परिवार का साथ – गीता वाधवानी

” सुनो मानसी, हमारी बिटिया रीना लड़के वालों को बहुत पसंद आई है,अभी-अभी उनका फोन आया था और वे लोग जल्दी ही सगाई करना चाहते हैं। ” मानसी को उसके पति सोमेश ने बताया। 

 मानसी-” अरे वाह! बहुत अच्छी खबर सुनाई आपने, पसंद तो आनी ही थी, हमारी रीना है ही इतनी प्यारी और होशियार। ” 

 सोमेश -” हां सही कहा तुमने, वैसे प्रणव कहां है दिखाई नहीं दे रहा” 

 मानसी-” ट्यूशन गया है आता ही होगा। ” 

 सोमेश-” मैं अभी बड़े भाई साहब और बहन नीलम को यह खुशखबरी सुनाता हूं। ” 

 मानसी-” सबसे पहले अपनी लाडो को तो यह खुशखबरी सुना दो। ” 

 सोमेश रीना के कमरे की तरफ चला जाता है और मानसी फोन करके अपने भाई और दोनों बहनों को भी यह खुशखबरी सुनाती है। 

 रीना का भाई प्रणव 12वीं कक्षा में पढ़ता है। स्वयं रीना कॉलेज में प्रोफेसर है और उसका होने वाला पति पंकज किसी बड़ी कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर है। 

      पंकज के घर वालों ने सगाई में रीना के माता-पिता से कहा-” हमें कुछ नहीं चाहिए, बस आप शादी बढ़िया कीजिए। ” 

 सोमेश ने रीना के 5 साल के होने से लेकर अब तक पैसे जोड़ने शुरू कर दिए थे।वह लड़के वालों की इच्छा से भी ज्यादा बढ़ कर रीना का विवाह करना चाहते थे। उनके बहुत सारे सपने थे रीना के विवाह को लेकर। वह उसे बहुत सारे जेवर भी देना चाहते थे शादी भी धूमधाम से करना चाहते थे और इन सब का बजट जोड़ने के बाद उनका अपना बजट कम पड़ रहा था। 

 शादी में अभी 4 महीने बाकी थे। एक दिन सोमेश को उसके पड़ोसी ने बातों ही बातों में पैसे दुगने करने वाली स्कीम के बारे में बताया। सोमेश ने साफ मना कर दिया। तब पड़ोसी ने उन्हें अपना मोबाइल दिखाते हुए कहा कि “आपको अगर विश्वास नहीं आ रहा है तो अपनी आंखों से देख लीजिए। मैं 2 महीने में 50-50000 जमा किए थे और दोनों बार मुझे एक-एक लाख मिला। यानी की 50000 का दुगना।” 

 सोमेश ने देखा कि हां वह सच कह रहा है। 

 पड़ोसी-” सोमेश जी, अगर आपको अभी भी संदेह है तो मैं आपको इनका ऑफिस का पता भी दे सकता हूं यही थोड़ी दूर पर विजयनगर में ही है और अगर मेरे पैसे डूबते तो मैं आपको क्यों बताता? ” 

 सोमेश ने कहा -” ठीक है सोच कर बताऊंगा। ” 

 अगले दिन उन्होंने पड़ोसी के साथ जाकर स्कीम देने वालों का ऑफिस चेक किया और विश्वास करके 50000 स्कीम में डाल दिए। एक हफ्ते बाद ही उनके अकाउंट में एक लाख जमा हो गया। 

 तब उन्होंने सोचा कि अभी शादी में काफी समय है, क्यों ना मैं पैसे डबल कर दूं और सबको आश्चर्यचकित कर दूं। तब तो शादी भी बढ़िया हो जाएगी और फिर उन्होंने एक बार फिर 50000 जमा किए। इस बार तीन हफ्ते गुजर गए कोई जवाब नहीं मिला। वह सीधा विजयनगर ऑफिस में पहुंच गए। वहां बैठे ऑफिसर ने कहा कि-” कभी-कभी समय लग जाता है, आप चिंता मत कीजिए दो दिन और इंतजार कीजिए वैसे मैं आपको बता देता हूं कि लगभग 1 महीने का समय लगता ही है। ” 

