एक रिश्ता ऐसा भी – मधु वशिष्ठ

दादी की आवाज जोर-जोर से आ रही थी वह चाची से बात कर रही थी और कह रही थी

अरे काहे को अभी से बिटिया के लिए वर ढूंढे है, छोरी को पढने दो और फिर बिट्टो वाले मेहमान जैसा ही कोई लड़का देख लियो।”

“क्याआआआआ? दादी ऐसा बोल रही है?”

नाचती हुई बिट्टो रुक कर दादी को देखने लगी। यह वही दादी  जिसने उसकी शादी के समय कितना हंगामा मचाया था। आइए आपको उनके परिवार से मिलाएं। उनके यहां एक रिश्ता ऐसा भी हो गया था जो कि किसी को भी पसंद नहीं था परंतु फिर भी सबको बिट्टो के आगे झुकना पड़ा था।बिट्टो घर की तीसरी बेटी थी। दोनों बहनें और भाई की शादी हो चुकी थी। ग्रेजुएशन करने के बाद बिट्टो ने बैंक का पेपर क्लियर कर लिया था और उसकी नौकरी बैंक में लग गई थी वहीं उसके सहकर्मी राघव के साथ उसने शादी करने का जब घर में फैसला सुनाया तो दादी ने उसके पापा से स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस लड़के का अपना घर ही ना हो, वह लड़की को कहां रखेगा? यह तो छोरी है, तुम तो समझो।

बिट्टो की बाकी दोनों बहनें इतने आलीशान घरों में रहती हैं, इतने बड़े बड़े बिजनेसमैन की पत्नियां है, दादी गुस्साते हुए  बिट्टो के पापा(अपने बेटे)  से बोली तुझे मैंने पहले ही कहा था कि लड़की को नौकरी ना करने दें ,अब भुगत। पापा दादी को सफाई से देते हुए कह रहे थे क्या करूं? सरकारी नौकरी थी तो मैं चुप लगा गया वरना—–। लेकिन अंततः बिट्टो की जिद के आगे सब को हारना पड़ा क्योंकि बिट्टो  ने कह दिया था कि वह राघव से ही शादी करेंगी और हम दोनों मिलजुल कर एक दूसरे का अच्छे से ख्याल रख लेंगे। राघव के माता पिता अयोध्या में रहते थे। उसका एक भाई हैदराबाद में और राघव दिल्ली में रहता था।

बिट्टो की जिद के आगे बेमन सबको झुकना ही पड़ा। किराए के फ्लैट में वह क्या समान रखते इसलिए स्पष्ट रूप से राघव ने कुछ भी दहेज के रूप में लेने से मना कर दिया था। शायद यही कारण था कि मां को बिट्टो के ऊपर  बहुत दया आती थी और वह अक्सर उसे शाम को घर पर ही आने को कह देती थी। दोनों बहनों को तो घर आने के लिए भी सौ नियमों का पालन करना पड़ता था, पहले उनके   घरों में उन बेटियों की सासू मांओं से उन्हें घर पर बुलाने की इजाजत मांगनी पढ़ती थी, फिर  भाई को लिवाने के लिए भेजा जाता। भारी भरकम गहनों में लदी हुई वह बेटियां भी घर आने के बाद अपनी भाभी के साथ अपनी गृहस्थी के ही रोने रोती रहती थी। बिट्टो आज भी पहले के जैसे ही जींस  पहन के घर में सबका काम करवाती रहती थी। राघव ने भी सबका मन मोह लिया था। ससुराल में और जवांइयों के जैसे वह नखरे ना दिखाता था इसके विपरीत  वह रसोई में भी भाभी और मां के साथ काम करवाता रहता था।

जब से बिट्टो ने एक छोटी कार भी खरीद ली थी तब से तो  घर में भी सब के मजे ही आ गए थे किसी को भी शॉपिंग पर जाना हो, बैंक से आकर बिट्टो तैयार। खाना तो भाभी पहले ही बना लेती थी और फिर उसके बाद मां या भाभी बिट्टो के साथ शॉपिंग करने चले जाते थे। भैया और पापा तो दुकान से काफी रात को घर में आते थे और उन्हें फुर्सत ही नहीं थी लेकिन ऐसा अच्छा दामाद तो बेटी से भी ज्यादा लाडला बन गया था। बिट्टो और दामाद जी दोनों साथ-साथ ही योगा करते, अपनी डाइट का ख्याल रखते, मिलजुल कर घर का काम करते थे।शादी के दो साल होने को आए लेकिन मजाल दोनों की उम्र दो महीना भी बढ़ी हुई लगी हो। मस्ती और खुशी दोनों के चेहरे से टपकती थी।

अब जब चाची जी के बेटे की शादी हो रही थी तो लगभग सारी शॉपिंग बिट्टो ने ही करवाई थी| शादी पर दोनों बहनों के भी सास-ससुर आए थे। उनकी आवभगत में उसकी दोनों बहनें और पूरा घर ऐसे लगा था मानो घर में कोई इंस्पेक्टर इंस्पेक्शन करने आ गया हो और उसने घर के लिए नंबर देने हो। दोनों बहनें लगभग हाथ जोड़े हर वक्त ही अपने सास-ससुर की आवभगत के लिए खड़ी हुई थीं कि इसी बीच बिट्टो के सास ससुर भी अयोध्या से आए, तो राघव स्टेशन से सीधा ही उन्हें घर ले आया था।

बिट्टो से गले मिलकर उसके सास ससुर इतने खुश हुए कि सब देखते ही रह गए। शादी के माहौल में बिट्टो और राघव मस्त नाच ही रहे थे कि बिट्टो के कान में आवाज आई| चाची, दादी से बात कर रही थी कि मैं बिल्कुल नहीं चाहती थी कि पहले बेटे की शादी करूँ। रीना भी बीए कर गई, पहले लड़की की शादी कर देते। तभी दादी बोली अरी बहू पगला गई है क्या? छोरी को और पढ़ने दे, नौकरी कर लेगी तो फिर ब्याह भी हो ही जाएगा|  मुझे तो बिट्टो वाला मेहमान ही मेहमान की जगह अपना बेटा सा अच्छा लगता है। दादी में आया बदलाव देखकर बिट्टो मुस्कुरा दी।

पाठक गण आपका क्या ख्याल है? जैसा वह विवाह हुआ ऐसे ही विवाह होने चाहिए ना? 

मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा

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