एक शहर में रितु और साहिल बहुत अच्छे दोस्त थे ।रितु रंगों को बड़ी सुन्दर ढंग से उनकी कैनवस पर पेंटिंग्स बनाती।वही साहिल बहुत अच्छी कहानियां लिखता।रितु और साहिल दोनों ही अपने अपने घरों से दूर रह रहे थे एक ही कालेज में पढ़ते थे तो उनकी दोस्ती हो गई। दोनों अपने अपने क्षेत्र में सफलता पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
रितु अपनी पेंटिंग्स बनाने के बाद सबसे पहले साहित को दिखाती, वही उसकी प्रशंसा करता वही उसकी आलोचना करता। ऐसे ही साहिल भी अपनी कहानी लिखने के बाद सबसे पहले रितु को सुनता, रितु उनकी कहानियां सुनकर भावुक हो जाती जा भी कोई कमी होती तो उसे बदलने के लिए कहती।।
रितु थर्मस में चाय लेकर आती और दोनों पार्क की बैच पर बैठ कर चाय पीते और अपने एक साथ आगे भविष्य में रहने के सपने देखते।
लेकिन कहते समय कुछ पता नहीं साहिल की एक कहानी सफल हो गयी।अब उसे फिल्मों में कहानियां लिखने का ऑफर मुंबई से आया और मैं मुंबई चला गया दिन पर दिन साहिल को सफलता मिलती जा रही थी धीरे धीरे वह रितु को भूलने लग जब भी रितु फोन करती हमेशा कहता बिजी हूं फिर।
साहिल ने फोन उठाना बंद कर दिया रितु को बहुत दुख हुआ। लेकिन वह करती भी क्या फिर रितु ने अपना ध्यान साहिल से हटाकर अपने पेंटिंग्स पर देने लगी उसने सोचा दुखी होकर नहीं बल्कि ख़ुश हो मुझे अपना काम करना चाहिए। उसने अपनी आर्ट गैलरी लगाई
उसे देखने विदेश से लोग आये उन्हें रितु पेंटिंग बहुत पसंद आई। उन्होंने कहा आप ऐसी एंटीक पेंटिंग बनाती हम अपने देश में आपकी आर्ट गैलरी लगाने के लिए मै आपको अपने देश में आमन्त्रित करते ह यह सुनकर रितु तुरन्त हां कह दिया एक साल बाद रितु की पेंटिंग को अन्तर्राष्ट्रीय महिला चित्रकार सम्मान से सम्मानित किया अब उसके पास नाम और शान शौकत शौहरत सब कुछ आ गई ।
वहीं दूसरी और साहिल की कहानी पर लिखी फिल्में नहीं चली तो उसे काम मिलना बंद हो गया। अब साहिल दुखी रहने लगा उसकी कहानियों में अकेलापन और खालीपन का एहसास आने लगा। एक दिन साहिल अखबार पलट रहा था। तब उसने रितु की पुरस्कार लेती फोटो देखी तब उस अपनी गलती का एहसास हूं सफलता के घमंड में सब कुछ भूल गया उसका मन हुआ एक बार रितु से मिलना चाहिए।
एक दिन रितु अपने बगीचे में बैठी वहां बहुत से पत्रकार उसका इंटरव्यू ले रहे थे तभी उसने देख की वहां पर एक व्यक्ति आना रितु ने पत्रकारों से कहा आप की बातें हो गई तो क्या मैं जा सकती हूं ।तब सभी पत्रकार वहां से चले गये रितु उस अनजान व्यक्ति को देखकर बोली तुम ने अपना क्या हाल बना लिया। क्योंकि साहिल के बाल सफेद हो गए ऐसा लग रहा था की वह कई दिनों से नहाया ना हो
साहिल ने कहा तुम्हारे बारे में अखवार पढ़ा तो तुम्हें बधाई देने आ गया। रितु ने कहा तुम कैसे हो साहिल बोला मुझे माफ कर दो। रितु बोली तुमने मुझे जिंदगी का सबसे बड़ा सबक सिखाया
समय समय की बात तुम पैसे, नाम और शोहरत में मुझे और मुझसे किया वादा भूल गए। तभी वहां रखी एक पुरानी पेंटिंग की तरफ इशारा करते हुए कहा इस देखा जब हमारे पास कुछ नहीं था एक साथ बैठ कर चाय पीते कितना शुकुन और खुशी थी लेकिन आज हम दोनों के पास सब कुछ है वह शान्ति और शुकुन नहीं है तुम सफलता देख कर पुराने समय को भूल गये लेकिन मको अभी तब इस पेंटिंग के माध्यम से संजोकर रखा।
साहिल ने रितु का हाथ पकड़ कर कहा क्या हम सब भूलकर एक नई शुरुआत कर सकते हैं रितु ने कहा हां बिल्कुल क्यों नहीं लेकिन सोचो अगर मैं तुम्हारे पास इस तरह प्रस्ताव लेकर आती, तो क्या तुम मान जाते। साहिल देखता रहा कहा समय बड़ा बलवान होता है इसलिए कभी घमंड नहीं करना चाहिए।
लेकिन रितु मन साफ था उसने साहिल से हां कह दी क्योंकि रितु इतने सालों से इसी पल का इंतजार कर रही की कब हम दोनों एक साथ अपना उज्जवल भविष्य बनाये
सब समय समय की बात है
विनीता सिंह