,,,,,।

       एक लड़की से मैं प्यार करता था । शादी करना चाहता था उससे लेकिन वो हमारे धर्म की नहीं थी तो मम्मी पापा नहीं मान रहे थे। मैंने बहुत जिद की कि एक बार लड़की जिसका नाम रीना था , उससे मिल लें । मेरे बार बार कहने पर पापा उससे मिलने को तैयार हुए । रीना से उसके परिवार के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वो मम्मी पापा से दूर रहती है ।

पापा को हमारा बाहर जाकर नौकरी करना पसंद नहीं था तो मैं फिर उनसे दूर रहने लगी । मुझे आजकल ये बड़ों का दिन भर रोकना टोकना पसंद नहीं था इसलिए मैं उनसे दूर रहकर नौकरी करती हूं आजादी से। मम्मी पापा को रीना पसंद नहीं आई  कि उसकी सोच ऐसी है तो कैसे वो परिवार के साथ रह पाएगी।

मुझसे पापा ने कहा लड़की मुझे ठीक नहीं लग रही है फिर आगे तुम्हारी मर्जी।मैं तो रीना के प्यार में पागल था ।और हमने फिर उनकी मर्जी के खिलाफ जाकर शादी कर ली और अलग रहने लगा । पापा ने कहा दिया था कि उसको लेकर घर मत आना।

       फिर घर वाले के विरोध के वावजूद मैंने रीना से शादी कर ली।और मां बाप से अलग रहने लगा। मम्मी पापा ने मुझसे नाता तोड लिया और मैंने भी उनसे कोई वास्ता नहीं रखा।दो तीन साल तो ठीक चला मैं रीना के इश्क में पागल था । फिर मैंने रीना के कहने पर बैंक से लोन लेकर एक फ्लैट खरीद लिया  जिससे किराए से बचा जा सके।

फ्लैट लेने के बाद रीना के हाव भाव में बदलाव आने लगा।एक दिन धोखे से रीना ने एक पेपर पर साइन करवा कर फ्लैट अपने नाम करवा लिया।और जब एक दिन मैं आफिस से घर आया तो देखा रीना किसी लड़के के साथ घर में मौजूद थी ।जब मैंने पूछा कि कौन है ये तो वो बोली मेरा ब्वाय फ्रेंड है

और मैं तुम्हें तलाक़ देकर इससे शादी कर रही हूं क्या , हां । मैंने कहा इतना बड़ा धोखा निकल जाओ मेरे घर से । तुम्हारा घर , तुम्हारा कोई घर नहीं है ये मेरा घर है और मुझे धक्के देकर घर से निकाल दिया।और दरवाजा बंद कर लिया।

       मैं कई बार घर गया अपने पर घर में ताला लगा होता था ।मेरा घर और सारा सामान उसने अपने नाम कर लिया और मैं दर दर भटक रहा था । फिर मैंने अलग से एक कमरा किराए पर लेकर रहने लगा । मुझे प्यार में धोखा मिला मैं अपने आपको संभाल नहीं पा रहा था मेरी नौकरी पर भी असर हो रहा था ‌

कपंनीं में ठीक से काम न कर पाने की वजह से मुझे काम से निकल जाने का नोटिस मिलने लगा ।और आखिर में मुझे काम से निकाल दिया गया ।और मैं काम चलाने के लिए डिलीवरी ब्वाय का काम करने लगा । फिर बहुत कोशिश के बाद मुझे फिर से आफिस में काम मिल पाया क्योंकि मुझे फ्लैट का लोन भी चुकाना था ।दिन रात मेहनत कर रहा हूं साहब ।

इस बीच तुम अपने घर नहीं गए ।किस मुंह से जाता मैं घर साहब । मां बाप की बात न मान कर उनका दिल जो दुखाया था ।पंद्रह साल से घर नहीं गया हूं मैं पता नहीं कैसे हैं मां बाप । तुम्हें कभी याद नहीं आई मां बाप की खूब याद आई लेकिन हिम्मत नहीं हुई जाने की ।

देखिए भाई आपका क्या नाम है किशोर नाम है मेरा , परिवार से बढ़कर कोई भी साथी नहीं होता । मां बाप चाहे जैसे भी हो अपने है ।

वो ज्यादा दिन तक बच्चों से नाराज़ नहीं रह सकते ।आप एक बार जाईए और उनसे माफी मांगिए , देखिएगा आपके मम्मी पापा आपको गले से लगा लेंगे । नहीं साहब मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही है । नहीं भइया आप मेरी बात मानिए एक बार आप जाइए अपने घर।हम लोगों को देखिए लव मैरिज की थी हमने मम्मी पापा नाराज़ थे लेकिन फिर मान गए ।

        अनुज और अनाया की बात मानकर डिलिवरी ब्वाय जिसका किशोर नाम था हिम्मत करके अपने घर गया ।घर पर कालवेल बजाई दरवाजा खुला सामने पापा थे ,इतने साल बाद बेटे को सामने देखकर रोक नहीं पाए खुद को और आंसू आ गए । किशोर ने पापा के पैर पकड़ लिए माफ़ कर दे पापा मुझे , मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गई आपकी बात न मानकर ।

इतने साल आपसे और मम्मी से दूर रहकर बहुत दुख झेले हैं मैंने । पापा ने बेटे को उठाकर गले से लगा लिया ।तब तक मां भी आ गई थी मां ने रोते हुए कहा इतने साल हमारी याद नहीं आई बेटा भूल गया अपने मां बाप को । नहीं मां माफ़ कर दो मुझे गलती हो गई । और किशोर मां के गले से लगकर खूब रोया।

चल अच्छा कोई बात नहीं जो हुआ सब भूल जा ।अब कहीं नहीं जाना हम लोगों को छोड़कर । हां मां ।और फिर जो कुछ भी उसके साथ इतने साल में हुआ सब बताया । पिता ने कांधे पर हाथ रखा कोई बात नहीं बेटा अब हम सब मिलकर तेरे सारे कर्ज चुकाकर तूझे मुक्त करेंगे ।

           परिवार में हंसी खुशी का माहौल हो गया था ।घर आकर पता लगा कि बहन की शादी है सबने मिलकर शादी का आनन्द उठाया ।अब किशोर घर का एक जिम्मेदार इंसान बन गया था। मां बाप और बेटे से नाराज़गी की बर्फ पिघलने लगी गई थी । किशोर अब अकैले नहीं था उसको परिवार का साथ मिल गया था ।

            किशोर ने एक डिलीवरी ब्वाय बनकर अनुज और अनाया से मिले सलाह से अपनी ज़िंदगी सुधार ली ।और उनको धन्यवाद बोला।

      ये सच है यदि आप परिवार का हाथ पकड़कर रहते हैं तो किसी का पांव पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी । परिवार हर मुश्किल में आपका सहारा बंता है । इसलिए  चाहे कुछ भी हो जाए परिवार का साथ कभी न छोड़ें।

मंजू ओमर 

झांसी उत्तर प्रदेश 

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