जो बेटा माँ बाप की सेवा नहीं कर सकता,उसे उनके पैसो पर भी नजर नहीं रखनी चाहिए।अभिषेक जी नें अपनी सम्पति से बेदखल करके अपने बेटे अनय को अच्छे से समझा दिया था। पापा नें उसे अपनी सम्पति से बेदखल कर दिया है सुनकर अनय तो एकदम ठगा ही रह गया था। कहाँ तो उसने ख्वाब देख रखे थे
कि माँ के श्राद्ध के बाद सारी सम्पति बेचकर बंगलौर मे एक फोर बी एच के का फ्लैट लूंगा। अब दो कमरे के फ्लैट से काम नहीं चल रहा है।दोनों बच्चे भी बड़े हो गए है तो उन्हें भी अब अलग अलग कमरा चाहिए।अनय और उसकी पत्नी का एक कमरा होगा।
तीन कमरे तो अपने उपयोग के लिए ही चाहिए।किसी के आने जाने के लिए भी एक कमरा होना ही चाहिए,नहीं तो जब भी उसके सास ससुर आते है तो अभी दो कमरे मे बहुत ही दिक्कत होती है और सास ससुर तो छह माह रहते ही है। वह अपने ख्वाबो को टूटते देखकर बौखला गया
और अपनी बहन अंजू पर चिल्लाने लगा। तुमने माँ पापा को मेरेखिलाफ बहकाकर सारी सम्पति अपने नाम करवा ली। मुझे उसी वक़्त चेत जाना चाहिए था जब पता चला,तुमने माँ को अपने यहाँ लाकर रखा है। अच्छा आपको पता था माँ हमारे यहाँ है?
चलो माँ की इतनी जानकारी तो रखी आपने। माँ यह सुनती तो बहुत खुश होती और कहती कि देखो मेरा बेटा मेरे बारे मे पता करता रहता है। बेचारे को काम से फुरसत नहीं रहती है इसलिए मिलने नहीं आ पाता है,उसके जीजाजी नें व्यंगात्मक तरीके से कहा।वैसे हमने माँ की सेवा की तो उनकी सम्पति ली।
आपने जब माँ पापा की सेवा ही नहीं कि तो उनकी सम्पति पर आपका अधिकार कैसा? हम भाई बहन के बीच मे आप नहीं बोलिए और आप दोनों यह नहीं समझना कि मेरी सम्पति को इस तरह से पचा लोगे। छोडूंगा नहीं तुम्हे तो कोर्ट मे घसीटूँगा समझी अनय अपनी बहन को धमकाते हुए बोला।भैया आप को जो करना है कीजिये।
हमने आपको रोका नहीं है पर मेरे सामने मेरी पत्नी से गलत ढंग से नहीं बोलिए,नहीं तो मै रिश्तो का लिहाज भूल जाऊंगा। आपके लिए यह अच्छा होगा कि आप यहाँ से अपना सामान उठाए और चलते बने। उसके जीजाजी नें गुस्सा होते हुए कहा। जा रहा हूँ पर अपनी सम्पति ऐसे ही नहीं छोड़ दूंगा।
तुमलोग समझते क्या हो? माँ को बरगलाकर सम्पति अपने नाम करवा ली तो वह तुम्हारी हो गई? वह मेरी है और मेरी ही रहेगी। तुम्हे उसे मुझे देना ही होगा। और भी बहुत कुछ बोलकर अनय वहाँ से चला गया। बहन बहनोई से उसने कभी रिश्ता नहीं रखा था पर आज तो उसने रिश्ते की मर्यादा भी खत्म कर दी थी।
उसके जाने के बाद अंजू रोने लगी और अपने पति से कहा आपने भैया को सही बात क्यों नहीं बताई? बेकार ही उनके मुँह लगे और अपने उपर इल्जाम लिया।सफाई उसे दी जाती है जो उसके काबिल हो। तुम्हारे भैया नें कभी भी माँ पापा की जिम्मेदारी नहीं ली और अब उनके मरने के बाद उनकी सम्पति लेने आ गए।ज़रा भी लाज शर्म नहीं है उनमे।
