जब से आरती जी का रिटायरमेंट हुआ है। तब से घर वालों की नजरे उन्हें कुछ अलग अलग सी लग रही थी, फिर भी उन्होंने ज्यादा गौर नहीं किया और वे मन ही मन सोचने लगी।
शायद यह मेरा भरम हो सकता है और बागवानी करने में व्यस्त हो गई। ऐसे भी हमेशा से उन्हें सुबह जल्दी उठने की आदत थी और जब तक बगीचे में जाकर अपने लगाए हुए पौधों और फूलों को देख नहीं लेती। उनसे दो-चार बातें नहीं कर लेती।
तब तक उन्हें चैन नहीं मिलता था। आरती जी का यही मानना था कि जब तक पौधों का ख्याल अपने बच्चों की तरह नहीं रखा जाए। वह ठीक से खिल नहीं पाते इसीलिए रोज सुबह उठते ही वे सबसे पहले अपने बगीचे में पहुंच जाती और जिसको जिस चीज की यानी की पानी या खाद की जरूरत होती। उन्हें वह बड़े प्यार से देती और उन्हें सहलाती। उसके बाद अख़बार लेकर बैठती और एक कप चाय पीती, जो कि महरी शीला या फिर कभी-कभी राकेश जी या खुद बना लाती । जो पति पत्नी एक साथ बैठकर पीते ।
वह सुबह वाली चाय बड़ी सुकून वाली होती थी और उसके बाद तैयार होकर रसोई में हल्का-फुल्का बहू सूचि और सैनी के साथ मिलकर नाश्ता आदि बनाने में उनकी मदद करती।
राकेश जी ऑफिस के लिए जब निकलते, तो आरती जी को भी साथ ले जाते थे,क्योंकि उनकी ऑफिस भी राकेश जी के रास्ते में ही पड़ती थी, तो उन्हें छोड़ते हुए वह अपने ऑफिस चले जाया करते थे।
मगर राकेश जी का तो पहले ही रिटायरमेंट हो चुका था और अब आरती जी का भी हो चुका था। रिटायरमेंट के तुरंत बाद आरती जी को अपने घर वालों के व्यवहार में बदलाव खासकर दोनों बहू सूचि और सैनी में नजर आने लगा।
दोनों ही न जाने आपस में क्या गुपचुप में बातें करती रहती थी मगर, उन्होंने कुछ कहना सही नहीं समझा और चुप रही।
आज अचानक आरती जी की सहेली मीना जी का फोन आ गया। फोन उठाते ही वो कहने लगी । अरे आरती अब तो तुम्हारा भी रिटायरमेंट हो गया है। जरा घर वालों से संभल कर रहना या तो वो तुम्हारी जायदाद व पर्सनल पैसे हथियाने के लिए तुम्हारी खूब देखभाल करेंगे और या फिर तुम्हें बिल्कुल ही अनदेखा करेंगे, क्योंकि अब तुम घर बैठ गई हो।
अपनी सहेली मीना की बात सुनकर आरती जी फोन पर तो तुरंत बोल उठी । अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। मेरे घर तो सब कुछ ठीक है कहकर कुछ देर इधर-उधर की बातें कर के फोन रख दिया मगर फिर उनके मन ने उनको सोचने पर मजबूर कर दिया।
मेरी दोनों बहू सूची और सैनी देखने में भी इतनी प्यारी और सोच की भी बहुत भली है फिर वह ऐसा मेरे साथ क्यों करेगी । आरती जी को इस तरह गुमसुम देखकर राकेश जी पूछने लगे।
क्या बात है आरती,कुछ देर पहले तो तुम बिल्कुल ठीक थी, मगर अपनी सहेली मीना से बात करके अब उदास हो गई हो । आरती जी कुछ कहती उसके पहले ही अचानक सूची ने आकर आरती जी के हाथ में मसूरी जाने की दो टिकट थमाते हुए कहा।
मम्मी जी आपने घर और ऑफिस को संभालने में कभी अपने बारे में सोचा ही नहीं मगर विवान हमेशा से कहते आए हैं। जिस दिन पापा के साथ-साथ मम्मी का भी रिटायरमेंट हो जाएगा। दोनों को मसूरी घूमने जरूर हम अपनी तरफ से भेजेंगे। वैसे पापा का रिटायरमेंट तो पहले हो गया था।
