खून के आसूं रुलाना – खुशी

सरला एक तेजतर्रार औरत थी पूरे मोहल्ले में प्रसिद्ध दो बेटियां वो भी मां के अनुरूप और एक बेटा प्रणय पति नीरज जी भी चुप रहने वाले उनकी बीवी के सामने चलती ही नहीं थी।बड़ी बेटी हर्षा की शादी घर के पास ही हुई थी और छोटी गीतू की दूसरे शहर पर वो भी अपने ससुराल वालों से लड़ कर यही आ गई थी।

लड़ाकू होने की वजह से आसपड़ोस में भी किसी से नहीं बनती।बेटियां सारा दिन मायके में पड़ी रहती।प्रणय एक कंपनी में नौकरी करता था वहीं उसके साथ काम करने वाली नंदिनी से उसका चक्कर चल गया।उसने अपनी मां को बताया कि में नंदिनी से शादी करूंगा पहले तो घर में तूफान मचा फिर मां बहनों की सलाह हुई कि हमें वैसे तो कोई लड़की देगा नहीं और आज कल कानून सख्त है

कल को कुछ बुरा भला  कह दिया तो और लेने के देने फिर अपनी पसंद की शादी कर रहा है दहेज अच्छा लेंगे।सरला बोली कौन कौन है उसके घर में ।प्रणय बोला उसके माता पिता नहीं है चाचा चाची ने ही पाला है? है तो तू क्या एक कंगली को हमारे सिर पर लाकर बिठाएगा।

क्या मां आपका बेटा इतना बेवकूफ है उसके बाप की फैक्ट्री थी और एक घर भी है जो नंदिनी के नाम पर है।तो ठीक है अगले इतवार चलते हैं दोनों बहने मां पिताजी और प्रणय उसके घर पहुंचे। घर में चाचा चाची , उनका बेटा विपुल उसकी पत्नी आनंदी और नंदिनी थे।

चाचा चाचा बहुत सज्जन थे उन्होंने कहा इसके पिताजी इसकी शादी की पूरी जिम्मेदारी मुझे सौंप गए हैं अब बेटी ने वर पसंद किया है तो हमारी तरफ से हा है ।आप दहेज में बताए क्या लेंगे।सरला बोली आप जो देंगे वो अपनी बेटी को देंगे पर शादी धूम धाम से होनी चाहिए।मेरे दामादों को सोने की चेन,अंगूठी और घड़ी।

मेरे बेटे को घड़ी सोने की चेन ,अंगूठी सफारी सूट और अचकन । मेरी और बेटियों के टॉप्स ,पायल बिछिया और मेरा सेट ,इनके लिए चेन या अंगूठी और सफारी सूट।बाकी आप जो देना चाहते हैं और गाड़ी ब्रिजा या क्रेटा।मिलनी में कंबल दीजियेगा।बस यही हमारी डिमांड है।

चाचा जी बोले ठीक है बताते हैं आपको ।नंदिनी के चाचा ने सबके जाने पर नंदिनी को बुलाया और बोले मै सब दूंगा पर मुझे लड़के वाले लालची लगे तुम बताओ क्या करना है।नंदिनी बोली जैसा आपको ठीक लगे।घर पहुंचते ही प्रणय का फोन आ गया बोला कुछ कहा चाचा चाची ने।नंदिनी बोली बस मुझसे मेरा निर्णय पूछ रहे थे।तो तुमने क्या बोला जान ।नंदिनी बोली मैने कहा जैसा आप कहे?

प्रणय बोला मै तुम्हारे बिना रह नहीं सकता।अगले दिन द्वारका प्रसाद का फोन आया कि रिश्ता पक्का समझिए और अगले महीने का मुहूर्त निकलवाए सभी बाते पूरी हुई शादी कर नंदिनी घर आ गई। दहेज भी मोटा लाई।घर सब सुख सुविधा से भर गया।शुरू में सब ठीक रहा हनी मून घूमना फिरना फिर 15 दिन बाद प्रणय ऑफिस और नंदिनी घर में सुबह 5 बजे दिन शुरू होता वो 11 बजे खत्म होता ।

रसोई से आते हैं सबसे पहले प्रणय उसे नहाने बोलता पसीने की मसालों की बदबू आ रही हैं।फिर उस पर टूट पड़ता अपनी प्यास बुझा वो सो जाता और नंदिनी अपनी थकान मिटाने की कोशिश में सोती।एक सुबह नंदिनी की नींद नहीं खुली घर में कोहराम मच गया।महारानी उठी नहीं सास ससुर बैठे हैं