 2 दिन के इंतजार के बाद एक लाख खाते में आ गए। अब सोमेश को पूरा विश्वास हो गया था। उन्होंने अपनी जमा पूंजी 15 लाख में से 12 लाख रुपए स्कीम में लगा दिए। अब उन्हें इंतजार था पैसे डबल होने का। देखते देखते एक महीना बीत गया और खाते में कुछ नहीं आया। उन्होंने पड़ोसी से पूछा पर उसे कुछ पता नहीं था। सोमेश ने ऑफिस में कॉल किया लेकिन फोन नहीं लगा। 

 सोमेश तुरंत ऑफिस पहुंच गए। ऑफिस के दरवाजे पर ताला झूल रहा था। 2 दिन बाद वह फिर से ऑफिस गए, लेकिन ताला उन्हें मुंह चिढ़ा रहा था। आसपास के लोगों से पूछने पर पता चला कि यह लोग तो ऑफिस खाली करके चले गए हैं। वहां सोमेश जैसे दो-तीन और परेशान लोग घूम रहे थे। अब सबको समझ आ चुका था कि उनके साथ एक बड़ा धोखा हो चुका है। 

 सोमेश का चेहरा पीला पड़ गया था और चक्कर आ रहे थे। वह जैसे तैसे ऑटो करके घर पहुंचे। घर जाकर मानसी को पूरी बात बताई तो उसने कहा-” यह तो बहुत बुरा हुआ, जो होना था, सो हो गया। अब मुझे केवल आपकी तबीयत की चिंता है, आप अपनी तबीयत का ध्यान रखिए। भगवान सब ठीक करेंगे। ” 

     सोमेश -” अब शादी कैसे होगी, सिर्फ तीन लाख बचे है। ” 

 मानसी-” मुझे तो यह समझ नहीं आ रहा कि आप इतने समझदार हैं फिर इस जाल में कैसे फंस गए? ” 

 सोमेश-” मानसी, पहले दो बार उन लोगों ने मुझे पैसे दोगुने करके दिए, मैं उनके झांसे में आ गया और सोचने लगा कि पैसे डबल हो जाएंगे तो शादी धूमधाम से हो जाएगी। ” ऐसा कहकर सोमेश रोने लगे 

 मानसी ने कहा-” आप रोइये मत, हम अपने परिवार वालों से बात करेंगे। लड़की की शादी है कोई मदद करने से मना नहीं करेगा और फिर बाद में जब हमारे पास रकम होगी तो हम उन्हें लौटा देंगे। ” 

 सोमेश -” इस सब का जिम्मेदार मैं ही हूं,मैं क्यों लालच में आ गया, भगवान करे यह सब सिर्फ एक बुरा सपना हो। ” 

 लेकिन यह सपना नहीं वास्तविकता थी। 

 मानसी ने अपने जेठ, नंद, अपने भाई और बहनों को पूरी बात बताई। सबने रीना की शादी में सहायता के लिए हां कर दी। सब ने विवाह में दिल खोलकर सहायता की और विवाह सुखपूर्वक संपन्न हुआ। रीना ने अपने होने वाले पति पंकज को भी पूरी बात बता दी थी उन लोगों ने भी अपनी तरफ से कही इंतजाम किए थे। 

 फिर बाद में सोमेश और मानसी धीरे-धीरे पैसे चुकाने में लग गए थे।  उसके जेठ और उसके भाई ने पैसे लेने से मना कर दिया था और कहा था कि रीना हमारी भी तो बेटी है लेकिन मानसी ने अपनी ननद और बहनों को सारे पैसे जबरदस्ती जिद करके लौटा दिए थे। जो मुसीबत में साथ खड़ा रहे वही तो परिवार होता है। इसीलिए कहते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा धन परिवार होता है। पैसा तो हाथ का मैल है। जिसके पास परिवार का साथ होता है वही सबसे धनी होता है। 

 अप्रकाशित स्वरचित गीता वाधवानी दिल्ली

#सबसे बड़ा धन – परिवार

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