जब हमारा यह मकान बन रहा था तो मैं अक्सर यहां आती रहती थी यह देखने की अब क्या बन रहा है जो बन चुका है वह कैसा लग रहा है या फिर यूं ही मन करता है ना वहां जाने का जहां अब आप जाकर रहने वाले हो ! इस दौरान सोसाइटी के कई लोगों से मेरी जान पहचान हो गई थी।
इन्हीं में से एक चेहरा ऐसा था जिसे देखकर मुझे बहुत अपनेपन का एहसास होता था और वह मुझे वहां अक्सर मिल जाती थी ।औरों से कुछ अलग एक मैक्सिनुमा पोशाक पहनने वाली उस वृद्ध महिला के मुख पर एक सहज मुस्कान बिखरी रहती जो मुझे देखते ही फैल कर चौगुनी हो जाती।
बाद में उन्होंने बताया कि उन्हें भी मुझसे विशेष लगा आपका अनुभव होता था ।हम पांच बहने थी। पांचो में बहुत प्यार रहा । बड़ी दीदी के गुजर जाने के बाद उनकी कमी बहुत खलती थी ।उस महिला को देखकर मुझे ऐसा लगा मुझे मेरी बड़ी दीदी वापस मिल गई है और हम फिर से पांच हो गए हैं ।
मैंने उन्हें बहन जी कहना शुरू कर दिया। एक दिन मैं अपना बनता हुआ मकान देखने गई तो वह वही मिल गई मुझे तुम्हारे मकान का नक्शा इसका इंटीरियर इतना आकर्षित करता है कि मैं लगभग रोज ही यहां आती हूं।फिर वह मुझे अपने घर ले गई और उन्होंने कहा देखो नीलम!यहां तुम्हें दो चीजें बहुतायत में मिलेंगी, एक तो धूप और दूसरे प्यार! मेरे घर में तुम्हारा हमेशा स्वागत है।
उनकी यह बात मेरे दिल को भीतर तक छू गई और 64 वर्ष की आयु में 78 वर्ष की एक महिला से मेरा एक अनोखा रिश्ता बन गया ।वह अकेली रहती हैं पति जवानी में ही परलोक सिधार गए, बच्चा भी कोई नहीं है ।अब तो माता-पिता और छोटे-बड़े भाई बहनों में से भी कोई नहीं रहा।
बस भांजे भांजियां हैं जो कभी-कभी उनके पास आते रहते हैं और हैं उनकी बहुत सारी सहेलियां जिनके साथ उन्होंने जीवन जिया है ।वो अक्सर मुझे अपनी सहेलियों के साथ बिताए समय की कहानियां सुनाती रहती हैं ।मैंने बहन जी को कभी दुखी निराशा या हताश नहीं देखा ।
इस उम्र में भी वह अपने अधिकांश अभी काम खुद करती हैं ।गाड़ी चला कर हाट बाजार भी चली जाती हैं।मैं भी कई बार उनके साथ बाजार गई हूं ।मुझे ड्राइविंग नहीं आती और तब मुझे बड़ी शर्म आती है कि एक वयोवृद्ध महिला गाड़ी चला रही है और मैं बगल वाली सीट पर आराम से बैठी हूं ।
पर उन्हें मेरे साथ जाना अच्छा लगता है और सुविधाजनक भी ।वह ज्यादा चल नहीं पाती अतः वह गाड़ी में बैठी रहती हैं और मैं फटाफट फल सब्जियां तथा अन्य सामान खरीद कर गाड़ी में रखती जाती हूं इसके बदले वह मुझे ढेरों आशीर्वाद देती है और साथ में धन्यवाद भी।
एक बार मेरी नातिन को साइकिल से गिरकर काफी चोट लग गई घर में और कोई नहीं था मैंने ऑटो बुलवाया उसे डॉक्टर के पास ले जाने के लिए ।इसी समय बहन जी बाहर सैर करने निकली थी हम ऑटो का इंतजार कर रहे थे वह बोली रुको,मैं गाड़ी लेकर आती हूं मैं साथ लेकर चलूंगी वह हमें डॉक्टर के पास लेकर गई ,
वहां काफी समय लग गया और वह वहीं रुकी रही और हमें साथ घर लेकर आई। मैंने थैंक यू कहा तो बोली ईश्वर का धन्यवाद है कि मैं तुम्हारी छोटी सी मदद कर पाई। कभी-कभी शाम को वह मेरे पास आ जाती–आज तुम्हारे हाथ की चाय पीने का मन कर रहा था और फिर हम दोनों बैठकर चाय पीते हैं और देर तक बातें करते हैं।
हमारे बहुत से शौक एक जैसे हैं हम दोनों को ही फूल बहुत पसंद है बागवानी का भी शौक है और लिखने का भी !बहन जी बहुत अच्छा लिखती है हिंदी में एचडी है तो भाषा बहुत प्रभावशाली है हम अक्सर एक दूसरे का लिखा पढ़ते रहते हैं । वह मेरे लेखन पर निसंकोच सुझाव देती हैं
