एक रिश्ता ऐसा भी… – तोशिका

मैं कई बार सोचती हूं कि अगर मैं उसको ऐसे बोलती तो शायद आज हमारा रिश्ता ऐसा होता। मैने और मेरी दोस्त रानी ने एक नया क्लब ज्वाइन किया था यही कुछ पांच महीने पहले। वहां का माहौल बहुत उत्सुकता से भरा हुआ था और कई लोगों से हमने बात भी की और उनके बारे में हमें काफी कुछ पता भी चला

और कुछ लोगों से तो एक अच्छी सी दोस्ती भी होगी। पर वहां पर एक लड़का था तो दिखने में तो स्मार्ट था और जो भी लोग उससे बात करने आ रहे थे तो बड़े आराम से बात भी कर रहा था। मैंने और रानी ने उसके पास जाकर बात करने का सोचा। जब हमने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम अनंत बताया। ऐसे ही उसने हमसे हमारा नाम पूछा और फिर हमारी बातें शुरू होगी,

बात करते हुए कुछ ही मिनट हुए थे कि मेरे दिल को यह एक नया रिश्ता अच्छा सा लगने लगा था। फिर क्या तभी हमारे क्लब के प्रेसिडेंट आए और उन्होंने हमें सब समझाया कि क्लब में क्या होता है, क्या रूल्स है और भी काफी चीजें बताई, साथ ही में उन्होंने अनंत को मॉनिटर बनाया क्योंकि उसका क्लब के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी पहले से ही थी।

इसी तरह हमारा क्लब का पहला कक्षा इंट्रोडक्शन में और क्लब के रूल्स समझने में गया। जब क्लास खत्म होने के बाद हम जाने लगे तभी रानी ने अनंत को बुलाया और उसको एक ग्रुप बनाने का सुझाव दिया ताकि सब एक दूसरे से और अच्छे से जुड़ पाए।

अनंत को यह सुझाव काफी अच्छा लगा और उसने एक ग्रुप बनाया। जब मैने अनंत की व्हाट्सएप डीपी देखी तो जा जाने क्यों उसकी आंखों में डूब सी गई कि अचानक रानी का कॉल आया

और हम कल की क्लास के लिए बात करने लगे कि अचानक से रानी ने मुझे अनंत के नाम से चिढ़ाना स्टार्ट कर दिया और मैं बस उसको मना करती रही की ऐसा कुछ नहीं है पर हमारा हसी मजाक यूंही चलता रहा।

फिर अगले दिन रानी तोड़ा लेट आने थी तो मैं अकेली ही क्लास में पांची और जब मैं क्लास में आई तो क्लास की फर्स्ट बेंच पर अनंत अकेले बैठा हुआ था। मैंने उसको जाके हेलो बोला और उससे वार्तालाप शुरू की, उससे बात करते वक्त पता ही नहीं चला कब समय निकल गया और क्लास का समय होता है।

इसी तरह धीरे धीरे हमारी बात बढ़ने लगी और मिनटों से कब घंटों घंटों बात होने लग गई पता ही नहीं चला ऐसे बात करते करते हमें दो महीने हो गए थे और मुझे खबर ही नहीं हुई कि कब ये दोस्ती प्यार में बदल गई थी और अब समझ आ गया था कि यह रिश्ता कैसा है।

अपने प्यार का इजहार करने से पहले मैंने रानी की राई लेनी समझी और रानी ने मुझे बोला कि “क्या तू उसके साथ सैफ फील करती है?” मैंने बोला हा, फिर उसने दूसरा सवाल पूछा “क्या तू श्योर है कि तुम दोनों के बीच इमोशनल स्टेबिलिटी है कि नहीं?

” इस सवाल का मेरे पास न “हा” में जवाब था ना ही “ना” में था। मैं एक सेकंड के लिए सोच पे पढ़ गई , फिर मैंने रानी से पूछा क्या प्यार काफी नहीं है एक रिश्ते के लिए? रानी बोली ” देख मेरे हिसाब से तो हर रिश्ता किसी न किसी वजह से जुड़ होता है पर एक रिश्ता ऐसा भी होता है जिसमें इमोशनल स्टेबिलिटी जरूरी होती है और वो है प्यार का।

अगर वो ही नहीं है तो आगे चलके प्यार जैसे चीजों से भरोसा उठ जाता है।” मैने उसकी ये बात सुनी और उसकी बात से सहमत हुई। पूरी रात उसके बारे में सोचने के बाद मैने अनंत से बात करने का और उसे सब कुछ बताने का सोचा कि मैं उससे प्यार करती हूं।

(आज का दिन)

आज भी मैं जब उस दिन के बारे में सोचती हूं जब मैंने अनंत को अपने दिल की बात बोली थी तो बड़ा दुख होता है कि वो फैसला मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल देगा। ऐसा भी है कि मुझे अपने फैसले से कोई रिग्रेट है, मैं खुश हूं कि मैने वो फैसला लिया बस दुख इस बात का होता है

कि जैसा मैं अनंत से प्यार करती थी उसने वैसा प्यार मुझसे कभी भी किया, उसने मुझे हमेशा से ही एक बहुत अच्छा दोस्त समझा था और वो पहले से ही किसी और से प्यार करता था जो कि अधूरा रह गया जैसे मेरा प्यार अधूरा रह गया। उस दिन समझ आया कि इमोशनल स्टेबिलिटी हम दोनों में थी,

है और हमेशा रहेगी क्योंकि कही न कही एक टूटा दिल दूसरे टूटे दिल को महसूस कर ही लेता है और दोनों के एमीशन बैलेंस कर सकते है। उस दिन के बाद हमने अच्छे दोस्त बने रहने का फैसला लिया पर पता नहीं क्यों उस दिन के बाद से वो पुराना अनंत वैसा न रहा और आज तीन महीने होगे है और हमारी बात अब खत्म सी हो गई है।

अब बस एक मैं हूं और उसकी फोटो जो उसने अपनी व्हाट्सएप डीपी में लगा रखी है। न जाने कब , कैसे वो भी मेरा साथ छोड़ के चली जाए। वक्त के साथ यह एक  बात जरूर समझ आ गई कि एक रिश्ता ऐसा भी होता है जहां आप अकेले हो के भी अकेले नहीं होते या फिर अकेले न होते हुए भी अकेले रह जाते हो।

लेखिका

तोशिका

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