ना चाय नाश्ता पूछा आवाज से पहले प्रणय उठा उसने हाथ खींच कर पहले नंदिनी को उठाया सोई पड़ी हो मां चिल्ला रही है जाओ देखो ।नंदिनी नीचे आई बोली जी मां ।उसके बाल पकड़ सरला बोली महारानी तेरे बाप का घर नहीं है जो 9 बजे तक सो रही हैं।चल चाय नाश्ता बना फिर खाना अभी मेरी बेटी दामाद आएंगे।

सुबह से बिना ब्रश किए नहाए वो ऐसे ही काम में लगी थी।सबने खाना खाया पर उसे पूछा भी नहीं सब घूमने चले गए और घर में छोड़ गए और सरला रसोई में ताला लगा गई बोली आज भूखी रह तेरी गलती की सजा देर से उठी ना।प्रणय ने उसकी तरफ देखा भी नहीं और सारे कपड़े धो कर झाड़ू पोछा करके रखना ।सारा काम कर नंदिनी थक गई और छत पर कपड़े सुखाने आई तो पड़ोस की वर्मा आंटी खड़ी थी

बोली दुल्हन कैसी हो कितनी कमजोर लग रही हो।इन चुड़ैल के साथ कैसी निभ रही है। बड़ी बुरी औरते है कुछ परेशानी हो तो बताना बेटा ।नंदिनी फफक कर रो पड़ी  उसने सब बता दिया। वर्मा आंटी उसके लिए खाना ले कर आई और उसे बोली बेटी ये बहुत क्रूर है तू अपना ध्यान रख।नंदिनी नीचे आई और अपने कमरे में नहाने चली गई।नहाकर आई तो सब लोग आ गए थे चलो महारानी चाय बनाओ ।

नंदिनी ने चाय बनाई तो गीतू के पति बोले भाभी आप भी पी ले सुबह से काम कर रही है आप? गीतू का मुंह बन गया और मजबूरी में प्रणय को भी बोलना पड़ा चाय पी लो।सबके चाय पीने के बाद नंदिनी बोली खाना क्या बनाना है।गीतू बोली चलो मैं बताती हूं।इतने में गीतू के पति हेमंत बोले भाई मुझे नहीं खाना मै घर जा रहा हूं तुम भी जल्दी आ जाना ।बड़े दामाद हितेश भी बोला मैं भी कुछ हल्का खाऊंगा

तुम घर ले आना मैं भी जा रहा हूं।सबके जाते ही दरवाजा बंद कर गीतू ने एक थप्पड़ नंदनी को मारा बोली अपने पति से दिल नहीं भरता जो मेरे पति पर डोरे डाल रही है।बड़ी तरफदारी करता है तेरी।क्या बात है? प्रणय बोला क्या मैं पूरा नहीं पड़ता  और दो थप्पड़ नंदनी को मार दिए।नंदिनी खून के आसूं रो पड़ी।

हर दिन उसके साथ यही होता शारीरिक और मानसिक यातनाएं सह कर वो पागल हो गई थी और अब तो जब चाहे बड़ा नंदोई उससे छेड़ता परेशान करता अश्लील फब्तियां कसता इन सब से दुखी हो यातना सहते सहते वो इतनी परेशान हो गई एक बार सब सहपारिवार शादी में गए थे

घर में नंदिनी अकेली थी रात को उसका नंदोई आया नंदिनी के साथ जबरदस्ती कर चला गया।अगले दिन सुबह सुबह गली में एक लाश पड़ी थी।पुलिस आई लोगो ने पहचान की ये तो उनकी बहु है।घर में कोई नहीं है सबको बुलाया गया घर की तलाशी ली गई सुसाइड नोट मिला और नंदिनी की डायरी भी जिसमें सब लिखा था

नंदिनी के साथ हुई दरिंदगी के बारे में भी ।नंदिनी के चाचा चाची को खबर भिजवाई गई।वो आए और उन्होंने कहा हम भी बराबर के भागीदार है हमने ही कहा था वापस मत आना अपना घर बसाना बेटी खुद को बसाते बसाते खुद ही चल बसी इन दरिंदो को छोड़ना मत ।

सबको पुलिस पकड़ कर ले गई और जेल हो गई।पर सास ससुर नंद पति को जमानत मिल गई पर बड़े दामाद को 10 साल कैद बामुशक्कत सजा मिली।एक हंसती खिलखिलाती लड़की का सब छीन ये लोग चैन से बैठे हैं और वो जीवन भर खून के आसूं रो कर अंतिम यात्रा पर चली गई।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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