आत्मनिर्भर – अंजना शर्मा : Moral Stories in Hindi

श्रीमती शुक्ला अभी कुछ माह पहले ही केन्द्रीय विद्यालय से सेवानिवृत्त हुई है। शुरू से ही क्योंकि मायके में भी पिताजी हेडमास्टर थे मिडिल स्कूल के तो घर का वातावरण बहुत अनुशासित था, तो सुनीता शुक्ला जी को भी आदत थी अपने सभी काम समय पर और ख़ुद से ही करने की ।

अब बेटा बड़ा हो गया और बहुत अच्छी नौकरी भी कर रहा है तो उसके शादी के लिए बहुत रिश्ते आ रहे थे ।

आजकल सुनीता जी बस एक अच्छी सी लड़की की तलाश में थी अपने बेटे  के लिए ,तभी एक अच्छे परिवार से रिश्ता आया जो सुनीता जी और उनके परिवार वालों को अच्छा लगा बात करके तो दोनों परिवार वालों ने मिल बैठ कर एक दूसरे को और समझने के लिए स्थान और समय निश्चित किया ।

सुनीता जी को लड़की बहुत पसंद आयी क्योंकि देखने में ऐसी कोई कमी नहीं थी लड़की में कि मना किया जा सके ।

बेटे की इच्छानुसार लड़की नौकरी भी करती थी और जैसा उसके माता पिता ने बताया कि हमारी बच्ची बहुत इंडिपेंडेंट हैं सब कुछ ख़ुद से करती है किसी को परेशान नहीं करती किसी काम के लिए तो सुनीता जी को बहुत ख़ुशी हुई कि चलो आत्मनिर्भर है हर तरीक़े से तो अनुशासित तो होगी ही ।

थोड़े समय के बाद बेटे की शादी हो गई । बहू के आने से रौनक़ हो गई घर में । बहू पहले दिन की सुबह ही ख़ुद के लिए कॉफ़ी बनाने किचन में जाने लगी तो सबने मना किया उसको   कि नयी बहू नहीं करती कुछ काम थोड़े दिन तक , अभी तो आराम करो , घूमो फिरो ।

फिर जब सब रस्मों रिवाज पूरे हो गये 

घर से मेहमान विदा हो गये तो अगली सुबह बहू रानी किचन में आयी और अपने लिए कॉफी बना कर ले गई अपने रूम में,

सुनीता जी को अजीब तो लगा पर कुछ बोला नहीं ।

अगले दिन बहू को भी काम पर जाना था तो वो जल्दी ही किचन में आ गई और अपनी कॉफ़ी बनायी फिर ख़ुद कि लिये लंच बॉक्स रेडी किया और तैयार होने चली गई ।

सुनीता जी भी बहू की हेल्प करने किचन में आयी तो देखा बहू ने अपना ही लंच बॉक्स पैक किया है 

बेटे के लिए कुछ नहीं बनाया 

सुनीता जी को लगा कि बहू को बेटे की पसंद का पता नहीं है इसलिए ख़ुद के लिए ही बना कर ले गई हैं।

सुनीता जी ने बेटे का लंच पैक किया और फिर रोज़ के काम निबटाये।

थोड़े दिन तक यही सब चलता रहा तो फिर सुनीता जी ने एक दिन पूछ लिया बहू से कि क्या बात है तुम सिर्फ़ अपनी चाय 

अपना नाश्ता 

अपने कपड़े ही मशीन में डालती हो ।

बाक़ी घर के किसी भी सदस्य के लिए कुछ ना करती हो ना ही किसी से पूछती हो कि उनको भी कुछ चाहिए या खाना पीना है क्या?

तो बहुरानी ने जवाब दिया कि मम्मी जी मेरे मम्मी पापा ने आपको बताया था ना की में ख़ुद का कोई काम किसी से नहीं कराती ना ही किसी को अपने किसी काम के लिए परेशान करती हूँ 

मैं इंडिपेंडेंट हूँ ….

और तब आपने बहुत खुश हो कर कहा था कि सबको होना चाहिए आत्मनिर्भर।

अब सासु माँ सुनीता जी को आत्मनिर्भर की नयी परिभाषा समझ आ गई और वो सोचने लगी कि अब तक वो जो थी क्या वो आत्मनिर्भर नहीं थी क्या ?                                

           … एक बूँद 

                      अंजना शर्मा

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