और मैं तो उनके लेखन प्रतिभा की प्रशंसिका हूं ।मेरा घर ग्राउंड फ्लोर पर मेरे पास बहुत जगह है तो मैंने लान में तरह-तरह के पौधे लगा रखे हैं ।वहीं बहन जी ने अपने घर की बालकनी में छोटे-छोटे पौधे सजा रखे हैं । इसे वह अपना फार्म हाउस रहती हैं ।
मैं अक्सर उन्हें अपने पौधों में से कटिंग एवं बेबी प्लांट्स निकाल कर देती रहती हूं।वो ऐसे खुश हो जाती हैं जैसे कोई छोटा बच्चा मनपसंद खिलौना का गया हो। कभी-कभी हम दूसरे पड़ोसियों के पौधों में से कटिंग्स मांग कर भी लगाते रहते हैं ।फूलों के मौसम में हम पार्कों में फूल देखने अवश्य जाते हैं और घंटों वहां बैठकर फूलों को निहारते हैं ।मेरे घर में कुछ विशेष व्यंजन बनता है
तो मैं उनके लिए ले जाती हूं यह सोचकर कि वह अकेली रहती हैं अपने लिए क्या बनाएंगी, पर ऐसा बिल्कुल नहीं है ।सावन में खीर सर्दियों में गाजर का हलवा, इडली सांभर ,पाव भाजी जो मन करता है बना लेती हूं अकेली क्यों हूं तुम सब लोगों के साथ में बांट कर खाऊंगी ।उन्हें घूमने का भी बहुत शौक रहा आधी दुनिया घूम चुकी हैं सहेलियों के साथ ।
अब तो चलना भी दुश्वार हो गया है। पिछले 1 साल से उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती बहुत कमजोर हो गई हैं, दांत नहीं रहे तो ज्यादा कुछ खा नहीं पाती पर इससे भी कोई उन्हें शिकायत नहीं दलिया, खिचड़ी ,हलवा ,खीर ,उपमा ,जूस ,सूप कितने व्यंजन हैं खाने को । जीने के लिए बहुत है। जिंदगी भर बहुत खाया है। एक दिन मिली तो बहुत खुश होकर बता रही थी —
आजकल मैं टीवी पर दुनिया की सैर करती हूं। आराम से बिस्तर में बैठकर चाय बिस्कुट खाते हुए इस सैर का अपना ही मजा है । वैसे अब तो अंतिम सफर की तैयारी है। ऐसा ना कहो बहन जी ,अभी हमें आपकी जरूरत है । नहीं नीलम , इस जीवन का कोई भरोसा नहीं ।मैं बहुत संतुष्ट हूं ,खुश हूं ,मैंने जिंदगी को भरपूर जिया है ।
अब भगवान अपने पास बुला लें तो मैं हर तरह से तैयार हूं। आओ तुम्हें अपनी वसीयत दिखाऊं।उन्होंने मुझे अपनी वसीयत दिखाई।अपना मकान धन संपति सब अपने भांजे भांजियों में बांट दिया था।अपना सारा लेखन और किताबें मेरे नाम कर दिया, मैं जानती हूं तुम इनकी असली _हकदार हो और इनका सदुपयोग कर सकती हो ।फिर उन्होंने मुझे अपनी कुछ साड़ियां दिखाई।
यह साड़ियां मैंने तुम्हारे लिए छांट कर रखी हैं। तुम इन्हें पहनोगी तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा मैंने उनमें से दो साड़ियां ले ली। इसके बाद उन्होंने एक थैला निकाला — यह देखो, ये वो कपड़े हैं जो मुझे मेरी अंतिम यात्रा पर पहनाना ।गंगाजल और अन्य जरूरी सामान भी इसी में रखा है ताकि किसी को भाग दौड़ना ना करनी पड़े।
बस बिजली वाले शवदाह गृह में ले जाना और मेरी अस्थियां यहीं यमुनाजी में बहा देना। मेरे लिए एक आदेश और था — मेरे सारे पौधे मेरे मित्रों और पड़ोसियों में बांट देना और यह मेरे घर की चाबी रखो मैं अंदर से ताला बंद करके सोती हूं पर कुंडी नहीं लगाती इस चाबी से बाहर से खोलोगे तो ताला खुल जाएगा।
किसी दिन में मेरी सांसे बंद हो जाए और मैं घर का दरवाजा ना खोल पाऊं, तो तुम चाबी लेकर आना और सब संभाल लेना । कर सकोगी ना मेरे लिए? याद है ना जब तुम यहां रहने आई थी तो मैंने कहा था ईश्वर ने तुम्हे मेरे लिए भेजा है। मेरी सभी सहेलियों को जरूर सूचित करना मेरा जीवन उन्हीं के सहारे इतना अच्छा बीता है ।
मैं चुपचाप सब सुनती रही और सोचती रही- कितनी सुलझी हुई सोच है इस महिला की ! जिंदगी से कोई शिकायत नहीं ,किसी से कोई शिकवा नहीं , कोई अपेक्षा नहीं। अपनी मृत्यु तक की तैयारी कर रखी है!मुझ पर कितना भरोसा है । मैं एकाएक उठकर उनके गले से लग गई।मेरी आंखों में आंसू थे और उनके मुख पर असीम शांति ।ऐसा अनोखा रिश्ता है हमारा।
नीलम गुप्ता