पापा के वक़्त भी दो दिन के लिए आए और माँ के वक़्त भी यही किया। अपने तो दो दिन के लिए आए भी पर अपनी पत्नी और बच्चो को तो लाना भी जरूरी नहीं समझा। माँ पोता पोती से मिलने के लिए तड़पती मर गई। ऐसे बेटे बहू के साथ ऐसा व्यवहार ही करना चाहिए जैसा तुम्हारे पापा नें किया।
पापा जानते थे कि माँ ऐसा कुछ नहीं करेगी इसलिए उन्होंने इसका इंतजाम पहले ही कर दिया।अंजू के पति नें उसे समझाते हुए कहा।आप सब ठीक कह रहे है पर हम इसका इल्जाम अपने उपर क्यों ले?अंजू नें पूछा।तुम्हारे भैया के कहने से क्या होता है सारे रिश्तेदार सच्चाई जानते है
और मुझे तुम्हारे भाई के कुछ भी सोचने से कोई फर्क नहीं पड़ता है और तुम्हे भी नहीं पड़नी चाहिए।यह सब कहकर अंजू के पति वहाँ से चले गए। उनके जाने के बाद अंजू सोचने लगी. यह सब कहना कितना आसान है पर भला क्या कोई अपने माँ, पापा, भैया, भाभी या भतीजा भतीजी को भूल सकता है?
भैया की शादी हुई तो वह कितनी खुश थी घर मे भाभी आएगी,दोनों सहेलियों की तरह प्यार से रहेंगी। अंजू के माता -पापा का सोचना था कि पहले अंजू का विवाह कर दे फिर अनय का विवाह करेंगे। पर अंजू नें कहा नहीं पहले भैया का विवाह कर दो।थोड़ा मै भी भाभी का सुख उठा लुंगी और मेरे जाने के बाद घर मे सुनापन भी नहीं आएगा।
फिर बहू रहेगी तो मेरी शादी मे माँ का काम मे हाथ भी बटा देगी।बड़े चाव से उसने भाभी को घर मे प्रवेश करवाया पर उसकी भाभी को इस घर मे रहने का कभी चाव ही नहीं हुआ। हमेशा मायके मे ही रहती। दो बहने ही थी इसलिए बहाना था कि भाई नहीं है तो माँ बाप की सेवा का फर्ज बेटी का ही तो है। माँ बाप की सम्पति लेंगे तो सेवा भी तो करना होगा?
उस समय भाभी यह भूल जाती थी कि सास ससुर की सम्पति लेने के लिए भी तो उनकी सेवा करनी होंगी। पर नहीं सास ससुर की सम्पति पर तो बेटा बहू का अधिकार होता है।अंजू के विवाह के वक़्त भी मेहमानों के समान विवाह के एक दिन पहले आए थे।
अंजू के विवाह के बाद तो वह कभी घर आई ही नहीं,पर भैया कभी कभी आते थे पर बाद मे तो धीरे धीरे भाई नें भी आना बंद कर दिया। छुट्टियों मे दोनों भाभी के मायके चले जाते थे। माँ कितना तड़पती थी पोता पोती को देखने के लिए पर भाभी कभी लेकर नहीं आती।
भैया के इस बर्ताव के कारण पापा नें गुस्सा होकर सारी सम्पति को बेचकर बैंक मे पैसे को जमा कर दिया और उसके सूद को उन्होंने एक बृद्धा आश्रम के उपयोग के लिए दे दिया। उन्होंने बिल किया कि मेरे पैसो का जो भी इंट्रेस्ट आएगा उसपर वृद्धाआश्रम का मालिकाना हक होगा पर मूलधन को वह खर्च नहीं कर सकता था।
घर बेचने के बाद वे लोग अंजू के घर के पास ही किराये पर फ्लैट लेकर रहने लगे। दोनों पति पत्नी के खर्च लिए उनका पेंशन काफ़ी था। थोड़े दिनों बाद जब पिताजी की मृत्यु हो गई तब अंजू माँ को अपने घर ले आई।माँ का मन बेटी के घर जाने के लिए तैयार नहीं था।
