सुनो जी, आपसे नकुल के बारे में बात करनी है। ” शारदा जी ने अपने पति सुरेंद्र से कहा।
सुरेंद्र -” हां बोलो, मैं भी कुछ दिनों से उसकी हरकतें नोटिस कर रहा हूं। ”
शारदा-” हां जी, कल मैंने उसके कपड़े धोए तो उसके पैंट की जेब से सिगरेट की डिब्बी निकाली और आज ताश की गडडी। न जाने यह लड़का कौन सी गलत संगत में पड़ गया है। पढ़ लिख कर खाली बैठा है और खाली दिमाग शैतान का घर होता है खाली बैठे-बैठे ना जाने क्या-क्या कर रहा है आप बात कीजिए उससे। ”
सुरेंद्र -” हां आने दो नकुल को बात करता हूं और समझाता हूं। ”
शारदा-” गुस्सा मत करना,प्यार से बात करना, जवान लड़का है। ”
सुरेंद्र-” यही मुसीबत है आजकल के बच्चों की, हम ही हमेशा संभाल कर बात करें। ”
नकुल शाम को घर आया। सुरेंद्र ने उससे बात की तब नकुल ने कहा-” सिगरेट की डिब्बी मेरी नहीं है दोस्त की है और हम टाइम पास करने के लिए ताश खेलते हैं जुआ नहीं। ”
इतना सुनकर भी, पता नहीं क्यों, माता-पिता को कुछ ठीक नहीं लग रहा था। अभी इस बात को सप्ताह भर ही बीता था कि एक रात नकुल घर में चोरों की तरह घुसा और अपने कमरे में जाकर बैठ गया। कहने लगा कोई पूछे तो कह देना कि मैं शहर से बाहर गया हूं और खाना खाने के लिए भी मुझे मत बुलाना मुझे सोना है सोने दो।”
सुरेंद्र और शारदा को चिंता हो रही थी कि आखिर बात क्या है।
सुबह होते ही दरवाजे पर घंटी बजी। सुरेंद्र ने दरवाजा खोला तो दो पुलिस वाले खड़े थे। उन्होंने पूछा-” आपके बेटे का नाम नकुल है, बुलाइये उसे। ”
सुरेंद्र -” जी बुलाता हूं लेकिन बात क्या है? ”
इंस्पेक्टर-” कल रात को जुआ खेलते समय एक लड़के से उसकी तू तू मैं मैं हो गई थी और आपके बेटे ने उसे जान से मार दिया। ”
सुरेंद्र – क्या, नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता मैं पूछता हूं अभी, नकुल नकुल, बाहर आ और सच बता। ”
शारदा-” वह तो कमरे में है ही नहीं मैं अभी-अभी देख कर आई हूं। ”
इंस्पेक्टर-” लगता है आधी रात को ही भाग गया। खैर कब तक बचेगा। एक न एक दिन तो हमारी गिरफ्त में आ ही जाएगा। ”
नकुल माता-पिता के सो जाने पर कुछ कपड़े और अलमारी से पैसे निकालकर भाग गया था।
2 महीने बाद उसके पैसे खत्म हो गए और वह सबसे छुपता छुपाता रात को घर आया और धीरे-धीरे कुंडी बजाने लगा। सुरेंद्र ने दरवाजा खोला और बोला-” नकुल, इतने दिन तुम कहां थे, पुलिस तुम्हें ढूंढ रही है, क्या तुमने सचमुच किसी का खून किया है, पुलिस ने हमारा जीना हराम कर रखा है, हमें तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। ”
नकुल-” बस करो पापा, उपदेश मत दो, मैंने उसे जानबूझकर नहीं मारा था, गुस्से में धक्का दिया और उसका सिर दीवार से जा टकराया और वह मर गया। इसमें मेरी क्या गलती। ”
सुरेंद्र -” तुम्हें कितनी बार समझाया था कि नशे और जुए की आदत से दूर रहो और इतना गुस्सा करने की क्या जरूरत थी और अगर तुम्हारी गलती नहीं है तो तुम पुलिस को सब कुछ सच-सच बता दो और आत्मसमर्पण कर दो। ”
नकुल-” देखो ना मम्मी, पापा कैसी बातें कर रहे हैं, अपने बेटे को जेल भेजना चाहते हैं, तुम जल्दी से मुझे कुछ पैसे दे दो वरना अगर किसी ने खबर कर दी तो पुलिस आ जाएगी। ”
तभी सचमुच पुलिस आ गई और नकुल सीधी से होता हुआ छत से कूद कर भाग गया। ऐसे ही हर बार वह पुलिस से बचता रहा।
एक बार उसने अपनी मां को अपने दोस्त के घर पर बुलाया और कहा कि पैसे लेकर आना। सुरेंद्र ने शारदा को समझाया-” उसका साथ मत दो, उसे पैसे देने मत जाओ, वरना तुम्हें एक दिन पछताना पड़ेगा, उसे आत्मसमर्पण के लिए कहो, उसे समझाओ कि तुम कोई आतंकवादी नहीं हो, बस अपनी गलती मान लो। ”
शारदा ने नकुल को पूरी बात समझाई। लेकिन वह अपनी मां के ऊपर ही चिल्लाने लगा और पैसे लेकर चला गया।
फिर एक महीना चुप कर रहा और एक बार फिर अपनी मां को एक छोटे से कमरे में बुलाया। यह कमरा चौथी मंजिल पर था। शारदा ने वहां पहुंचकर नकुल को फिर से समझने की कोशिश की,नकुल आत्म समर्पण के लिए नहीं माना और वह बात करते-करते खिड़की की तरफ चला गया।ऊपर से उसने देखा कि पापा पुलिस के साथ आए हैं और ऊपर की तरफ आ रहे हैं।
उसने शारदा से कहा-” मम्मी आपने मुझे धोखा दिया है, आपने यह अच्छा नहीं किया। ”
शारदा ने नकुल की बाहँ को कसकर पकड़ लिया और कहने लगी-” सुन तो नकुल, कौन सा धोखा, क्या किया है मैंने? ”
नकुल भाग कर सीढी की तरफ जाने लगा। उसने भागते भागते मां के हाथ को जोर से झटका दिया। शारदा का संतुलन बिगड़ गया और वह एक सीढीसे दूसरी सीढ़ी ऐसे ही लुढ़कते हुए नीचे आ पड़ी। उसका सिर फट गया और खून का फवारा फूट पड़ा।
पुलिस वालों ने नकुल को धर दबोचा। सुरेंद्र ने तुरंत एंबुलेंस बुलवाई। अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर ने शारदा को मृत घोषित कर दिया। सुरेंद्र जी बुरी तरह टूट चुके थे।
कुछ समय बाद सुरेंद्र जी नकुल के पास जेल में गए। नकुल ने उनसे कहा-” पापा, मुझे माफ कर दीजिए, मैंने मम्मी को जानबूझकर धक्का नहीं दिया था। ”
सुरेंद्र जी ने कहा-” शुरू से ही मैं तुम्हें समझा रहा था कि सच बात कबूल कर लो, वह बात तुमने कबूल नहीं की बल्कि एक और गुनाह कर दिया। तुमने अपनी मां को मार डाला। यह गलती नहीं गुनाह है। गलती की माफी हो सकती है लेकिन इस गुनाह की कोई माफी नहीं है। तुम इसी लायक हो। अब मैं तुमसे मिलने कभी नहीं आऊंगा, यही कहने के लिए मैं आज आया था। ”
अप्रकाशित स्वरचित गीता वाधवानी दिल्ली
#इस गुनाह की माफी नहीं