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“प्रिया और विकास”, अभी छह महीने पहले ही तो दोनों की शादी हुई है। प्रिया की मां की मृत्यु बचपन में ही हो गई थी पिता के दूसरी शादी करने के कारण दसवीं के बाद की सारी पढ़ाई उसने हॉस्टल में रहकर ही करी थी। अत्यंत आत्मविश्वासी और स्वावलंबी प्रिया ने नौकरी भी हैदराबाद में ही की थी। अभी साल भर पहले ही उसकी यहां दिल्ली में ट्रांसफर हुई थी ।विकास और प्रिया ऑफिस में ही मिले थे, और बिना समय गवांए दोनों शादी के बंधन में बंध गए । विकास के पापा जल्दी दुकान पर जाते थे, इसलिए मानसी को सदा से जल्दी उठकर खाना बनाने की आदत थी। मानसी अब भी सुबह सुबह उठती खाना बनाती, तब तक प्रिया भी आ जाती थी ।रसोई के काम में वह मानसी की सहायता करवाती थी। रसोई के लिए अत्याधुनिक उपकरणों को मंगवा कर और मानसी जी को प्रयोग करना सिखा कर, खुद भी उन्हीं संसाधनों के प्रयोग से,वह घंटो का काम मिनटों में करवा देती थी। प्रिया बेहद अनुशासित और समय की पाबंद थी ,लेकिन विकास अक्सर उसको देर करवा देता था। मेट्रो स्टेशन विकास के दफ्तर से थोड़ा दूरी पर था ,और अगर वह कार से जाए तो पार्किंग की बहुत प्रॉब्लम होती थी। प्रिया ही कार से विकास को ऑफिस में छोड़ते हुए अपने ऑफिस जाती थी। प्रिया के ऑफिस के बाहर उसकी पार्किंग के लिए जगह निश्चित थी। प्रिया विकास को छोड़ कर के भी नहीं जाना चाहती थी, और उसके देरी करवाने की आदत के कारण अक्सर वह झुंझलाते हुए ही घर से बाहर निकलती थी। छुट्टी वाले दिन प्रिया वेक्यूम क्लीनर से पूरा घर साफ करती थी। दोनों की हंसती खेलती हुई आवाज पूरे घर में रौनक फैलाए रहती थी। मानसी को प्रिया से कोई शिकायत नहीं थी।
ऐसे हंसते खेलते खुशहाल परिवार के लिए भी लोगों को कुछ कहने को मिल जाता है। दोपहर को घर के पास रहने वाली उसकी जेठानी जी ने आकर के बिना वजह ही मानसी से सहानुभूति जताते हुए बोला कि देखो सारे लोग बोलते हैं कि तुम्हारी बहू तुम्हारे बेटे को सड़क पर भी डांटते हुए ही जाती है। तुम्हारा बेटा तो बहुुत सीधा है । तुमने तो कभी बहू के कुछ भी पहनने पर रोक टोक भी नहीं लगाई। घर का सारा काम तुम अब भी खुद ही करती रहती हो।मानसी जानती थी कि उनकी जेठानी जी के घर में बहुएं बहुत परंपरागत तरीके से रहती है। घर आए का स्वागत करना ,और अच्छे से अच्छा व्यंजन बनाना भी उनको बखूबी आता था ।मानसी जब भी उनके घर जाती थी तो वह तो अपनी जेठानी जी से बात ही करती रहती थी ,घर का सारा काम बहुत सलीके से उनकी बहुऐं ही करती रहती थीं।,लेकिन ऐसा वह पहली बार नहीं कर रही थी, जब भी उन्हें मौका मिलता था वह मानसी को भड़काने का कोई मौका नहीं छोड़ती थी।
लेकिन आज ना चाहते हुए भी मानसी एक बार तो सोच में पड़ ही गई कि कहीं प्रिया को ज्यादा छूट देकर कोई गलती तो नहीं हो गई। जेठानी जी तो चली गईं, लेकिन मानसी को बिना वजह ही हीनता का एहसास करा गईं।उसे अपना आप ठगा हुआ महसूस हो रहा था। अभी थोड़ी देर तक प्रिया जो उसे दुनिया की सबसे अच्छी बहु लग रही थी अब उसमें कमियां ही कमियां नजर आ रही थी। यही सोचते-सोचते मानसी ने घर में कोई भी काम नहीं किया, और बैठी रही।
शाम को हंसते-हंसते जब प्रिया और विकास आए तो उन्होंने मां को ऐसे बैठी देखा तो प्रिया एकदम घबरा गई ।उसने पूछा “मम्मी आपकी तबीयत तो ठीक है”? जल्दी से प्रिया थर्मामीटर और बीपी की मशीन ले आई। सब कुछ ठीक देखकर मानो उसकी जान में जान आ गई। मानसी के गले लग कर बोली मम्मी लगता है ,आप आज बहुत थक गई हो, आप सिर्फ आराम करो। विकास को देख कर बोली, विकास जल्दी से मम्मी का कमरा सही करो ,मम्मी अपने कमरे में आराम करेंगी,और मैं दूध गर्म करके लाती हूं। मानसी विकास को भले ही जोर से बोल रही थी , पर उसमें कितना अपनापन था, कितनी परवाह थी। मानसी को अपने ख्यालों पर शर्म आ रही थी। जल्दी से प्रिया दूध लेकर आई। मानसी ने कहा “मैं अब ठीक हूं , मैं काम कर लूंगी”तू आराम कर ले, थकी हुई आई है , गाड़ी भी तू खुद ही चलाती है।” क्या करूं मम्मी”? आपको तो पता ही है,” यह कितनी तेज गाड़ी चलाते हैं “आखिर सावधानीपूर्वक घर पर भी तो लाना ही है ना। प्रिया हंस पड़ी। “मम्मी,” मैंने कभी मां को नहीं देखा ,सिर्फ आपको देखा है, आप सिर्फ मेरा कहा मानोगी ,और हिलोगी भी नहीं। थोड़ी देर बाद प्रिया फुलका ,दाल और सलाद मानसी जी के लिए ले आई। दुकान से जब पापा रात को आए ,तो विकास अपने पापा को खाना परोसते हुए उनके साथ बैठा रहा। मानसी जी को खाना खिला कर प्रिया उनके पास बैठे बैठे,” उनके सर को सहला रही थी”, पैरों को दबा रही थी।
जब पापा कमरे में आए तब प्रिया और विकास सोने के लिए अपने कमरे में गए। आज मानसी जी को महसूस हो गया था, उनके बच्चे दुनिया के सबसे अच्छे बच्चे हैं। क्यों भला वे अपने बच्चों की तुलना औरों से करती हैं? उन्होंने प्रण किया’ कि अब मैं किसी की बातों में नहीं आऊंगी। अपने बच्चों के बारे में किसी को राय भी नहीं देने दूंगी ।उनकी बहू सबसे अच्छी है और इस दुनिया में सबसे बड़ा धन परिवार है। वह परिवार में प्रेम को कभी कम नहीं होने देगी।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा
प्रतियोगिता के अंतर्गत रचना
#सबसे बड़ा धन परिवार