कुसुम और लता बचपन की दोस्त थीं। साथ-साथ पली बढ़ीं ,एक ही स्कूल में पढ़ीं।दोनों पढ़ाई में अच्छी थी मगर कुसुम के पिता उसे आगे पढ़ाने में असमर्थ थे ।अतः उसने कॉलेज जाने की अपेक्षा घर में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया और साथ-साथ प्राइवेट बीए की पढ़ाई करती रही ।
लता ने बीएससी करने का निश्चय किया था इसलिए एक अच्छे कॉलेज में प्रवेश ले लिया । लता सोचती बेचारी कुसुम ! अपनी पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पाई ।
वहीं कुसुम को लगता लता कितनी किस्मत वाली है अच्छे कॉलेज से मनचाहा कोर्स कर रही है एक दिन डॉक्टर बन जाएगी । दोनों सहेलियों के रास्ते अलग हो गए थे मगर उनकी दोस्ती में कोई अंतर नहीं आया था
।वे दोनों अक्सर मिलती रहती ।कुसुम के माता-पिता ने बीए पूरा होते ही एक अच्छा घर परिवार देखकर उसका विवाह कर दिया । लता मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए विदेश चली गई। पढ़ाई पूरी करके लता वहीं प्रेक्टिस करना चाहती थी परंतु माता-पिता के दबाव के कारण वापस स्वदेश लौट आई।
पिता ने उसके लिए एक अच्छा क्लिनिक बनवा दिया और वह एक सफल डॉक्टर के रूप में स्थापित हो गई ।इस बीच उसकी शादी की चर्चा भी चलती रही पर कोई उचित संयोग नहीं बन पाया । वास्तव में लता अपने कार्य के प्रति इतनी समर्पित थी कि व्यस्तता के कारण उसके पास शादी करने व परिवार की जिम्मेदारियां उठाने का समय ही नहीं था ।
भारत लौटने पर कुसुम से उसका संपर्क पुनः स्थापित हो गया था। उसे पता चला कुसुम के दो बच्चे हैं – एक बेटा और एक बेटी ।बेटा एम.टेक.कर रहा है और बेटी मेडिकल के प्रथम वर्ष में है । पति आयकर विभाग में अधिकारी हो गए हैं ,जीवन बहुत सुख से व्यतीत हो रहा है ।
कुसुम अक्सर उससे कहती लता तू भी शादी करके सेटल हो जा । लता हंस कर कहती – अरे भाई ! आई एम वेल सेटल्ड! तू कभी आकर मिल ना ! पर कुसुम को घर गृहस्थी से फुर्सत ही नहीं थी ।कई वर्ष बाद लता को कुसुम की बेटी की शादी का निमंत्रण पत्र मिला और साथ ही कुसुम ने फोन करके लता से शादी में आने का आग्रह भी किया।
इस बार लता ने कुसुम के घर जाने का निश्चय कर ही लिया ।क्लीनिक जूनियर डॉक्टर के भरोसे छोड़कर एक सप्ताह की छुट्टी ले शादी से पहले ही पहुंचने
का प्रोग्राम बना लिया और कुसुम को अपने आने की सूचना भी दे दी। एयरपोर्ट पर एक सुदर्शन युवक उसके नाम की तख्ती लिए खड़ा था । लता ने हाथ हिलाकर संकेत दिया तो उसने तुरंत आगे बढ़कर उसके पांव छू लिए ।लता ने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा हेलो यंग मैन! कैसे हो ?
ईश्वर की कृपा और मां – पापा के आशीर्वाद से सब ठीक है मौसी ।लता उसकी बात सुनकर हैरान भी हुई और खुश भी।आज के जमाने में भी बच्चे माता-पिता को ईश्वर के समान दर्जा देते हैं ।जल्दी ही वे घर पहुंच गए ।कुसुम उसकी बेटी और ‘मिस्टर’कुसुम उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे ।
कुसुम ने लता को देखते ही उसे गले लगा लिया। बेटी भी नमस्ते मौसी कह कर उसके गले लग गई। कुसुम का घर बहुत बड़ा सुंदर एवं सुव्यवस्थित था। उसके पति भी बहुत हंसमुख और मिलनसार थे। बहुत प्यारा परिवार था कुसुम का । शादी की सभी तैयारियां लगभग हो पूरी हो चुकी थी ।
कोई चिंता कोई हड़बड़ाहट दिखाई नहीं दे रही थी ।लता ने उनके साथ एक सप्ताह हंसी खुशी बिताया और शादी के अगले दिन वापस दिल्ली आ गई।लता सोचती थी बेचारी कुसुम को पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी, अपना कोई करियर नहीं बना पाई। एक साधारण गृहस्थ बनकर रह गई ।उसका कोई सोशल स्टेटस नहीं है इत्यादि।पर कुसुम का सुखी गृहस्थ जीवन देखकर लता को लगा कुसुम तो बहुत ‘किस्मत वाली ‘है।
आज अचानक उसे अपने अकेलेपन का एहसास हो रहा था। फिर उसने सोचा मेरे पास क्या कमी है? मैं उच्च शिक्षित, प्रतिष्ठित डॉक्टर हूं । अपने कार्य के प्रति समर्पित हूं,सफल हूं। समाज में मेरा सम्मान है। इस उम्र में भी चुस्त-दुरुस्त और स्मार्ट दिखती हूं,अपने माता-पिता की देखभाल करने के लिए समर्थ हूं और मैं इसमें बहुत खुश हूं,तो मैं भी कम किस्मत वाली नहीं हूं।–
नीलम गुप्ता