पुराने सोच की थी उनका मानना था कि बेटी के घर का पानी नहीं पीना चाहिए। वे बेटी के घर अपना पेंशन खर्च कर के खाएंगी यह सब समझा बुझाकर अंजू किसी तरह उन्हें अपने घर लाई थी। माँ को सम्पति बिकने या उस पैसे को दान कर देने की बात पता नहीं थी।
उन्हें तो बस यही लगता कि बेटा कम से कम अब पिता के नहीं रहने के बाद अपनी सम्पति को संभाल लेता। इसी तरह बेटा पोता से मिलने की आस लिए वह भी एक दिन इस दुनिया को छोड़ कर चली गई। सारे काम खत्म होने के बाद अंजू नें जैसे ही कहा कि भैया पापा नें आपको अपनी सम्पति से बेदखल कर दिया है। बस उसके बाद उसने और कुछ सुनने की जरूरत नहीं समझी और लगा अंजू पर चिल्लाने।
अंजू अभी माँ के ग़म से ही नहीं उबरी थी,भाई नें भी दुखी कर दिया। अंजू के घर से जाने के बाद अनय एक वकील के यहाँ गया। सारी बातो को जानने के बाद वकील नें कहा कि सारी सम्पति आपके पिता नें कमाई थी।इसलिए वे उसे जिसे चाहे दे सकते है। पैतृक सम्पति होता तब आप उस पर केस कर सकते थे पर अब आप इसको पाने के लिए कुछ नहीं कर सकते है। वकील के पास से सकारात्मक जबाब नहीं मिलने पर वह अपनी अंतिम आशा लेकर बुआ के घर गया।
बुआ नें आदर भाव किया और पूछा बोलो बच्चा कैसे आना हुआ?उसने बुआ से कहा बुआ आपने दादाजी की सम्पति मे अपना हिस्सा लिया था? नहीं,नहीं लिया था। वैसे तुम्हारे दादाजी के पास सम्पति के नाम पर तुम्हारे पापा ही थे।उन्होंने ही पढ़ लिखकर माँ पापा को भी तीर्थ व्रत कराया,मेरा विवाह कराया। वैसे तुम ये क्यों पूछ रहे हो? देखो ना बुआ,अंजू नें पापा की सारी सम्पति अपने नाम करवा ली है।
अब तुम्ही बताओ,बेटियों को मायके की सम्पति लेना शोभा देता है?अनय की बात सुनते ही बुआ नें कहा तुम्हारी पत्नी नें भी तो मायके की सम्पति ली है। वह अलग बात है उसका तो कोई भाई नहीं है इसलिए ली है। अनय नें बुआ को अपनी बात समझानी चाही।
बेटे अपने माता पिता की बुढ़ापा मे सेवा करते है,इसलिए वे उनकी सम्पति पर अधिकार रखते है। बेटियां ससुराल मे रहने के कारण सेवा नहीं कर पाती तो सम्पति पर अधिकार भी नहीं जताती है पर तुम्हारे यहाँ तो तुम्हारी बहन नें ही माँ पापा की सेवा की, इसलिए कायदे से सम्पति पर उसका ही अधिकार बनता है। इस विषय पर अनय कुछ कह नहीं सकता था क्योंकि ससुर की सम्पति लेने के चक्कर मे उसने अपने पिता पर ध्यान ही नहीं दिया था।
फिर बुआ नें कहा वैसे सभी व्यक्ति तुम्हारे जैसे ही नहीं होते है जो सम्पति के लिए रिश्तो का मान सम्मान भी भूल जाए। हमारे दामाद तो हीरा है उन्होंने सम्पति लेने से साफ मना कर दिया और कहा कि यदि आप सम्पति भैया को नहीं देना चाहते है
तो उसे बैक मे जमा कर दे जिससे की उन वृद्धाओ को की कुछ सहायता हो सके जिनके बच्चे उन्हें बुढ़ापे मे दर दर भटकने को छोड़ देते है। सारी सम्पति वृद्धाआश्रम के पास है अंजू के पास कुछ भी नहीं। बुआ की बात सुनकर अनय वहाँ से अपना सा मुँह लेकर निकल गया।
विषय —अधिकार कैसा?
लतिका पल्लवी