मगर वह अकेले कैसे जाते इसीलिए अब आपकी रिटायरमेंट के बाद हमने यह बंदोबस्त किया है।
प्लीज मम्मी जी आप इनकार मत कीजिएगा क्योंकि यह मेरी और सैनी की ही नहीं बल्कि आपके दोनों बेटे विवान और राज की भी बहुत इच्छा है।
अचानक कमरे में आते हुए विवान और राज भी बोल पड़े। हां मां आप घर और ऑफिस की जिम्मेदारियां के बीच कभी बाहर जा ही नहीं पाई ।
मगर अब ऐसा कुछ नहीं है इसीलिए फिलहाल तो आप और पापा मसूरी घूम कर आए और फिर आपके और पापा के लिए हम बहुत अच्छी सी एक पार्टी करेंगे। जिसमें सभी परिवार वाले और आपके मित्रगण सम्मिलित होंगे कहते हुए विवान और राज भी आरती जी के घुटनों के पास आकर बैठ गए।
तब सैनी भी सलवार सूट की पैकेट आरती जी को थमाते हुए कहने लगी। यह लीजिए मम्मी जी जब आप उधर मसूरी घूमने जाएंगे तो मेरी और सूची भाभी की तरफ से यह कुछ सूट है। जो आप जरूर पहन लीजिएगा और हां मम्मी जी विवान भैया और सूची भाभी राज और मैं चारों आपसे छुप छुप कर यह प्रोग्राम बनाते रहे क्योंकि हमें पता था अगर आपको पहले बता दिया गया तो आप इनकार कर देंगी ।
आरती जी से यह सब देखा ना गया और भाव विभोर होकर कहने लगी । मुझे माफ कर दो मेरे बच्चों। तुम सबने मेरे और पापा के लिए इतना सोचा, मगर मैं तो तुम चारों की आपस की गुपचुप की बातों को कुछ और ही समझ बैठी थी।
आरती जी कुछ कहती उसके पहले ही राकेश जी बोल पड़े। मैं समझ गया कुछ देर पहले तुम्हारी सहेली मीना का फोन आना और फिर तुम्हारा उदास होना । वह जरूर तुम्हें रिटायरमेंट के बाद के अनुभव बता कर डरा रही होगी।
अरे ऐसी सहेलियों की बातों को कभी सुनना ही नहीं चाहिए क्योंकि हर घर की अलग कहानी होती है। सबके अलग व्यवहार होते हैं ।
तुम्हारा व्यवहार तुम्हारी बहू के प्रति, तुम्हारे घर वालों के प्रति कैसा था। तुम्हारे रिटायरमेंट के बाद के जीवन पर ये जरूर निर्भर करता है क्योंकि हम सब जानते हैं ।
हम जो देते हैं, वही तो पाते हैं ।
अगर तुमने सताया है,तो तुम भी उसी की हकदार हो जाओगी कहकर राकेश जी मुस्कुराने लगे। आरती जी और बच्चे सभी राकेश जी की बात सुनकर हंसने लगे और फिर मुस्कुराते हुए आरती जी बोल उठी थी।
अजी मैंने तो अपनी बहुओं को बेटियों की तरह माना है । आप मुझे छेड़ना छोड़िए और मैं समझ गई कि रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी भी अपनी बहुत खूबसूरत होने वाली है। तब विवान और राज भी मुस्कुराते हुए बोल उठे ।
हां मां आप बिल्कुल सही कह रही हैं मगर मसूरी जाने से पहले आपको मठरी जरूर बनाकर देनी होगी। तब सूची और सैनी भी कहां पीछे रहने वाली थी। वह भी मुस्कुरा कर आरती जी से कहने लगी। हां मम्मी जी आपके हाथ की बात कुछ अलग ही होती है ।
जरूर मेरे बच्चों मैं अभी गरमा गरम मठरी बनाकर तुम सबको खिलाती हूं कह कर आरती जी रसोई की ओर चल पड़ी। आरती जी के कदम चलते-चलते भी बहुत सुखद खुशी का एहसास कर रहे थे क्योंकि आज उन्हें रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी भी बहुत खूबसूरत दिख रही थी।
स्वरचित
सीमा सिंघी
गोलाघाट असम