अनु कि शादी अनिल से हुई तो वो दहेज में बहुत सारा सामान लेकर आई. दहेज के दम पर वो बहुत इतरा रही थी. वैसे जो भी सामान वो लाई थी, लगभग वो सब पहले से घर मैं मौजूद था, पर फर्क इतना था कि थोड़ा पुराना था पर कोई खराबी नहीं थी.
दो चार दिन घर मैं रहने के बाद अनु और अनिल घूमने के लिए मनाली चले गए और 15 दिन बाद लौटे. कुछ दिन बाद अनिल ने ऑफिस जाना शुरू कर दिया और अनु सास ससुर के साथ घर पर गप्पें मारती.
एक दिन अनु ने सास से बोला, माँ जी, नया टी. वी. हॉल मैं पुराने टी. वी. कि जगह और फ्रिज, माइक्रोवेव आदि किचन मैं लगा कर पुराना सब सामान बेच देते है. सासु माँ बोली, कुछ भी बेचने कि जरूरत नहीं है, पुराना टी. वी. और फ्रिज हमारे रूम मैं शिफ्ट कर दो और बाकी सामान स्टोर मैं दाल दो.
शाम को अनु ने अनिल से सारी बातें बड़ा चडा कर बताई. रात को खाना खाते हुए अनिल बोला, माँ, अनु बोल रही थी कि आपने पुराना टी. वी. बेड रूम मैं लगाने के लिए बोला है, माँ बोली कि अनु चाहती है कि पुराना टी. वी. बेच देते है और उसकी जगह नया वाला लगवा देते है, मैंने बेचने को मना किया और कहा कि उसे अंदर हमारे बेड रूम मैं लगवा दो.
तब अनु बोली, 2 टी. वी. होंगे तो हजार 1500 रु. का नया केबल कनेक्शन भी लेना पड़ेगा, सास ने पूछा, बहु, टी. वी. कितने का आया है? माँ जी होगा कोई 50-60 हजार का, अनु का जवाब था. माँ जी बोली, तुम्हारे पिताजी ने टी. वी. दें दिया, तुम केबल का खर्चा भी नहीं सहन कर सकते? बहु बोली, 2-2 कनेक्शन तो वेस्ट है माँ जी. माजी बोली, बहु, वेस्ट तो 2-2 टी. वी. है, कनेक्शन नहीं. जब घर मैं सब सामान था, तो दूसरा लाने कि क्या जरूरत थी? हमने तो मना किया था, पर तुमने अपनी मर्जी चलाई.
कुछ दिन बाद अनु के सास ससुर तीरथ पर चले गए. जब 10 -12 दिन बाद तीरथ से लौटे, तो देखा कि घर का सारा पुराना सामान गायब था. जब सासुमाँ ने पूछा तो बहु बोली, इन्होने पुराना सामान बेच दिया है. माँ ने अनिल से पूछा तो वो बोला, तो क्या हुआ, आप समझलो पुराने कि जगह नया आ गया है.
माँ चुप रह कर बेटे बहु के नजारे देखती रही. अनु के कहने पर अनिल ने अपना ट्रांसफर दूसरे शहर मैं करवा लिया. एक दिन अनिल ने माँ को बताया कि मेरा ट्रांसफर हो गया है और हम जल्दी ही चले जायेगे. इसी बीच अनु और अनिल एक संडे को जाकर मकान आदि फाइनल करके आ गये.
कुछ दिन बाद जाने के लिए पैकिंग शुरू हो गई. जब सामान पैक हो रहा था तो माँ जी ने फ्रिज, टी. वी. सोफा आदि पैक करने से मना कर दिया. जब बहु ने कहा कि ये सब मेरे दहेज़ का समान है, इसपर मेरा अधिकार है. “अधिकार कैसा” ? माँ जी लगभग चिल्लाते हुए बोली,
मेरे मना करने के बाद भी मेरे घर का सारा सामान बेच दिया. अब हम क्या खाली दीवारों मैं रहेंगे और जमीन पर बैठेंगे? सामान बेच कर जो पैसे तुमने अपने जेब में डाले थे, उन्ही पेसो से वहाँ जाकर नया सामान ले लेना. सासु माँ का ये रूप देखकर बेटा बहु दोनों शांत हो गए और बाकी सामान पैक करवा कर ट्रक लोड कर दिया.
बहु अगर दहेज कम लाये तो सास ताने मारती है, और अगर बहु दहेज ज्यादा लाये तो ससुराल मैं रोब जमाती है. इस दहेज प्रथा के चलते सास बहु के रिश्तों में कड़वाहत पैदा होती है, दहेज प्रथा को बढ़ावा नहीं देना चाहिए.
क्या सासु माँ ने दहेज़ मैं आया सामान अपने पास रख कर कुछ गलत किया?
साप्ताहिक विषय – अधिकार कैसा?
लेखक
एम. पी. सिंह
(Mohindra Singh )
स्वरचित, अप्रकाशित